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गावं की भाभी की गांड मारी रात में

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम रवि है और मेरी उम्र 24 साल है. दोस्तों में आज एक बार फिर से आप सभी के लिए एक और नई कहानी लेकर आया हूँ.. यह कहानी मेरे गावं की चचेरी भाभी की है और अब में अपनी आज की कहानी पर आता हूँ..
जैसा कि आप जानते है कि में एक टीचर हूँ. एक बार में अपने गावं गर्मियों की छुट्टियों में गया हुआ था.. मेरे घर पर मेरे दो चचेरे भाई दोनों भाभियाँ और सभी लोग है और में जब गावं पहुंचा तो घर में जाकर पहले तो खाना पीना और दिन भर भाभियों से बातों में लगा रहा और फिर में शाम को घूमने निकल गया. में अपनी चचेरी भाभी के बारे में सोच रहा था. उनका पिछवाड़ा ठीक मेरी आँखो के सामने झूल रहा था.. उनकी पतली कमर अच्छी खासी गांड है और में उनके बूब्स को सोचकर जैसे तैसे घर पहुंचा.
फिर रात में खाना खाया और सोने के लिए आँगन में बिछाई गई खाट पर आ गया और एक खाट पर मेरी छोटी भाभी उनका बेटा और एक पर बड़ी भाभी और एक पर में लेट गया. दोस्तों गावं में सभी लोग अपने अपने कामों को खत्म करके जल्दी सो जाते है.. लेकिन मुझे शहर की आदत है.. तो मुझे नींद नहीं आ रही थी और में लेटा लेटा जाग रहा था.. मेरे छोटे भैया बाहर सोए हुए थे. बड़े भैया खलिहान में सोने चले गए थे और में अकेला लेटा हुआ भाभी को सोचकर अपने लंड से खेल रहा था और उस उजली हुई रात में सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था और में तो बीच में लेटी हुई छोटी भाभी के चेहरे को ही देखना चाहता था.. लेकिन वो तो एक पतली सी चादर ओढ़कर सो रही थी.
फिर में एकदम मायूस होकर दूसरी तरफ करवट लेकर लेट गया और जिस तरफ मेरा चेहरा था.. उसी तरफ काम चलाऊ बाथरूम था.. वो दो बड़ी बड़ी पट्टियाँ रखकर बना था और कोई दीवार नहीं थी. में लेटा हुआ जाग रहा था और मैंने अपने मोबाईल पर टाईम देखा तो उस समय 11:21 हो रहे थे और मैंने अपने मोबाईल को तकिए के नीचे रखा और आराम से लेटा रहा.
तभी मुझे कुछ आवाज़ सुनाई दी.. शायद वो चूड़िया खनकने की आवाज़ थी. फिर मैंने अहसास किया कि कोई है.. जो मेरी तरफ आ रहा है और मैंने अपनी दोनों आखें अधखुली रखी. तभी मैंने देखा कि बड़ी भाभी मेरे सामने आई.. तो एकदम मेरी तरफ मुड़कर देखा और मुझे सोता हुआ देखकर वो बेफिक्र होकर आगे की तरफ गई और मुझसे करीब 7 फीट दूर बाथरूम में जाकर खड़ी हुई.. अपनी साड़ी को ऊपर किया.. उनकी जांघे केले के पेड़ की तरह एकदम चिकनी दिखाई दे रही थी और वो नीचे बैठकर पेशाब करने लगी.. लेकिन जब वो ऊपर उठी तो उनका पूरा पिछवाड़ा एक पल के लिए मेरी आखों के सामने चमक सा गया. फिर वो आराम से चली गई और में अपना लंड पकड़कर ही रह गया और अब मेरी नींद बिल्कुल गायब हो गई.
मेरे दिमाग़ में सिर्फ भाभी पूरी तरह से छा चुकी थी और में लेटा हुआ जाग रहा था. फिर मैंने बहुत देर तक सोने की कोशिश की.. लेकिन मुझे नींद नहीं आई और मैंने अपना मोबाईल चेक किया तो 2:10 का समय हो चुका था और अब में सोने ही वाला था. तभी मेरे कानों में फिर से वही आहट आई और मैंने सोचा कि भाभी होगी.. हुआ भी वही वो भाभी ही थी.. वो आई और उसी तरह से पेशाब करने बैठ गई और उनकी पेशाब करने की सीटी की आवाज़ मुझे बैचेन कर रही थी. फिर मैंने अच्छा मौका नहीं खोया. में चुपके से उठा और पीछे से जाकर बैठी हुई भाभी को अपनी बाहों में भर लिया.. वो हड़बड़ाकर उठती हुई बोली कि कौन है?
फिर पीछे मुड़कर मुझे देखकर बोली कि रवि तुम. फिर मैंने कहा कि हाँ भाभी. फिर वो बोली कि चल दूर हो और यह सब क्या है? तो मैंने उनका एक हाथ ज़ोर से पकड़ा और उनको दूसरी तरफ बने घांस फूस जहाँ पर रखा जाता है.. उस कच्चे कमरे की तरफ ले जाने लगा. फिर वो कहती रही कि कहाँ ले जा रहे हो.. बताओ तो क्या लफड़ा है? और मैंने उनको जबरदस्ती उस कच्चे कमरे में ले जाकर खड़ा कर दिया और उनके दोनों तरफ से हाथ ले जाकर दीवार पर टिका दिए.. वो अब मेरे ठीक बीच में थी. फिर मैंने कहा कि भाभी तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो.. तुम बहुत सुंदर हो.. जब कि हक़ीकत में उनका फिगर और गांड बहुत जबरदस्त है.. लेकिन वो ज़्यादा सुंदर नहीं है.
फिर वो बोली कि में क्या करूं? तो मैंने कहा कि भाभी आपको देखकर में बहुत बैचेन हो रहा हूँ. भाभी प्लीज़ आप आओ और मेरे साथ सो जाओ.. भाभी मेरी अच्छी भाभी. फिर वो बोली कि अरे तो इसमे ऐसा क्या है? चलो में सो जाती हूँ.. लेकिन तुम मेरे साथ कुछ ऐसा वैसा ना करने लग जाना और वो यह कहकर जाने लगी.. तो मैंने उनका हाथ पकड़कर खींचा और उन्हे अपने से चिपकाकर दबा लिया और कहा कि हाँ ऐसा वैसा ही तो करना है भाभी.
फिर वो बोली कि छोड़ो मुझे.. यह क्या कर रहे हो.. कोई देख लेगा? मैंने कहा कि हमें कोई भी नहीं देखेगा.. क्योंकि इस वक्त घर के सभी लोग गहरी नींद में सो रहे है. फिर भाभी बोली कि अरे तुम छोड़ो मुझे मरवाओगे.. जाने दो मुझे.. लेकिन मैंने उनकी एक ना सुनी और उनकी साड़ी को पकड़कर झट से ऊपर किया और अब वो कुछ समझ पाती उसके पहले ही मैंने उनकी चूत में अपनी दो उंगलियाँ डाल दी. फिर वो मेरा हाथ पकड़कर हटाने लगी.. लेकिन तब तक मैंने उनके ब्लाउज के ऊपर से उनके एक बूब्स को कसकर दबा लिया और में उसे ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा और नीचे की तरफ से लगातार चूत में उंगलियों को अंदर बाहर चलाता रहा.
दोस्तों भाभी पहले तो जाने दो जाने दो.. मुझे छोड़ दो.. ऐसा मत करो छोड़ो मुझे.. कहती रही. पर शायद अब मेरी उंगलियों का जादू चलने लगा था और वो मेरा विरोध करने की जगह सईईईईईइ अह्ह्ह्हह उह्ह्हह्ह करने लगी. मैंने तभी उनसे कहा कि भाभी तुम्हारी चूत तो पानी छोड़ रही है.. क्या इसमे मेरा लंड डाल दूँ? तो वो बोली कि हाँ डालो ना. फिर मैंने देर ना करते हुए अपने अंडरवियर को नीचे की तरफ खिसकाया और अपना तना हुआ लंड बाहर निकाला और भाभी ने लंड को बिना कहे ही एकदम झपटकर पकड़ लिया और वो बोली कि वाह अच्छा लंड है. फिर मैंने उनकी साड़ी को ऊपर किया.
फिर अपने लंड को चूत के मुहं पर लगाया और हल्का सा धक्का मारा.. चूत पहले से ही एकदम गीली और चिकनी थी तो लंड बिना ब्रेक के अंदर जाने लगा.. क्योंकि भाभी की चूत लंड ले लेकर बिल्कुल खुल गई थी और मैंने जब अपना पूरा लंड चूत के अंदर डाल दिया.. तब वो अउंहउंह आहह्ह्ह उफफ्फ्फ्फ़ थोड़ा धीरे करो.. में क्या कहीं भागी जा रही हूँ.. कहने लगी और मैंने खड़े खड़े ही चुदाई शुरू कर दी और मैंने उनसे कहा कि भाभी भैया ने तुम्हारी चूत को बहुत जमकर चोदा है.
फिर वो बोली कि हाँ वो रोज रात को मेरी चूत पर चड़कर मेरी लगातार चुदाई करते है.. उन्होंने ही मेरी चूत को रात दिन चोद चोदकर पूरी तरह से खोल दिया है और वो कुछ दिनों से खेत के काम की वजह से यहाँ पर नहीं रहते तो इसलिए उन्होंने मुझे नहीं चोदा.. वरना अब तक तो वो मुझे तीन बार जमकर चोद चुके होते. फिर मैंने उनकी चुदाई करते वक़्त दोनों बूब्स को दबाना शुरू कर दिया. वो भी बीच बीच में आगे की तरफ हो जाती तो में धक्का मारकर उनको पीछे धकेलता हुआ सटासट चोद रहा था और वो ओआहा अह्ह्ह और ज़ोर से चोदो. दो चूत में.. हाँ और ज़ोर डालते रहो हाँ अह्ह्ह आआहह.. लेकिन दोस्तों मुझे उनकी चूत में ज़्यादा मज़ा नहीं आ रहा था.. क्योंकि लंड चूत में एकदम फ्री होकर जा रहा था.
फिर मैंने एकदम से लंड को चूत से बाहर निकाल लिया और उनसे कहा कि भाभी पलट जाओ.. मुझे अब तुम्हारी गांड में अपना डंडा डालना है. फिर वो बोली कि बिल्कुल तुम अपने भैया पर गए हो.. क्योंकि वो भी मेरे साथ ऐसे ही करते है और यह कहकर वो झट से पलट गई और खिड़की की दीवार से हाथ लगाकर थोड़ा झुक गई.
फिर मैंने पीछे से साड़ी को ऊपर किया.. उनका पिछवाड़ा जो मेरी हालत खराब कर रहा था.. पहले तो मैंने उनके कूल्हो को ज़ोर से दबाया, सहलाया और उनको एकदम मस्त कर दिया. फिर मैंने अपना लंड उनकी गांड पर लगाया और धीरे धीरे आगे की तरफ होता गया. लंड आधे से ज़्यादा अंदर चला गया. भाभी अयाह्ह्ह्ह रे बाप रे आएयेए उूह्ह्ह्हउउ अहह. फिर मैंने और ज़ोर लगाया और पूरा लंड अंदर डालकर आगे पीछे होने लगा और अब मुझे कुछ मज़ा आने लगा था.
फिर मैंने कहा कि भाभी तुम्हे क्या गांड मरवाने भी मज़ा आता है? वो बोली कि मज़ा आए ना आए.. लेकिन चूत चुदवाना है तो गांड भी मरवानी पड़ती है. मारो मेरी गांड.. मार लो.. चोदो मुझे और में लगातार चोद रहा था. उनके बूब्स को दबाकर मैंने चुदाई की.. वो आयाअहहहहः अहहससससस सीईईईईइई और ज़ोर से आअहह चोदो मुझे अह्ह्ह और में ज्यो ज्यो लंड डालता.. वो आह्ह्ह्ह करने लगती. कुछ देर की मेहनत के बाद मेरा लंड उनकी गांड में दमदार धक्को के साथ ही ढीला पड़ गया और मैंने पूरा का पूरा वीर्य उनकी गांड में भर दिया.
फिर मैंने उनको पीछे से जकड़ लिया और कुछ पलो के बाद लंड बाहर निकल आया और वो आह्ह्हहा करती हुई पीछे हट गई. फिर मैंने कहा कि भाभी अच्छा लगा कि मैंने तुम्हारी गांड मारी. अगर कल भी मरवाना हो तो बता देना. फिर वो हाँ कहकर चली गई और में अपने बिस्तर पर आकर सो गया.. लेकिन उसके कुछ घंटो तक मुझे उनकी याद आती रही और फिर सुबह मैंने उनको देखा तो वो बहुत खुश नजर आई और उस रात के बाद मैंने उनको कई बार चोदा और वो मज़े लेकर चुदवाती रही.

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