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झाडियो के बीच में सील तोड़ी

बारिश काफी तेज हो रही थी और मैं उस दिन जब अपने घर लौट रहा था तो मैंने देखा कि रास्ते में एक लड़की मुझे हाथ दे रही थी वह बारिश में भीगी हुई थी। मैंने कार रोकी और उसे अंदर आने के लिए कहा वह कार में बैठ गई और मुझे कहने लगी कि क्या आप मुझे आगे तक छोड़ देंगे। उस वक्त काफी ज्यादा अंधेरा हो रहा था और मैं भी अपने ऑफिस से लौट रहा था मैंने उसे उसके घर तक छोड़ दिया था। रास्ते में हम दोनों की बात हुई और उसने मुझे अपना नाम बताया और कहा कि मेरा नाम मंजू है। उसे छोड़ने के बाद मैं अपने घर लौट आया था मैं जब अपने घर लौटा तो मुझे काफी देर हो गई थी मैंने जल्दी से अपने कपड़े चेंज किए और मां ने खाना तैयार कर दिया था। मां कहने लगी कि सार्थक बेटा तुम खाना खा लो, पापा और मम्मी खाना खा चुके थे क्योंकि पापा उस दिन घर पर ही थे।

मैंने खाना खाया और उसके बाद मैं भी लेट गया अगले दिन मुझे अपने ऑफिस की मीटिंग से मुंबई जाना था मैंने अपना सामान पैक कर लिया था और सुबह जब मैं उठा तो पापा मुझे कहने लगे कि सार्थक बेटा तुम कहां जा रहे हो। मैंने पापा से कहा कि पापा मैं आज मुंबई जा रहा हूं पापा मुझे कहने लगे कि लेकिन कल रात को तो तुमने हमें इस बारे में बताया ही नहीं। मैंने पापा से कहा पापा बस मैं दो दिन बाद वहां से लौट आऊंगा मां मुझे कहने लगी कि बेटा मैं तुम्हारे लिए नाश्ता बना देती हूं मैंने मां से कहा नहीं मां रहने दीजिए मैं बाहर ही कुछ खा लूंगा और मुझे लेट भी हो रही है। मैं जब मुंबई पहुंचा तो वहां से मैं दो दिन बाद वापस लौट आया था, पापा मुझे कहने लगे कि बेटा आज हम लोग तुम्हारे मामा जी के घर जा रहे हैं मैंने उन्हें कहा पापा मामा जी के घर क्या कुछ जरूरी काम है। वह कहने लगे बेटा बस ऐसे ही तुम्हारी मम्मी कह रही थी कि काफी दिन हो गए तुम्हारे मामा जी से मुलाकात नहीं हुई है तो सोच रहे हैं कि आज उनसे मिल आते हैं। मैंने पापा से कहा ठीक है पापा मैं भी आप लोगों के साथ चलता हूं हालांकि मैं उसी वक्त मुंबई से दिल्ली पहुंचा था लेकिन मैं जल्दी से तैयार हुआ और पापा और मम्मी के साथ मैं मामा जी के घर चला गया। हम लोग जब मामा जी के घर पहुंच गए तो मामा जी और मामी काफी खुश थे वह दोनों घर पर अकेले रहते हैं उनके दोनों बेटे इंग्लैंड में जॉब करते हैं और वहां पर वह एक अच्छी कंपनी में जॉब करते हैं।

मामा जी कहने लगे कि सार्थक बेटा तुम तो हमसे मिलने के लिए आते ही नहीं हो मैंने मामा जी को कहा मामा जी आपको तो पता ही है कि ऑफिस के काम में कितना बिजी रहता हूं इस वजह से आपसे मिलना नहीं हो पाता है। मामा जी काफी अच्छे हैं और मामी भी बहुत अच्छी हैं उस दिन हम लोग उनके घर पर ही रुक गए थे और अगले दिन हम लोग वापस लौट आए थे। सुबह के वक्त मैं उस दिन जल्दी उठ गया था और जब मैं उठा तो मैंने देखा अखबार आ चुका था मैं अखबार पढ़ने लगा और जब मैं अखबार पढ़ रहा था तो उस वक्त पापा भी उठ गए और मुझे कहने लगे कि सार्थक बेटा आज तुम जल्दी उठ गए। मैंने उन्हें कहा पापा बस ऐसे ही मेरी आंख खुल गई थी तो मैं अब अखबार पढ़ रहा था और मां भी थोड़ी देर बाद उठ चुकी थी। मां ने मेरे और पापा के लिए चाय बनाई अब हम लोगों ने चाय पी और उसके बाद मैं अपने ऑफिस जाने की तैयारी करने लगा। मैं अपने ऑफिस के लिए तैयार हो रहा था और अपने ऑफिस के लिए तैयार होकर मैं तुरंत ही ऑफिस निकल गया। मैं जैसे ही अपने ऑफिस के लिए निकला तो मुझे मंजू दिखाई दी काफी समय बाद मुझे मंजू दिखी थी उसने मुझे देखते ही पहचान लिया। मैं अपनी कार में था मैंने उसे कहा कि क्या तुम्हें कहीं ड्रॉप कर दूं तो मंजू ने मुझे कहा कि आप मुझे मेरे ऑफिस तक ड्रॉप कर दीजिए। उस दिन मैंने मंजू से पूछा कि मैं तुम्हारा नंबर लेना ही भूल गया था तो मंजू मुझे कहने लगी कि कोई बात नहीं मैं आपको अभी अपना नंबर दे देती हूं। मैंने और मंजू ने नंबर एक्सचेंज कर लिया था हम दोनों उसके बाद एक दूसरे से बातें करने लगे हम दोनों के बीच काफी अच्छी दोस्ती हो गई थी। हम दोनों के विचार एक जैसे ही थे हम दोनों एक दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने लगे।


एक दिन मंजू ने मुझे बताया कि वह कुछ दिनों के लिए अपने पापा और मम्मी के साथ जयपुर जा रही है जयपुर में वह अपने ननिहाल जा रही थी लेकिन उस दौरान भी मैं मंजू से फोन पर बातें करता रहा। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था की क्या मंजू और मेरे बीच में दोस्ती का रिश्ता है या उससे भी आगे कुछ और है लेकिन मुझे उस वक्त एहसास हुआ कि मैं मंजू से प्यार करने लगा हूं जब कुछ दिनों तक मंजू से मेरी बात नहीं हुई। उसके बाद तो मैंने भी अपने दिल की बात मंजू को कह दी और मंजू को जब मैंने अपने दिल की बात कही तो वह भी तुरंत मान गई। उसने मुझे कहा मैंने जब तुम्हें पहली बार देखा था तभी मैंने तुम्हें पसंद कर लिया था और तुम मुझे बहुत अच्छे लगे थे। हम दोनों का रिलेशन चलने लगा था मैं मंजू से ज्यादा से ज्यादा बात करने की कोशिश करता और उसके साथ समय बिताने की कोशिश भी करने लगा था। मंजू भी मुझसे बहुत ज्यादा प्यार करती थी अगर कभी मैं उसका फोन नहीं उठाता तो वह मुझ पर गुस्सा हो जाया करती उसका यही प्यार तो मुझे पसंद आने लगा था।

मैंने एक दिन मंजू से कहा चलो आज कहीं लॉन्ग ड्राइव पर चलते हैं मंजू भी मान गई और हम दोनों लॉन्ग ड्राइव पर निकल पड़े। मंजू के साथ मुझे अच्छा लग रहा था लेकिन उस दिन मेरा हाथ उसकी जांघ पर लगा तो मेरा मंजू को चोदने का मन होने लगा और वह भी शायद मुझसे अपनी चूत मरवाने के लिए तैयार थी हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स करना चाहते थे मैंने उसके होठों को किस किया तो वह मेरे लिए तडपने लगी और मैं भी उसके लिए पूरी तरीके से तडपने लगा था वह बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो गई थी जिस वजह से मैंने उसे कहा तुम मेरे लंड को अपने मुंह में ले लो। मैंने कार को किनारे रोक कर खड़ा कर दिया और उसके बाद मैंने जब अपने लंड को बाहर निकाला तो उसने उसे अपने हाथों में लेकर हिलाना शुरु किया मेरा लंड पूरी तरीके से खड़ा हो चुका था उसने जब मेरा मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर समाया तो वह बड़े अच्छे से उसे अपने मुंह के अंदर लेने लगी और मुझे बहुत ज्यादा मजा आने लगा था। वह जिस प्रकार से मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले रही थी उस से मैं इतना ज्यादा उत्तेजित हो गया था कि मेरे अंदर की गर्मी बढ़ती ही जा रही थी और मैंने उसे कहा मुझे तुम्हारी चूत मारनी है तो वह कहने लगी हां सार्थक तुम मेरी चूत मार लेना लेकिन अभी मुझे तुम्हारे लंड की गर्मी को महसूस करने दो उसने मेरे लंड से पानी निकाल दिया था और मेरा माल गिर चुका था। जिस वजह से मुझे मजा आने लगा था मैं उसे चोदना चाहता था मैंने भी गांडी को एक सुनसान जगह पर रोका और वहां से हम लोग झाड़ियों में चले गए झाडिया बहुत ज्यादा धनी थी इसलिए वहां पर कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। मैंने भी जल्दी से मंजू के कपड़े उतारे जब उसने अपनी जींस को उतारा तो उसकी मोटी जांघे देख कर मेरा लंड तन कर खड़ा हो गया और मैं अपने लंड को हिलाने लगा उसने मुझे कहा तुम मेरी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दो मैंने भी उसकी पैंटी को उतारकर उसकी चूत को अपनी उंगलियों से सहलाना शुरु किया जिस वजह से उसकी चूत से पानी बहुत ज्यादा बाहर निकलने लगा था और वह तड़पने लगी थी। अब उसकी तडप इतनी ज्यादा बढ़ने लगी कि वह मुझे कहने लगी उस से बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था।

वह बोली तुम जल्दी से अपने लंड को चूत के अंदर घुसा दो वह बहुत ही ज्यादा तड़पने लगी थी उसकी गर्मी इतनी बढ़ने लगी कि वह मुझे कहने लगी वह कहने लगी अब मै बिल्कुल भी अपने आपको रोक नहीं पा रही हूं उसकी गर्मी बढ़ चुकी थी इसलिए मैंने भी उसकी चूत के अंदर अपने लंड को डालने का फैसला कर लिया। जब मैंने ऐसा किया तो वह बड़ी बेताब थी मैंने उसकी चूत पर अपने लंड को टच किया जैसे ही मैंने अपने लंड को टच किया तो वह बड़ी उत्तेजित होने लगी मैंने धीरे-धीरे उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दिया। जैसे ही मेरा मोटा लंड उसकी चूत के अंदर गया था तो उसकी चूत के अंदर से पानी बाहर निकालने लगा और पानी के साथ साथ खून भी बहुत ज्यादा बाहर निकल रहा था। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही ज्यादा दर्द होने लगा है मैंने उसकी कमर को पकड़ लिया और बड़ी तेज गति से चोदना शुरू किया वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत मजा आ रहा है।

वह अपनी चूतडो को मुझसे मिला रही थी उसकी चूतडो का रंग लाल होने लगा था वह बहुत ही ज्यादा मचलने लगी थी वह मुझे कहने लगी उस से बिल्कुल भी रहा नहीं जाएगा तुम जल्दी से अपने माल को मेरी चूत में गिरा कर मेरी इच्छा को पूरा कर दो। मैंने उसे कहा कि बस थोड़ी देर बाद मैं तुम्हारी इच्छा को पूरा कर दूंगा मेरा लंड पूरी तरीके से छिल चुका था लेकिन मेरी इच्छा अभी तक पूरी नहीं हुई थी। मुझे मंजू को चोदने मे बहुत मजा आ रहा था और मंजू की चूत के अंदर से गरम लावा बाहर निकल रहा था वह और भी अधिक होता जा रहा था वह अपने मुंह से लगातार तेज आवाज मे सिसकिया ले रही थी और उसकी सिसकिया बढ़ने लगी थी। मुझे उसकी चूत मारने में बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा था और काफी देर तक मैंने उसके चोदा लेकिन जैसे ही मैंने उसकी चूत के अंदर आपने माल को गिराया तो वह खुश हो गई और कहने लगी क्या अब हम लोग चले। हम दोनों ने जल्दी से अपने कपड़े पहने और वहां से चले आए।

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