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तृप्ति ने लंड हिलाया

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम शुभ है और यह मेरे जीवन की एक सच्ची घटना है जिसे में आज आप सभी को सुनाने जा रहा हूँ.. दोस्तों में पिछले कई सालों से सेक्सी कहानियाँ पढ़ता आ रहा हूँ और वो मुझे बहुत अच्छी भी लगती है. तो अब में आपका ज्यादा समय खराब ना करते हुए सीधा अपनी आज की कहानी पर आता हूँ.. लेकिन उससे पहले थोड़ा अपना भी परिचय करवा देता हूँ.
दोस्तों में पुणे का रहने वाला हूँ और मेरी उम्र 22 साल है और यह कहानी तीन साल पुरानी है. दोस्तों में एक प्राईवेट कंपनी में नौकरी करता हूँ और मैंने कुछ समय पहले ही नई नौकरी शुरू की थी और उसी दौरान मेरी मुलाकात तृप्ति नाम की एक लड़की से हो गयी.. वो भी सॉफ्टवेर में ही नौकरी करती थी. वो दिखने में बहुत ही सेक्सी थी और वो बहुत सीधी लड़की थी. खास करके उसके बूब्स बहुत ही मस्त थे.. गोल गोल बड़े और एकदम सेक्सी और कमर भी बहुत हसीन थी.
दोस्तों मैंने जिस दिन से उसे देखा था उस शुरू दिन से ही में उसकी तरफ बहुत आकर्षित था और में धीरे धीरे उससे बहुत घुल मिल गया था और हम बहुत दिनों तक एक दूसरे से ऐसे ही बातचीत हसीं मजाक करने लगे और बहुत दिनों तक फोन पर बात करने के बाद मैंने एक दिन उसे अपने दिल की बात कही और वो भी मान गयी और फिर हमारी लव स्टोरी शुरू हो गयी.. लेकिन शुरू शुरू में हम सिर्फ़ फोन बात करते और कभी कभी मौका मिलने पर कहीं बाहर जाकर खाना खाते और उस समय तक ना कोई किस, ना बूब्स दबाना और चुदाई तो बहुत दूर की बात थी.

फिर ऐसे ही एक दिन में उसे बाहर खाने पर ले गया और मैंने पहली बार खाना खाने से पहले अच्छा मौका देखकर उसका हाथ पकड़ा.. तो वो एकदम शरमा सी गयी और फिर आते समय भी मैंने ऑटो में उसका हाथ पकड़ कर ही रखा और वो भी ऑटो में मुझसे एकदम चिपककर बैठी थी और मुझे पहली बार उसके सेक्सी बदन का स्पर्श महसूस हो रहा था और में बहुत जोश में गया.. लेकिन हम ऑटो में कुछ कर नहीं पाए.
फिर मैंने उसे उसके घर के पास छोड़ दिया.. लेकिन मेरे दिमाग़ से उसके बदन का स्पर्श जा ही नहीं रहा था मुझे उसके जिस्म की वो खुश्बू ना चाहते हुए भी मदहोश कर रही थी. में उसके ख्यालों में खो सा गया और उसी रात मैंने हिम्मत करके बातों ही बातों में उसे एक बार किस करने के बारे में पूछा तो पहले वो मना कर रही थी.. लेकिन मैंने उसका पीछा नहीं छोड़ा और में अपनी जिद पर अड़ा रहा.. कुछ देर बार तो वो मान गयी.. लेकिन अब हमें किस करने के लिए मौका और जगह नहीं मिल रही थी और आख़िरकार एक दिन वो मौका हमें मिल गया. वो अपनी कुछ सहेलियों के साथ एक रूम पर रहती थी.. क्योंकि उनका रूम बहुत बड़ा था और उसकी सहेली भी इधर उधर नौकरी करती थी.
एक दिन उसने अपनी तबीयत ठीक नहीं होने का नाटक किया और घर पर ही रुक गई और बाकी की सभी सहेलियां अपनी अपनी नौकरी पर चली गयी और अब वो अकेली ही रूम पर थी. तो उसने ठीक मौका देखकर मुझे फोन करके अपने रूम पर बुला लिया और में भी बहुत खुश होकर उसके रूम पर पहुंच गया और मैंने धीरे से दरवाजा खटखटाया और कुछ देर में ही उसने दरवाजा खोला और में उसे देखकर एकदम चकित हो गया वो अपनी उस नाईटी में एकदम सेक्सी लग रही थी और में उसके बाहर निकलकर झांकते हुए बूब्स को कुछ समय रुककर देखता ही रहा और उसने जब मुझे छूकर अंदर आने को कहा तो में अपने होश में आया और एकदम बेसुध होकर बैठकर गया और उसे देखने लगा.
वो जाने लगी और में उसकी मटकती हुई पतली कमर और बड़ी सी गांड को निहारने लगा. फिर मेरे लिए पानी लेकर आई.. मैंने पानी पी लिया और हाथ पकड़कर उसको अपने पास बैठा लिया.. लेकिन अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था और मैंने उसको अपनी बाहों में एकदम कसकर पकड़ लिया और अपने होंठ उसके गुलाबी होंठो पर रख दिए और उसे किस करने लगा और फिर कुछ देर बाद वो भी मेरा साथ देने लगी. फिर में अपनी जीभ को उसकी जीभ से छूने लगा और चूसने लगा और कुछ देर में ही मेरा लंड एकदम तनकर खड़ा हो गया और उसकी चूत को सलामी देने लगा.
दोस्तों में क्या बताऊँ.. मुझे यह सब करने में बहुत मज़ा आ रहा था? क्योंकि वो मेरे जीवन का पहला किस था और किस करते करते में उसके बदन को भी इधर उधर छू रहा था. फिर हमने खड़े होकर किस करना शुरू किया. मैंने एक हाथ उसकी कमर पर रखा और दूसरा हाथ उसके सर के पीछे और धीरे धीरे उसके होंठो को चूसने लगा और उसका एक हाथ मेरे कंधे पर और दूसरा हाथ मेरी कमर पर था.. लेकिन वो धीरे धीरे अपने हाथ को ऊपर नीचे कर रही थी.
शायद वो अब पूरे जोश में थी.. दोस्तों हमारी हाईट एक समान थी इसलिए एक साथ खड़े होने पर मेरा तना हुआ लंड और उसकी कामुक चूत एक दूसरे के सामने आ रही थी और में उसको एकदम कसकर पकड़े हुए था. मेरा एक हाथ उसकी कमर पर था.. लेकिन वो अब थोड़ा नीचे की तरफ मतलब कि उसकी गांड को छूने को बैताब था और किस करते करते में अपना लंड उसकी उभरी हुई चूत के ऊपर रगड़ रहा था और कपड़े होने के बावजूद भी हमें बहुत मज़ा आ रहा था.
फिर किस खत्म करते ही में उसकी नाईटी के ऊपर से ही उसकी चूत के ऊपर से हाथ घुमा रहा था और वो भी मेरे लंड को सहला रही थी बहुत देर किस करने के बाद हम बिस्तर पर लेट गये. फिर में उसके ऊपर और वो मेरे नीचे थी और में उसकी गर्दन पर किस रहा था.
फिर उसके बाद मैंने नाईटी को थोड़ा ऊपर उठाकर उसके बूब्स को दबाना शुरू किया. अब उसे भी मज़ा आने लगा और वो जोश में आकर सिसकियाँ लेने लगी और मेरे लंड को ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगी और कुछ देर के बाद में उसके बूब्स को अपने मुहं में लेकर चूसने लगा और अब वो बहुत जोश में आ रही थी और में तो उसके बूब्स काट रहा था और उसे भी मजा आ रहा था.
उसके मुहं में से बहुत ज़ोर ज़ोर से सिसकियों की आवाज़ आ रही थी और बूब्स चूसते चूसते मैंने अपना हाथ उसकी चूत पर रख दिया और में अपनी एक उंगली उसकी चूत में डालकर घुमाने लगा उसकी चूत अंदर से बहुत गरम थी और एकदम गीली थी. अब वो भी बहुत गरम हो गयी थी और उसने भी उसका एक हाथ मेरी पेंट में डालकर मेरे खड़े लंड को हिलाना शुरू किया और अब हम दोनों गरम हो गये और मुझे लगा कि आज तो मेरी निकल पड़ी.. लेकिन जैसे ही मैंने उससे बोला कि हम नीचे का भी करते है.
उसने साफ मना कर दिया और मेरे बहुत मनाने के बाद भी वो नहीं मानी तो में थोड़ा नाराज़ हो गया.. लेकिन फिर मैंने सोचा कि मुझे जो मिला है में उसी में खुशी मनाऊं.. इसके बाद का काम बाद में देखेंगे और यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहा. फिर बहुत दिनों तक हम एक दूसरे को किस करते रहे और कपड़ो के ऊपर ऊपर से ही लगे रहे और धीरे धीरे हम बहुत आगे तक बढ़ने लगे और में कभी कभी उसकी चूत में ऊँगली करके उसकी चूत का पानी भी निकाल देता और वो एकदम निढाल होकर पड़ जाती और में अपने घर पर जाकर अपने लंड को हिलाकर उसके नाम की मुठ मारता.
फिर आख़िर वो दिन आ ही गया जिसका मुझे बड़ी बेसब्री से इंतजार था और में जब भी तृप्ति के रूम पर जाता तो अपने साथ कंडोम लेकर ही जाता था.. लेकिन अब तक मुझे कभी चुदाई का मौका नहीं मिला था इसलिए में उसे काम में नहीं ले सका. फिर हर दिन की तरह में उस दिन भी उसके रूम पर पहुंच गया और उस दिन भी उसने बीमारी का नाटक कर लिया और मैंने भी अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली और जब में रूम पर पहुंचा.. तो मैंने देखा कि वो एक सेक्सी जालीदार नाईट गाऊन में थी और उसके चेहरे पर अलग ही कुछ दिख रहा था और जाते ही में अपने काम में शुरू हो गया. सबसे पहले मैंने खड़े खड़े उसे किस किया और उसके बाद उसको लेटा दिया और आज तो वो जोश में थी.. तो आसनी से में उसके नीचे हाथ लगा पा रहा था और बहुत देर के बाद मैंने बाथरूम जाने का नाटक किया और बाथरूम में जाकर मैंने अपने लंड पर कंडोम लगा लिया और फिर से आकर उसकी पेंटी से खेलने लगा.
तो मैंने ठीक मौका देखकर पेंटी को थोड़ा नीचे खींचा. मुझे देखना था कि तृप्ति का जवाब क्या है.. लेकिन शायद आज मेरा नसीब अच्छा था. उसने मुझे मना नहीं किया. तो मेरी हिम्मत और बड़ गयी और मैंने उसकी पेंटी को निकालकर फेंक दिया और अब मैंने उसके दोनों पैरों को थोड़ा थोड़ा दूर किया और अपना लंड अंदर डालने की कोशिश करने लगा.. लेकिन मुझे पहले लगा था कि उसकी चूत में मेरा लंड आसानी से नहीं जाएगा.. लेकिन यह सब ग़लत निकाला और बहुत आसानी से मेरा लंड उसकी चूत में फिसलता हुआ अंदर चला गया.
मुझे थोड़ी देर के लिए बुरा लगा.. लेकिन में समझ गया था कि यह तृप्ति की पहली चुदाई नहीं है और ना ही में उसका पहला प्यार.. लेकिन फिर मैंने सोचा कि मुझे चोदने का मौका मिल रहा है ना और बाकी सब भाड़ में जाए. फिर बहुत देर तक मैंने उसके पैरों को अपने कंधे पर रखकर लंड को ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदता रहा और वो भी मजे लेती रही और फिर कुछ देर की चुदाई के बाद मैंने अपना पूरा वीर्य उसकी चूत में डाल दिया और वो एकदम संतुष्ट होकर थककर लेट गई.
तो दोस्तों यह था मेरे जीवन का पहला सेक्स.. उसके बाद भी हमने 3-4 बार सेक्स किया और उसके बाद उसकी शादी हो गयी.. लेकिन मुझे उसकी चुदाई का बिल्कुल भी दुख नहीं है.. क्योंकि मैंने उसके साथ बहुत समय तक मज़ा किया था और पहले सेक्स के बाद मुझे खुद को ही उससे शादी करने की इच्छा नहीं थी और अब वो मेरे जीवन में नहीं है.. लेकिन जब भी सेक्स की बात आती है तो मुझे उसके साथ किया पहला वो सेक्स जरुर याद आता है.

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