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सेक्स करके लंड छिल गया

मेरी छोटी बहन संजना को देखने के लिए लड़के वाले घर आने वाले थे इसलिए मेरी मां ने मुझे कहा कि बेटा तुम ही सारा काम सम्भालना मैंने मां से कहा ठीक है मां आप चिंता मत कीजिए। मैंने ही उस दिन सारा अरेंजमेंट किया था और घर पर जब लड़के वालों ने मेरी बहन संजना को देखा तो उन्हें मेरी बहन पसंद आ चुकी थी अब संजना की सगाई जल्दी होने वाली थी। संजना की सगाई हो जाने के बाद उसकी शादी के लिए मुझे भी पैसों का प्रबंध करना था क्योंकि कुछ समय पहले ही पापा की तबीयत खराब हो गई थी जिस वजह से उनके इलाज के लिए काफी पैसे लगे थे। मैं जिस कंपनी में नौकरी करता था उस कंपनी में मेरी ज्यादा तनखा तो नहीं थी लेकिन मैंने अपने दोस्तों की मदद से कुछ पैसे जमा कर लिए थे जो कि मैंने अपने पापा को दे दिये और अब मेरी बहन संजना की शादी बड़े ही धूमधाम से हुई। पापा भी इस बात से बहुत खुश थे और मैंने भी उसकी शादी में कोई कमी नहीं होने दी पापा और मम्मी बहुत ही खुश है कि उसे एक अच्छा लड़का मिला।

कुछ समय बाद संजना अपने पति के साथ विलायत चली गई और जब भी संजना का मुझे फोन आता तो मैं उससे कहता कि तुम कुछ दिनों के लिए घर आ जाओ। संजना करीब एक वर्ष बाद घर आई तो वह बहुत ही ज्यादा खुश थी और कहने लगी कि भैया मेरे पति मेरा बहुत ही ध्यान रखते हैं। वह मुझे कहने लगी कि राजीव भैया आप भी शादी कर लो मैंने उसे कहा कि हां संजना मैं भी शादी कर लूंगा। एक दिन संजना ने मुझे कहा कि भैया क्या आप मुझे मेरी सहेली के घर छोड़ देंगे तो मैंने संजना को कहा ठीक है मैं तुम्हें तुम्हारी सहेली के घर छोड़ देता हूं और उस दिन मैंने उसे उसकी सहेली के घर छोड़ दिया। मैंने उसे उसकी सहेली के घर छोड़ा और मैं वहां से वापस लौट आया था लेकिन संजना ने मुझे कहा कि भैया आप मुझे लेने के लिए भी आ जाना। उसने मुझे शाम के वक्त फोन किया और मैं उसे लेने के लिए चला गया, जब मैं संजना को लेने के लिए गया तो मैंने संजना की सहेली को देखा जिसका नाम आकांक्षा है।

जब संजना ने मुझे उससे मिलवाया तो मुझे आकांक्षा बहुत ही अच्छी लगी लेकिन उस दिन के बाद हम लोग कभी मिले नहीं थे काफी समय हो गया था और संजना भी विलायत चली गई थी। आकांक्षा जब एक दिन मुझे दिखी तो उसने मुझे देखते ही पहचान लिया वह मुझसे मिलकर बहुत ही खुश थी और उस दिन जब मुझे आकांक्षा मिली तो हम दोनों ने उस दिन साथ में समय बिताया। हम लोग एक कॉफी शॉप में बैठे हुए थे उस दिन आकांक्षा से मुझे बात करने का मौका मिला और आकांक्षा से बात कर के मैं काफी खुश था। यह पहला ही मौका था जब आकांक्षा से मैंने बात की थी उसके बाद आकांक्षा और मैं एक दूसरे से अक्सर बात किया करते थे हम दोनों की फोन पर भी बातें होने लगी थी और हम दोनों एक दूसरे के बहुत करीब आने लगे थे। मुझे लगने लगा था कि आकांक्षा मेरे जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण है और जब भी मैं आकांक्षा से बात करता तो मुझे बहुत अच्छा लगता है। एक दिन मैं अपने ऑफिस से वापस लौट रहा था तो मुझे आकांक्षा का फोन आया और वह मुझे कहने लगी कि राजीव मुझे तुमसे मिलना था। उस दिन आकांक्षा ने मुझे मिलने के लिए बुलाया और हम लोग उसी कॉफी शॉप में मिले जिस कॉफ़ी शॉप में हम लोग पहली बार एक दूसरे को मिले थे। जब मैं आकांक्षा को मिला तो आकांक्षा ने मुझे कहा कि राजीव पापा और मम्मी मेरे लिए लड़का देखना शुरू कर चुके हैं मैं चाहती हूं कि तुम उनसे एक बार मिल लो मैंने आकांक्षा को कहा ठीक है आकांशा मैं तुम्हारे पापा से इस बारे में बात कर लूंगा। कुछ दिनों बाद आकांक्षा ने अपने पापा को मेरे बारे में बताया जब आकांक्षा ने अपने पापा को मेरे बारे में बताया तो उन्होंने मुझे मिलने के लिए बुलाया और मैं उनसे मिलने के लिए चला गया। जब वह मुझसे मिले तो उन्होंने मुझे कहा कि राजीव बेटा आकांक्षा तुम्हारी बहुत ही तारीफ करती है। आकांक्षा के पिताजी बहुत ही सज्जन व्यक्ति हैं और उन्हें मेरे और आकांक्षा के रिश्ते से कोई भी परेशानी नहीं थी लेकिन आकांक्षा की मां को शायद मैं बिल्कुल भी पसंद नहीं था इसलिए आकांक्षा की मां ने उसके पापा से कहा कि आकांक्षा की शादी हम कहीं और करा देते हैं लेकिन आकांक्षा तो मुझसे ही शादी करना चाहती थी।

आकांक्षा को मैं भी अपने पापा मम्मी से मिलवा चुका था हालांकि आकांक्षा की मम्मी की वजह से हम दोनों की अभी तक बात आगे नहीं बढ़ पाई थी लेकिन हम दोनों एक दूसरे को अक्सर मिला करते थे और जब भी एक दूसरे को हम लोग मिलते तो हमें बहुत ही अच्छा लगता। मैं जब भी आकांक्षा से मिलता तो मुझे ऐसा लगता कि जैसे मेरी सारी परेशानी एक पल में ही दूर हो गई हो। यह बात मेरी बहन संजना को भी पता चल चुकी थी। आकांक्षा और मै एक दिन कॉफी शॉप में बैठे हुए थे उस दिन जब हम दोनों कॉफी शॉप में बैठे थे तो मुझे आकांक्षा को देखकर बहुत ही अच्छा लग रहा था आकांक्षा के साथ कहीं ना कहीं मैं उस दिन सेक्स करना चाहता था। मैंने उस दिन उसका हाथ पकड़ लिया और जब मैंने आकांक्षा का हाथ पकड़ा तो आकांक्षा मेरी तरफ देखने लगी उसकी आंखों में देखकर मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। मैं चाहता था कि आकांक्षा के साथ में संभोग करूं मैंने जब यह बात आंकाक्षा से कहीं तो आकांक्षा ने पहले कुछ देर तक सोचा लेकिन कहीं ना कहीं वह भी मेरी बात मान चुकी थी और हम दोनों उस दिन मेरे घर पर चले आए।

जब हम दोनों मेरे घर पर आए तो आकांक्षा के साथ में बैठे हुए था तो मैं उसके नर्म होठों की तरफ देख रहा था जब मैंने उसके पतले होठों को अपने होठों में लेकर चूसना शुरू किया तो मुझे मजा आने लगा। अब मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया था बिस्तर पर लेटाने के बाद में उसके स्तनों को दबाने लगा जब मैं उसके स्तनों को दबा रहा था तो वह मचलने लगी थी वह मेरे नीचे थी और मैं उसके ऊपर से लेटा हुआ था आकांक्षा की चूत के अंदर मै हाथ डालना चाहता था उसने मेरे हाथ को बाहर की तरफ खींच लिया मैं समझ चुका था कि वह बहुत ज्यादा तड़पने लगी है उसकी तड़प कुछ ज्यादा ही बढ़ चुकी थी। मैंने भी तुरंत अपने लंड को बाहर निकाल लिया जब मैंने देखा तो उसने आंखों को बंद करते हुए मुझे कहा तुम्हारा लंड तो बहुत ही ज्यादा मोटा है। मैंने उसे कहा तुम्हें इसे अपने मुंह के अंदर लेना है वह कहने लगी लेकिन मैं तुम्हारे लंड को अपने मुंह में कैसे लूंगी। मैंने अपने लंड को उसके मुंह के सामने किया और उसने अपने मुंह को हल्का सा खोला मैंने भी एक ही झटके में उसके मुंह के अंदर अपने लंड को घुसा दिया मेरे लंड को वह अच्छे से चूसने लगी थी और उसे बहुत ही अच्छा लग रहा था काफी देर तक उसने मेरे लंड का रसपान किया लेकिन जब मैंने उसे कहा कि तुम अब अपने कपड़े उतार दो तो उसने मेरे सामने अपने कपड़ों को उतार दिया वह मेरे सामने अब नंगी थी। मैंने उसकी गोरे बूब्स को चूसना शुरू किया मैं जब उसके स्तनो को अपने मुंह में लेकर उनका रसपान करता तो उसकी उत्तेजना और भी अधिक बढ़ती जा रही थी उसकी गर्मी इतनी अधिक हो चुकी थी कि उसने मुझे कहा मुझे बहुत ही ज्यादा बेचैनी सी हो रही है। मैं समझ चुका था कि वह मेरे लंड को चूत में लेने के लिए तैयार हो चुकी है अब मैंने अपने लंड को उसके अंदर डालने का मन बना लिया था मैंने जैसे ही उसकी चिकनी चूत पर लंड को लगाया तो वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ज्यादा डर लग रहा है कहीं कुछ होगा तो नहीं।

मैंने उसे कहा कुछ भी नहीं होगा तुम बस अपनी आंखों को बंद कर लो उसकी चूत से बहुत ज्यादा पानी बाहर निकल रहा था मैंने भी अपने लंड को उसकी चूत पर बहुत देर तक रखड़ा जिससे कि उसकी चूत से इतना ज्यादा पानी बाहर की तरफ आने लगा कि मेरा लंड उसकी योनि को अंदर जाने के लिए तैयार हो चुका था और वह भी मेरे मोटे लंड को लेने के लिए बहुत ज्यादा बेताब थी। मैंने भी जैसे ही अपने मोटे लंड को उसकी योनि के अंदर धीरे-धीरे डाला तो वह चिल्लाने लगी मैंने पूरी ताकत के साथ उसकी चूत के अंदर जब अपने लंड को घुसाया तो उसके मुंह से एक जोरदार चीख निकली और वह मुझे कहने लगी तुमने तो मेरी चूत ही फाड़ दी है। मैंने उसे कहा आज तो मुझे बहुत ही मजा आ गया मै आकांक्षा की तरफ देख रहा था वह मेरी तरफ देख रही थी मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के मार रहा था और वह मेरा साथ पूरे अच्छी तरीके से दे रही थी।

हम दोनों की ही गर्मी इस कदर बढ़ने लगी थी कि अब मैं चाहता था कि उसे मैं घोड़ी बनाकर चोदूं लेकिन उसे मज़ा आने लगा था इसलिए वह मुझे अपने दोनों पैरों की बीच में जकडने लगी। उसे बहुत ही अच्छा लग रहा था और मुझे भी मज़ा आने लगा था मेरी गर्मी में लगातार बढ़तोरी होती जा रही थी और मेरे अंदर की उत्तेजना इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थी कि मैंने आकांक्षा को कहा कि मैं तुम्हारे दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखना चाहता हूं और मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया। मैंने उसके पैरो को अपने कंधों पर रख लिया था मैं जब उसे धक्के देता तो उसकी चूतड़ों पर मेरा लंड बड़ी तेजी से लगता जिससे कि मेरे अंदर की आग और भी ज्यादा बढ़ने लगी थी। अब मैं उसे बड़ी तेज गति से चोद रहा था और उसके अंदर की उत्तेजना पूरी तरीके से बढ़ती जा रही थी वह मुझसे कहने लगी मेरी चूत से बहुत ज्यादा खून निकलने लगा है लेकिन मुझे तो बहुत मजा आ रहा था और एक समय ऐसा आया जब मैंने अपने माल को गिरा दिया। मैं बहुत ज्यादा खुश था कि मै उसके साथ में संभोग कर पाया।

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