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सेक्सी साड़ी वाली मस्त आंटी

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम सन्नी है और में दिल्ली का रहने वाला हूँ और मुझे इस साईट की Hindi sex kahaniya बहुत पसंद है, में बहुत स्मार्ट हूँ और मैंने MBA किया हूँ. अब में आपका समय ख़राब ना करते हुए सीधा कहानी पर आता हूँ. आज में आपको अपनी सच्ची स्टोरी बताता हूँ. में एक कॉंट्रेक्टर हूँ इसलिए अक्सर यात्रा करनी पड़ती है, लेकिन इस ट्रेवलिंग में अगर आपकी किस्मत अच्छी हो तो कभी कभी आपको बहुत फायदा भी होता है. अब में आपको अपनी स्टोरी बताता हूँ.
एक बार में यात्रा कर रहा था, सुबह का समय था और सर्दिया चल रही थी तो ठंड भी काफ़ी थी. में बस स्टॉप पर बस का इंतज़ार कर रहा था. मेरी नज़र एक औरत पर गई, वो बार बार मुझे देख रही थी. उसकी उम्र करीब 35 साल के आस पास होगी. उसने साड़ी पहनी हुई थी और उसका फिगर भी अच्छा था. में आपको बता दूँ कि में बूब्स का बहुत दीवाना हूँ. मुझे बूब्स दबाना बहुत पसंद है उसे मसलना, चूसना मुझे बहुत पसंद है और बड़े बूब्स वाली औरतें मुझे बहुत पसंद है. उसके भी बूब्स बहुत बड़े थे, करीब 36 साईज़ के थे.
में मन ही मन में सोच रहा था कि काश वो मेरी बगल वाली सीट पर बैठ जाये. तो अचानक मेरी बस आ गयी, वो भी उसी बस में आने के लिए उठी और में उसके पीछे पीछे ही बस में चढ़ने लगा. बस में बहुत भीड़ थी इसलिए में उसे चढ़ते वक़्त थोड़ा बहुत टच कर रहा था और बार बार उसके बूब्स को साईड से टच करने की कोशिश कर रहा था. वो सीट पर बैठ गयी.
फिर में भी उसके पास में ही बैठ गया, अब असली मज़ा शुरू होने वाला था. बस स्टार्ट हो गयी और अपने सफ़र पर निकल पड़ी. थोड़ी देर के बाद वो थोड़ी मेरी तरफ आ गयी और सोने का नाटक करने लगी, मुझे भी लगा कि वो लाईन दे रही है तो में भी सोने का नाटक करने लगा. ठंड काफ़ी थी और खिड़की भी ठीक से बंद नहीं हो रही थी. उसकी वजह से ठंडी हवा अंदर आ रही थी और उसे ठंड लग रही थी, वो थोड़ी थोड़ी देर के बाद मुझे अपनी कोहनी मार रही थी. में अपनी उंगलियां उसके बगल में डालने की कोशिश कर रहा था, में जैसे ही उसे टच करता तो वो और नज़दीक आने की कोशिश करती और अपने हाथ की जगह खोल देती, जैसे वो मुझसे कह रही हो कि अपना हाथ अंदर डालकर उसके बड़े बड़े बूब्स दबोच लो. फिर थोड़ी देर के बाद उसे लगा कि अगर में खिड़की के पास बैठ जाऊं तो अच्छे से उसके बूब्स दबा सकता हूँ और पास की सीट वाला भी हमें ऐसा करते नहीं देख सकता था, तो उसने मुझसे खिड़की के पास वाली सीट पर बैठने को कहा और बहाना किया कि उसे ठंड लग रही है. तो मैंने भी कहा ठीक है और हमने जगह बदल दी.
अब में खिड़की वाली सीट पर था. उसने अपनी साड़ी से मेरी तरफ वाले बूब्स को ढक दिया ताकि पास वाला कोई देख ना सके और वो शाल डालकर बैठ गई और सोने का नाटक करने लगी. आज मेरी तो निकल पड़ी थी, में भी थोड़ी देर बाद सोने का नाटक करके शाल डालकर सोने का नाटक करने लगा और धीरे से अपने हाथ की उंगलीयां उसके हाथ पर फेरने लगा. वो भी धीरे धीरे कामुक होने लगी और मुझसे चिपककर बैठ गयी और अपने हाथ वाली बगल को थोड़ा और खोलकर बैठ गयी, जिससे मेरा हाथ उसके बड़े-बड़े बूब्स तक आसानी से पहुँच सके. में भी धीरे धीरे अपना हाथ उसके बूब्स तक पहुँचाने लगा. मेरे ऐसा करते ही, वो काफ़ी कामुक हो चुकी थी. उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने बड़े बड़े बूब्स पर रख दिया. में तो काफ़ी उत्तेजित हो चुका था.
अब में अपना हाथ उसके बड़े बड़े बूब्स पर धीरे धीरे फेरने लगा. क्या बूब्स थे? काफ़ी बड़े और टाईट थे. अब में उसके बूब्स को दबाने लगा, बहुत मज़ा आ रहा था. में ऐसा सोच रहा था, जैसे कि ये सफ़र ख़त्म ही ना हो, मेरा लंड काफ़ी टाईट हो चुका था और वो भी बार बार उसे छूने की कोशिश कर रही थी, तो मैंने उसका हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया. ऐसा करते ही वो बहुत कामुक हो चुकी थी.
फिर अचानक से उसने अपनी शाल अच्छे से ओढ़ ली और थोड़ी मेरी तरफ शाल दे दी, ताकि मेरा लंड उस शाल में ढक जाये, वो चाहती थी कि में अपना लंड बाहर निकालूँ. मैंने भी ऐसा ही किया और अपनी चैन खोली और अंडरवियर में से अपना लंड बाहर निकाला. वो उसे टच करते ही बहुत खुश हो गयी और उसने अपने ब्लाउज के बटन भी खोल दिए. ताकि में भी उसके खुले बूब्स का लुप्त उठा सकूँ. क्या निप्पल थी उसकी? बड़ी बड़ी और एकदम टाईट थी. मन तो कर रहा था कि उसे अपने मुँह में लेकर मसल डालूँ, लेकिन में बस में होने के कारण ऐसा नहीं कर सकता था.
में उसके बूब्स को खूब ज़ोर ज़ोर से दबा रहा था और वो मेरे लंड को मसल रही थी, हम दोनों बहुत उत्तेजित थे और उसने अपनी साड़ी नीचे से थोड़ी ढीली कर दी, ताकि में उसकी चूत में अपना हाथ डाल सकूँ. में धीरे धीरे अपना हाथ उसके नीचे पेट पर ले जाने लगा और हाथ फेरने लगा, मुझे धीरे धीरे सब करना बहुत पसंद है. में उसके पेट पर हाथ फेर रहा था और उसकी चूची को भी सहला रहा था.
फिर मैंने अपना हाथ उसकी पेंटी में डाल दिया और में पेंटी के ऊपर से हाथ फेर रहा था. उसकी पेंटी भी काफ़ी गीली हो चुकी थी. उसकी चूत में से काफ़ी पानी निकल चुका था और अब भी निकल रहा था. वो सिसकियाँ ले रही थी, आअहह उहाआअ. अब मैंने अपना एक हाथ उसकी पेंटी के अंदर डाल दिया और अपनी उंगली को उसकी चूत में डाल दिया, वो एकदम कराह उठी. अब में उसकी चूत में अपनी उंगली डाल कर उसे चोद रहा था और वो अपने हाथ से मेरे लंड को सहला रही थी.
अब हम लोग इतने एग्ज़ाइटेड हो चुके थे कि दोनों अब झड़ने वाले थे. वो अब झड़ चुकी थी और मेरे हाथ पर उसका पानी लग चुका था और मेरे लंड में से भी अब पानी निकल गया और पूरा पानी उसके हाथ में निकल गया. फिर उसने धीरे से नीचे आकर एक कागज उठा लिया और अपने हाथ साफ कर लिए और फिर एक टुकड़ा मैंने भी लिया और अपने लंड और हाथ को साफ कर दिया और मैंने दोनों कागज के टुकड़े खिड़की से बाहर फेंक दिए. अब हम दोनों अच्छे से शांत हो चुके थे.
फिर हमने एक दूसरे को अपना परिचय दिया और फोन नंबर दिया. फिर हम अपने स्थान पर पहुँच गये और अपनी अपनी गली निकल गये, लेकिन एक दिन मैंने उसे कॉल किया और बोला कि में उसके बिना नहीं रह पा हूँ और उसके साथ कहीं सेक्स करना चाहता हूँ. हम दोनों ने प्रोग्राम बनाया और हम एक दिन एक रिसोर्ट में मिले और एक दिन वही रहने का प्रोग्राम बना लिया था. उस दिन वो इतनी हॉट साड़ी पहनकर आई थी कि में तो देखकर पागल हो गया और में उसे सीधा रिसोर्ट में ले गया और हम अपने रूम में चले गये, जो मैंने पहले ही बुक कर रखा था, जैसे ही हम रूम में पहुंचे तो मैंने रूम को अन्दर से बंद कर लिया और सीधा उसके पास गया और उसे टाईट से हग किया.
मुझे लड़कियां साड़ी में बहुत अच्छी लगती है और उसने उस दिन बहुत अच्छे से साड़ी पहन रखी थी, जैसे हिन्दी फिल्म में या धारावाहिक में लड़कियां पहनती है, तो में उसे हग करते करते उसे स्मूच करने लगा और उसके होठों को 15 मिनट तक चूसा और वो भी मेरा साथ दे रही थी. फिर मैंने अपना एक हाथ साड़ी के ऊपर से ही उसके बूब्स पर रखा और दबाने लगा, वो भी मस्त होने लगी थी. में उसे इतनी जल्दी नंगा नहीं करना चाहता था, क्योंकि मुझे धीरे धीरे सेक्स बहुत पसंद है तो में साड़ी के ऊपर से ही उसके बूब्स से खेलने लगा. उसने पिंक ओरेंज मिक्स कलर की साड़ी पहनी हुई थी.
फिर उसके बूब्स से खेलते खेलते मैंने धीरे से उसके पल्लू को हटाया और उसके ब्लाउज के हुक को खोल दिया. अब वो ब्रा में थी. में बहुत देर तक ब्रा के ऊपर से ही उसके बूब्स को दबाता रहा, अब वो गर्म हो गई थी और अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया और बोली कि प्लीज मुझे चोदो, में अब नहीं रुक सकती. ये सुनते ही मैंने उसे बेड पर लेटा दिया और उसकी ब्रा खोल दी और उसकी साड़ी खोलने लगा.
फिर में अपना मुँह उसके पेटीकोट के अन्दर ले गया और उसकी पेंटी खोलकर पेटीकोट के अंदर ही उसकी चूत को किस करने लगा. फिर थोड़ी देर के बाद मैंने उसका पेटीकोट खोल दिया और वो पूरी नंगी हो गई, उसने पहले ही मेरे लंड को हाथ से हिला हिलाकर इतना टाईट कर दिया था कि वो उसकी चूत के अंदर जाने के लिए बिल्कुल तैयार था.
फिर मैंने उसको उठने के लिये कहा और डॉगी स्टाइल में हो जाने के लिए कहा, फिर वो वैसे हो गई ताकि में चोदने के साथ साथ उसके बूब्स को भी दबा सकूँ, इसलिए मुझे ये स्टाइल बहुत पसंद है. फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत के अंदर डाला और थोड़ी कोशिश करने के बाद वो पूरा अंदर चला गया. अब मेरा 7 इंच का लंड उसकी चूत के अंदर था.
फिर मैंने उसे धीरे धीरे चोदना शुरू किया और वो मस्त होकर सिसकियां लेने लगी, डार्लिंग आह्ह्हह्ह ज़ोर से और ज़ोर से स्पीड बढाओ आह्ह्हह्ह चोदो ज़ोर ज़ोर से चोदो. फिर मैंने अपनी स्पीड तेज की और चोदने लगा, उसके साथ ही मैंने उसके बूब्स भी दबाने शुरू किए, उसे मज़ा आ रहा था और मुझे तो बहुत ही मज़ा आने लगा था.
फिर 10 मिनिट तक लंड को अंदर बाहर करने के बाद वो झड़ गई और आई लव यू, आई लव यू डार्लिंग आअहह मज़ा आ गया मज़ा आ गया, ऐसे बहुत धीमी आवाज़ में बोलने लगी. में बहुत खुश हुआ कि मैंने उसे पूरा संतुष्ट कर दिया था और थोड़ी देर के बाद मैंने उससे कहा कि मेरा पानी निकलने वाला है तो उसने कहा कि प्लीज ये सारा वीर्य मेरी चूत के अंदर ही छोड़ो ताकि तुम्हारा प्यार हमेशा मेरे अंदर रहे.
ऐसा कहते ही मुझे बहुत अच्छा लगा और मैंने अपना सारा वीर्य उसकी चूत के अंदर छोड़ दिया और उसने मुझसे धन्यवाद कहा. हमने उस दिन करीब 5 बार सेक्स किया और जाने से पहले मैंने उसको एक बार और चोदा और फिर हम वहां से निकल गये. हम दोनों ने बहुत अलग अलग स्टाइल में सेक्स किया और खूब मज़े किए और अभी भी हम बाहर होटल या रिसोर्ट में जाकर सेक्स करते है.

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