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पडोसन को चोदने का सुख

मैं और मेरी पत्नी आशा हम लोग मेरे दोस्त रोहित के घर जा रहे थे हम लोग रास्ते में ही थे कि मेरी गाड़ी अचानक से बंद हो गई। कार खराब हो जाने से आशा मुझसे पूछने लगी सार्थक क्या हुआ तो मैंने आशा को कहा कि मैं अभी देखता हूं। मैंने जब देखा तो मुझे कुछ समझ नहीं आया आखिर कार में खराबी क्या है हम लोग वहीं खड़े थे तभी रोहित का फोन मुझे आया और रोहित को मैंने बताया कि मेरी कार खराब हो गई है इसलिए हम लोग रास्ते में ही खड़े हैं। रोहित मुझे कहने लगा कि सार्थक मैं तुम्हें लेने के लिए आता हूं उसने मुझसे पूछा कि तुम कहां पर हो तो मैंने उसे जगह बताई और उसके बाद रोहित मुझे लेने के लिए आ गया। आशा और मैं रोहित की कार में ही उसके घर गए हम लोगों ने अपनी कार को वहीं छोड़ दिया था।

हम लोगों ने रोहित के घर पर डिनर किया और उस दिन हम लोग सार्थक के घर पर ही रुके वह कहने लगा कि आज तुम लोग यहीं रुक जाओ और कल तो वैसे भी संडे है। मैंने रोहित को कहा ठीक है और उस दिन हम लोग रोहित के घर पर ही रुक गए थे और अगले दिन रोहित और मैं उनकी कार से एक मकैनिक को लेकर गाड़ी ठीक करवाने चले गए। जहां पर मैंने कार खड़ी की थी वहां पर मकैनिक ने कार देखी और उसके बाद कार स्टार्ट हो चुकी थी। कार ठीक होने के बाद मैं और रोहित रोहित के घर पर आए और फिर आशा और मैं अपने घर लौट चुके थे। रोहित और मेरी दोस्ती हमारे कॉलेज के समय में हुई थी कॉलेज के समय में रोहित और मैं एक दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे तब से हम दोनों की दोस्ती अभी भी वैसी ही है। कुछ दिनों से मैं अपने ऑफिस के काम के चलते कुछ ज्यादा ही बिजी होने लगा था इसलिए मुझे बिल्कुल भी समय नहीं मिल पा रहा था। आशा मुझे कहने लगी कि सार्थक तुम मुझे बिल्कुल भी टाइम नहीं दे पा रहे हो तो मैंने आशा को बताया आशा तुम तो जानती ही हो कि मेरे पास बिल्कुल भी समय नहीं है और आजकल मैं काम के चलते कुछ ज्यादा ही बिजी हूं।

आशा चाहती थी कि मैं उसके साथ उसके पापा मम्मी से मिलने के लिए जाऊं लेकिन मुझे समय ही नहीं मिल पा रहा था जिससे कि आशा बहुत ज्यादा नाराज थी लेकिन जब मुझे समय मिला तो मैं आशा को लेकर उसके माता-पिता के घर पर गया और हम लोग दो दिन तक वहीं पर रहे उसके बाद हम हम लोग वापस लौट चुके थे। मेरी बहन मनीषा भी अपनी पढ़ाई पूरी कर के विदेश से घर लौट चुकी थी पापा और मम्मी चाहते थे कि अब मनीषा कि हम लोग शादी करवा दे लेकिन मनीषा यह नहीं चाहती थी मनीषा के दिल में कुछ और ही चल रहा था उसने यह बात किसी को भी नहीं बताई थी लेकिन जब मनीषा ने मुझे अमित के बारे में बताया तो मैंने मनीषा से अमित के बारे में पूछा। मनीष और अमित एक दूसरे को बहुत प्यार करते हैं और मैं अब इस बारे में पापा और मम्मी से बात करने वाला था अमित को भी हम लोगों ने घर पर बुलाया था। जब अमित घर पर आया तो उससे मिलकर मुझे तो काफी अच्छा लगा यह पहला ही मौका था जब मैं अमित से मिला था। मनीषा चाहती थी कि उसकी शादी अमित के साथ ही हो अमित के पिताजी एक बड़े बिजनेसमैन हैं और अमित भी मनीषा से शादी करना चाहता था। उन दोनों की शादी करवाने के लिए पापा और मम्मी तो राजी हो गए लेकिन अमित के पिताजी इस बात के लिए राजी नहीं थे उन्हें काफी समय लगा मनाने में लेकिन वह मान गए और फिर मनीषा और अमित की शादी हो गई। मनीष और अमित की शादी हो जाने के बाद मनीषा कुछ दिनों के लिए घर पर आई थी जब वह घर पर आई तो उस दिन मनीषा मुझे कहने लगी कि मैं अमित के साथ बहुत ही खुश हूं। मनीषा अमित के साथ शादी कर के बहुत ज्यादा खुश थी और उसकी जिंदगी अच्छे से चल रही थी। एक दिन मैं और पापा साथ में बैठे हुए थे तो उस दिन पापा मुझे कहने लगे कि सार्थक बेटा मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी थी तो मैंने पापा से कहा हां पापा कहिए ना आपको क्या बात करनी थी। पापा कहने लगे कि बेटा हमारा जो गांव में पुश्तैनी मकान है वह अब काफी ज्यादा पुराना हो चुका है मैं चाहता हूं कि हम लोग उसमें कुछ काम करवा ले।


मैंने पापा से कहा ठीक है पापा यदि आप ऐसा चाहते हैं तो हम लोग उस घर में काम करवा लेते हैं। मैं और पापा कुछ दिनों के लिए अपने गांव चले गए हमारा गांव हरियाणा में है और हमने अपने पुराने पुश्तैनी मकान को देखा तो वह बहुत ही ज्यादा खराब हालत में था पापा कहने लगे कि बेटा मैं गांव में रहकर ही इसका काम करवा लेता हूं। मैंने पापा से कहा ठीक है और फिर हम लोगों ने उसका काम शुरू करवा दिया था। मैं दिल्ली लौट आया था और पापा गांव में ही थे कुछ दिनों तक पापा गांव में ही रुके और उन्होंने हमारे पुश्तैनी घर की मरम्मत करवा दी उसके बाद वह वापस दिल्ली लौट चुके थे। जब वह दिल्ली लौटे तो मैंने पापा से कहा कि पापा क्या घर की पूरी मरम्मत हो चुकी है तो पापा कहने लगे हां बेटा घर की तो पूरी मरम्मत हो चुकी है। मेरे चाचा जी जो कि इंग्लैंड में ही रहते हैं और वह काफी वर्षों से घर भी नहीं आए हैं इसलिए यह जिम्मेदारी पापा के ऊपर ही थी। मैं और आशा एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं और मैं आशा के साथ बहुत खुश भी हूं।

एक दिन मैंने देखा कि हमारे पड़ोस में ही कोई फैमिली शिफ्ट हुई है जब वह लोग शिफ्ट हो गए तो उसके बाद उनका हमारे घर पर आना जाना भी था। ममता भाभी की नजर मुझे कभी ठीक नहीं लगी वह ज्यादातर समय घर पर ही रहती थी उनके पति अपने काम के सिलसिले में अक्सर बाहर ही रहते थे लेकिन ममता भाभी का गदराया बदन बड़ा ही लाजवाब था। जब भी मैं उनके बदन को देखता तो मेरा मन होता कि उन्हें मैं अपनी बाहों में समा लूं धीरे-धीरे हम लोगों की बातें अब खुलकर होने लगी थी। जब वह मिलती तो मुझसे कहती सार्थक कभी आप घर पर आइए मैंने भी उन्हे कहा हां जरूर मैं आपसे मिलने घर पर आऊंगा। मैं उनके घर पर गया नहीं था एक दिन मैं उनके घर पर चला गया वह उस दिन नाइटी पहने हुए थी वह बडी लाजवाब लग रही थी और ऐसा लग रहा था जैसे कि उनके होठों को मैं अभी चूस लूं। वह मुझे देखकर बड़ी खुश थी मेरे लिए वह चाय बना कर ले आई वह मेरे पास बैठी हुई थी और मेरे सामने जब वहां बैठी थी तो मुझे वह देख रही थी मैंने भी उन्हें कहा आप बहुत ही सुंदर हैं। वह मेरे पास आकर बैठी उनकी जांघों को मैं सहलाने लगा जब मैं उनकी जांघों को सहला रहा था तो मुझे बहुत मजा आ रहा था और उन्हें भी बड़ा मजा आ रहा था जिस प्रकार से वह मेरा साथ दे रही थी अब तो हम दोनों एक दूसरे के हो चुके थे और जब हम लोग उनके बेडरूम में गए तो वह अपनी नाइटी को उतराने के लिए बेताब थी। मैंने जब उनके स्तनों को अपने हाथ से दबाना शुरू किया अब मैं उनके स्तनों को अपने हाथों से बड़े अच्छे तरीके से दबाने लगा था उनको मजा आने लगा था। मैंने उसे अपने बिस्तर पर लेटा दिया वह बिस्तर पर लेट चुकी थी। मैंने उनकी नाइटी को उतारकर उनकी ब्रा के हुक को खोलकर उनके स्तनों को चूसना शुरु किया उनके स्तनों को मै अपने मुंह में ले रहा था तो उनके निप्पल खडे होने लगे थे और मेरा लंड भी खड़ा हो रहा था। उन्होने मेरे कपड़े उतार दिए वह मेरे लंड को हिलाती रही उनको मजा आने लगा वह बहुत ही ज्यादा उत्तेजित होने लगी थी।

मेरी गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी मैं रह नहीं पा रहा था मैंने उनकी पैंटी को नीचे उतारा जब उनकी चूत से पानी बाहर की तरफ आ रहा था मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था। जब मैं उनकी चूत को चाटने लगा तो मुझे उनकी चूत को चाटने में बड़ा मजा आ रहा था अब मैंने उनकी चूत को इतनी देर तक चाटा की वह पूरी तरीके से मचलने लगी थी मैं अब पूरी तरीके से गर्म हो चुका था। मैंने अपने लंड को उनकी चूत पर सटाकर अंदर की तरफ डाला तो मेरा लंड उनकी चूत के अंदर चला गया मेरा मोटा लंड उनकी चूत को फाडता हुआ अंदर की तरफ गया तो मुझे बहुत ही मजा आया। मेरे अंदर आग पैदा हो गई थी जिससे कि मैं बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो चुका था। मुझे बड़ा मजा आ रहा था मैंने उनके स्तनों को काफी देर तक दबाया वह पूरी तरीके से गर्म होने लगी थी मैंने अपने लंड को उनकी चूत के अंदर बाहर बड़ी तेजी से किया जब मेरा माल गिरा तो मैने उनको घोड़ी बनाया।

उनकी बडी गांड मेरी तरफ थी मैंने उनकी चूत के अंदर लंड डाला और अंदर बाहर अपने लंड को बड़े अच्छे से करना शुरू कर दिया वह मेरे लिए तड़प रही थी। अब वह मुझसे अपनी चूतड़ों को टकराए जा रही थी मुझे बड़ा मजा आ रहा था और उनको भी बहुत ही अच्छा लग रहा था। अब वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी उनकी चूत से कुछ ज्यादा ही लावा बाहर निकलने लगा था मेरे अंडकोषो से भी बहुत पानी बाहर की तरफ को निकल आया था। मैं समझ गया था अब मेरा माल बाहर गिरने वाला है। मैं उनको तेजी से धक्के देने लगा मैं उनको जिस तरह से धक्के मार रहा था उससे मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था वह भी बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी। जब मेरा माल उनकी चूत के अंदर गिर गया तो मैंने अपने लंड को बाहर निकाला वह खुश थी।

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