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मम्मी की बहन का चोदन

हैल्लो दोस्तों.. में गुड्डू आप सभी का दोस्त.. दोस्तों कुछ दिनों पहले मेरा तबादला अपने स्टेट से बिनापुर में कर दिया गया था और में वहाँ पर अकेला ही रहता था.. रोज सुबह उठकर ऑफिस जाना और फिर शाम को वापस आकर खाना बनाना.. मेरी रोज़ की अदत बन गयी थी और करीब दो महीने के बाद मुझे मेरी मम्मी का फोन आया और उन्होंने मुझे अपनी बड़ी बहन का भी तबादला बिनापुर में होने की बात बताई.
दोस्तों मेरी मम्मी की बड़ी बहन का नाम रीमा था और वो एक तलाकशुदा औरत थी और फिर मम्मी ने कहा कि वो भी तुम्हारे साथ ही रहेगी तो मुझे यह बात सुनकर बहुत अच्छा लगा और मैंने सोचा कि चलो अब मेरा अकेलापन तो कम से कम दूर हो जाएगा और में बचपन में भी हमेशा रीमा मौसी के पास सोता था और वो सारे दिन मुझे याद आ गए.
फिर अगले ही दिन में उन्हे लेने स्टेशन चला गया तो मेरी आँखे उन्हे देखकर एकदम खुली की खुली रह गई.. क्योंकि 52 साल की उम्र में भी वो बहुत ही सुंदर लग रही थी और उनके बूब्स बहुत बड़े और गोल थे.. साथ ही साथ उनकी गांड का साईज़ शायद 46 के आस पास था.. जो सफेद कलर की साड़ी में वो बहुत ही हसीन दिख रही थी.
तभी से मुझे उनको चोदने का मन हुआ और में हमेशा किसी अच्छे मौके की तलाश में रहा. फिर मैंने अपने बाथरूम में कील डालकर दो छोटे छोटे छेद किए और नहाते समय रीमा मौसी को देखने का प्लान बनाया.. दो से तीन दिन के बाद रविवार था और में जल्दी जल्दी अपने सारे काम ख़त्म करके पेपर पढ़ने बैठ गया. तभी मौसी नहाने के लिए बाथरूम में चली गयी और में भी उनके पीछे पीछे दरवाज़े के पास पहुँच गया और अपनी दोनों आँखो से उस छेद में से देखता रहा..
मौसी ने एक मेक्सी पहनी हुई थी और फिर वो थोड़ा झुककर उसे उतारने लगी और जो भी मैंने उस समय देखा.. में उसे देखकर बहुत चकित हो गया. हे भगवान क्या गठीला शरीर था.. ज्यादा उम्र होने के कारण उनका पेट भी थोड़ा बाहर निकला हुआ था और काले रंग की ब्रा और पेंटी में रीमा मौसी एकदम सेक्सी लग रही थी.. उनकी गोरी गोरी, एकदम चिकनी जांघे बहुत ही सुंदर लग रही थी.
फिर उन्होंने नल चालू किया और ब्रा का हुक खोलने लगी.. उनके विशाल बूब्स किसी पहाड़ की चोटी की तरह एकदम तनकर खड़े थे और दोनों बूब्स का आकर एक समान था और वो सब पूरी तरह से खिले खिले नज़र आ रह थे और अब पेंटी की बारी थी तो उन्होंने धीरे से अपना एक पैर ऊपर किया और फिर दूसरा भी ऊपर करके उसको भी बाहर निकाल दिया. में उनके पूरे नंगे जिस्म के देखकर पूरी तरह से पागल हो गया.. उनकी गांड बहुत बड़ी थी और चूत एकदम लाल रंग की थी लेकिन बहुत सारे बालों में ढकी हुई थी और यह सब देखकर मेरा लंड झटके देता हुआ खड़ा हो गया और मैंने कसम ली कि में किसी भी तरह मौसी की चूत में आग लगाकर रहूँगा.
फिर दूसरे ही दिन मैंने ऑफिस में एक प्लान बनाया और पास के एक बार से दारू पीकर घर थोड़ा लेट पहुँचा तो मौसी आँखे मलते हुए आई और दरवाज़ा खोला.. उनके गाऊन का हुक खुला हुआ था और उनका लाल कलर की ब्रा मुझे दिख गई तो मौसी ने तुरंत उसको ठीक किया और मेरे लिए खाना लगाने लगी.. उनका गाऊन हल्का सफेद रंग का था और उसमे से उनका पूरा बदन मुझे साफ साफ दिख रहा था और अब मैंने फ़ैसला कर ही लिया कि आज मुझे हर हालत में इस काम को अंजाम देना है और अब मुझ पर दारु का असर भी पूरी तरह से हो गया था. मैंने चुपके से अपने कपड़े बदल लिए और एक निक्कर पहन लिया और एकदम दबे पांव रसोई रूम में चल गया. मौसी वहीं पर खड़ी खड़ी रोटी बेल रही थी और उनका लाल कलर का ब्रा मेरी आँखो में नाचने लगा.. में तुरंत उनके पीछे खड़ा हो गया और अपने लंड को उनकी बड़ी सी गांड पर घिसने लगा.
तभी वो चोंक पड़ी और उन्होंने मुझे एक जोरदार थप्पड़ खींचकर मारा और बोलने लगी कि बेशर्म में तुम्हारी मम्मी की बड़ी बहन हूँ और तुम मेरे साथ ऐसी गंदी हरकत कर रहे हो.. लेकिन अब में कहाँ रुकने वाला था और दारू के नशे ने मुझे पूरी तरह जकड़ लिया था और मुझे गुस्सा आ गया तो मैंने उनको अपनी बाहों में ज़बरदस्ती पकड़ लिया और वो ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी और मुझसे छूटने की ना काम कोशिश करने लगी. लेकिन मैंने उसकी परवाह ना करते हुए उनको गोद में उठाकर बेडरूम की तरफ ले गया और वो मुझसे अपने आप को छुड़वाने की कोशिश कर रही थी.. लेकिन मेरी ताक़त और जोश उनसे बहुत ज़्यादा था.
फिर मैंने उनको बेड के ऊपर पटक दिया और में उनके ऊपर चढ़ गया.. पहले मैंने उनका गाउन पकड़ा और एकदम ज़ोर से झटका देकर फाड़ दिया और फिर अपने हाथ को उनकी ब्रा के ऊपर ले गया लेकिन उनका संघर्ष अब और बहुत तेज़ हो गया और वो मुझको गाली देने लगी.. कुत्ते की औलाद छोड़ दे मुझे.. मादरचोद! किसी और को जाकर चोद.. में तेरी माँ के बराबर हूँ.. प्लीज छोड़ दे मुझे अह्ह्ह.. तो मैंने उनकी हर बात को अनसुनी करके उनके दोनों पैरों को अपनी जाँघ के बीच दबा लिया और उनके गले और होठों को कुत्ते की तरह चाटने, चूमने लगा और अपने दोनों हाथों से उनके बड़े बड़े बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबा दबाकर स्वर्ग का आनंद लेने लगा.. मौसी सिर्फ़ ब्रा, पेंटी में मेरे आगे पड़ी हुई छटपटा रही थी और मेरा बहुत विरोध कर रही थी.
फिर मैंने अपना लंड जो कि अंडरवियर के नीचे था और अब चूत में जाने का बहुत बेसब्री से इंतजार कर रहा था.. में उसको मौसी की पेंटी पर घिसने लगा और मैंने उनकी ब्रा को भी एक झटके से फाड़ दिया और मोटे मोटे बूब्स के निप्पल पर मुहं मारने लगा.
तभी मौसी ने मेरे कंधे को काट लिया और नीचे बैठ गयी.. में उठ खड़ा हुआ और उनको बोला कि देखो आप ज़रूर मेरी मम्मी की बड़ी बहन है.. लेकिन अब इस घर में अकेली हैं और आपको यहाँ पर बचाने वाला कोई भी नहीं है तो अब आप चुपचाप मेरे साथ सेक्स का मज़ा लीजिये.. नहीं तो में आपकी नंगी नंगी फोटो खींचकर सबको बता दूँगा. वो यह सब बातें चुपचाप सुनने लगी और ज़ोर ज़ोर से रोने लगी..
मैंने कहा कि में आपको एक घंटे का वक़्त देता हूँ. आप मुझे सोचकर बता दीजिए कि अब आपको क्या करना है और यह बात कहकर में सीधा ड्रॉयिंग रूम में आ गया और टीवी के नीचे रखी हुई दारू की बॉटल को फिर से निकालकर अपना ग्लास बनाने लगा. फिर करीब आधे घंटे बाद मौसी मेरे पास आई और कहने लगी कि अगर में एक बार यह सब कर लूँ तो क्या तुम मुझे छोड़ दोगे तो मैंने बोला कि हाँ क्यों नहीं..
तो मौसी ने बोला कि ठीक है.. तुम 10 मिनट के बाद मेरे रूम में आ जाना तो अब में बहुत खुश हो गया और जल्दी जल्दी दारू ख़त्म करके मौसी के रूम में चल गया.. मैंने वहाँ पर पहुंचकर देखा कि रूम की लाईट पहले से ही बंद थी और मौसी सिर्फ़ अपनी ब्रा और पेंटी में लेटी हुई थी.. उन्होंने मुझे पास बुलाया और बोला कि जो करना है सिर्फ़ आज की रात कर लो.. लेकिन फिर से मत करना. मैंने बहुत खुश होकर हाँ भरकर अपनी अंडरवियर को उतारा और मौसी को अपना लंड उनके मुहं में भरने को बोला और फिर उन्होंने मेरे एक बार कहने पर ही मेरा पूरा लंड अपने मुहं में लिया और उसे लॉलीपोप की तरह चाटने, चूसने लगी..
वो मेरे लंड को बहुत धीरे धीरे आगे पीछे करके चूस रही थी.. जिससे मेरा जोश और भी बड़ता जा रहा था और मैंने भी साली की पेंटी में मुहं घुसेड़ा और बालों से भरी हुई चूत के ऊपर वाले हिस्से को अपनी जीभ से गीला किया और मौसी तब सिर्फ़ अहह कर रही थी. मौसी मेरे लंड को पके हुये आम की तरह चूसने लगी और में उसकी गोरी गोरी जांघों के साथ साथ उसकी लाल गीली चूत की प्यास बुझा रहा था.
फिर मैंने साली के बूब्स का आनंद लिया.. दोनों बूब्स को अपने दोनों हाथों से ज़ोर ज़ोर से दबाया और अपने मुहं में भरने लगा.. जिसकी वजह से मौसी ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी.. अह्ह्ह उह्ह्ह अरेरेरे बहुत दर्द कर रहा है प्लीज अब मेरे बूब्स को छोड़ दो लेकिन मैंने नहीं छोड़ा.. मेरा मन भरने के बाद मैंने मौसी को नंगा करवाया और टेबल पर बैठा दिया और उनके दोनों पैरों को पकड़कर फैला दिए.. मैंने ध्यान से देखा कि उनकी चूत बहुत ही बड़ी थी. उसमें मेरी 5 उंगलियाँ घुस गई.. लेकिन मेरा लंड भी किसी पेड़ की तरह मोटा था और मैंने उसे धीरे से धक्का देकर चूत की गहराई में उतार दिया और चोदना शुरू किया.
फिर धीरे धीरे अपनी स्पीड को हाई स्पीड तक ले गया.. वो ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी और सिसकियाँ ले रही थी अह्ह्ह माँ मर गई.. बस बेटा अब तो इस बुड़िया पर रहम करो.. लेकिन में कहाँ सुनने वाला था. मैंने उनकी दोनों जाँघ को पकड़कर उसकी चूत को चोद चोदकर फुला दिया और अब उनकी विशाल गांड की बारी थी.. मैंने उनको नीचे लेटाकर एक पैर अपने कंधे पर रखा और फिर से जोरदार धक्के देकर चोदने लगा. तो वो फिर से मुझसे रहम की भीख माँग रही थी.. लेकिन मेरा ध्यान उसकी चूत के बालों पर था और करीब एक घंटे 15 मिनट लगातार चोदने लगा और मैंने ध्यान से देखा तो अब उनकी गांड से खून निकलने लगा.
तो मैंने पीछे से अपना लंड बाहर निकालकर मौसी के मुहं में डाला और हिला हिलाकर अपना पूरा गरम गरम लावा उनके मुहं में निकाल दिया.. लेकिन अब मौसी के अंदर थोड़ा सी भी जान नहीं थी और वो कुछ देर बिना कपड़ो के एकदम चुपचाप पड़ी रही और फिर कुछ देर के बाद चुपके से बेड शीट ओढ़कर सोने लगी. तो में भी अपने कमरे में आकर सो गया.. लेकिन दूसरे दिन मुझे उनका चेहरा देखकर बहुत लज्जा आई और में उठकर चुपचाप सीधा ऑफिस के लिए निकल गया और मौसी मुझे खिड़की में से झाँक रही थी.
दोस्तों यह था मेरी पहली चुदाई का अनुभव जिसमें मैंने अपनी मम्मी की बहन को जमकर चोदा और उस रात के बाद हमारी चुदाई का सिलसिला जारी रहा और अब हम दोनों अपनी मर्जी से चुदाई में व्यस्त रहते है. वो मुझे कभी भी चुदाई के लिए मना नहीं करती.. क्योंकि उनको एक मोटा तगड़ा लंड और मुझे एक प्यासी चूत मिल गई थी.

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