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आंटी बोली चोदो मुझे जितना चोद सकते हो

कॉलेज के अपने पहले दिन जब मैं अपनी क्लास में बैठा हुआ था तो मैं किसी से भी बात नहीं कर रहा था तभी एक लड़का मेरे पास आकर बैठा उसने मुझसे बात की और मेरा नाम पूछा। मैंने उसे अपना नाम बताया, मैंने उसे कहा मेरा नाम सार्थक है उसने मुझसे हाथ मिलाते हुए कहा मेरा नाम आदित्य है। यह हम दोनों की पहली ही मुलाकात थी जब हम दोनों मिले थे हम एक दूसरे से बात करने लगे हमारे कॉलेज खत्म हो जाने के बाद आदित्य ने मुझे मेरे घर तक छोड़ा। मैं जब अपने घर आया तो पापा ने मुझसे पूछा कि सार्थक बेटा आज तुम्हारी क्लास कैसी रही तो मैंने पापा से कहा पापा मेरी क्लास तो अच्छी रही और आज मैंने अपने कॉलेज में एक नया दोस्त भी बनाया है। पापा ने मुझसे पूछा कि बेटा तुम्हारे दोस्त का क्या नाम है तो मैंने उन्हें बताया कि मेरे दोस्त का नाम आदित्य है। पापा और मैं एक दूसरे से बात कर रहे थे कि तभी मैंने देखा कि मां मेरे लिए चाय बना कर ला रही हैं मां ने जैसे ही चाय टेबल पर रखी तो मां ने मुझे और पापा को कहा कि आप लोग चाय पी लीजिए।

मां ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और कहा की सार्थक बेटा तुम्हारी क्लास तो ठीक रही, मैंने उन्हें कहा हां मां। मैंने चाय पी और मैं अपने कमरे में चला गया मैं अपने कमरे में गया तो उसके बाद मैं जब अपने रूम से बाहर निकला तो मां खाना बनाने की तैयारी कर रही थी मां ने रसोई में खाना बनाने की तैयारी शुरू कर दी थी। अगले दिन भी मैं कॉलेज गया और ऐसे ही समय बीता जा रहा था मुझे करीब दो महीने हो चुके थे दो महीने हो जाने के बाद क्लास में मेरी दोस्ती काफी लोगों से होने लगी थी। कॉलेज का समय बड़ी तेजी से निकलता जा रहा था एक दिन मुझे आदित्य ने कहा कि मैं आज तुम्हें अपने घर पर लेकर चलता हूं मैं उससे पहले कभी भी आदित्य के घर पर नहीं गया था यह पहला ही मौका था जब आदित्य मुझे अपने घर पर ले गया। जब वह मुझे अपने घर पर ले गया तो उसने मुझे अपने पापा मम्मी से मिलवाया उनसे मिलकर मुझे काफी अच्छा लगा वह लोग कहने लगे कि आदित्य अक्सर तुम्हारी बातें करता रहता है। मैं उन लोगों के साथ काफी देर तक बैठा रहा फिर मैं वापस घर चला आया जब मैं घर पहुंचा तो मां मुझे कहने लगी कि सार्थक बेटा तुम जल्दी से हाथ मुंह धो लो मैं तुम्हारे लिए कुछ बना देती हूँ।

मैंने मां से कहा नहीं मां रहने दीजिए आज मैं आदित्य के घर गया था और वहीं पर मैंने कुछ खा लिया था आप रहने दीजिए। मां मेरे पास आकर बैठी और मुझे कहने लगी कि सार्थक बेटा हम लोग कुछ दिनों के लिए तुम्हारे मामा जी के घर जा रहे हैं। मैंने मां से कहा मां क्या मैं भी आपके साथ चलूं तो मां कहने लगी बेटा लेकिन तुम्हारे कॉलेज की पढ़ाई मिस हो जाएगी। मैंने मां से कहा हां मां यह तो है मेरी कॉलेज की पढ़ाई भी मिस हो जाएगी। थोड़ी देर बाद पापा भी आ चुके थे पापा और मैं साथ में बैठकर बात कर रहे थे तब तक मां ने हमारे लिए खाना बना दिया था खाना बनाने के बाद हम लोगों ने खाना खाया और फिर मैं कुछ देर अपने घर के बाहर कॉलोनी में चला गया। मैं अपने घर के बाहर कॉलोनी में टहल ही रहा था कि मैंने देखा सामने से एक बुजुर्ग महिला आ रही थी शायद उन्हें अच्छे से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था तो मैंने उनसे कहा आंटी आपको कहां जाना है। उन्होंने मुझे कहा कि बेटा मुझे अपने घर जाना है लेकिन वह कुछ बताने में असमर्थ थी मैं उनका हाथ पकड़ते हुए उन्हें उनके घर तक ले गया और उन्हें मैंने उनके घर तक छोड़ दिया था। जब मैंने उन्हें उनके घर तक छोड़ा तो उसके बाद मैं अपने घर लौट आया और अगले दिन भी मैं अपने कॉलेज चला गया। अगले दिन कॉलेज से घर लौटने के बाद पापा और मम्मी सामान पैक कर रहे थे मैंने उन्हें कहा लेकिन आप लोग वहां से कब तक लौटेंगे तो वह लोग कहने लगे कि बेटा हमने पड़ोस में आंटी से कह दिया है वह तुम्हारे लिए खाना बना दिया करेंगे। मैंने मम्मी से कहा ठीक है मम्मी मैं संगीता आंटी के घर चला जाया करूंगा और अगले दिन सुबह पापा और मम्मी चले गए। मैं उस दिन कॉलेज गया और मैं काफी देर तक कॉलेज में ही था आदित्य को जब मैंने यह बताया कि पापा और मम्मी कुछ दिनों के लिए मामा जी के पास गए हुए हैं तो आदित्य मुझे कहने लगा कि तुम मेरे घर पर चलो। मैंने उसे कहा नहीं आदित्य हमारे पड़ोस में ही संगीता आंटी रहती हैं वह बहुत ही अच्छी हैं और मम्मी ने उनसे मेरे लिए खाना बनाने के लिए कह दिया है।

मैंने जब आदित्य को यह कहा तो वह कहने लगा कि सार्थक यदि किसी भी प्रकार की कोई परेशानी होगी तो तुम मुझे कह देना। मैंने आदित्य को कहा ठीक है यदि मुझे कुछ भी परेशानी हुई तो मैं जरूर तुम्हें कह दूंगा उसके बाद मैं और आदित्य घर लौट आए। जब मैं घर लौटा तो मैं उस दिन संगीता आंटी के घर चला गया संगीत आंटी के घर जब मैं गया तो मैंने उनके घर की डोर बेल बजाई जैसे ही मैंने उनके घर की डोर बेल बजाई तो उन्होंने दरवाजा खोला। जब उन्होंने दरवाजा खोला तो मुझे देखती ही आंटी कहने लगी कि सार्थक बेटा तुम आ गए मैंने उन्हें कहा हां आंटी। वह कहने लगी आओ बेटा अंदर आ जाओ उन्होंने मुझे घर के अंदर बुला लिया मैं उनके घर के अंदर बैठा हुआ था मैंने आंटी से कहा आंटी आज अंकल नहीं दिखाई दे रहे। वह मुझे कहने लगी कि बेटा वह आज देर से घर आएंगे मैंने तुम्हारे लिए खाना बना दिया है मैंने आंटी से कहा आंटी अभी मेरा भी खाना खाने का मन नहीं है तो वह मुझे कहने लगे कि तुम कुछ देर चिंटू के पास जाकर बैठ जाओ। चिंटू आंटी के लड़के का नाम है और उसकी उम्र 14 वर्ष है वह स्कूल की पढ़ाई कर रहा है मैंने सोचा कि कुछ देर मैं चिंटू के पास बैठ जाता हूं और मैं कुछ देर उसके साथ चला गया।

मैं उससे बात करने लगा तो वह वीडियो गेम खेल रहा था मैंने भी थोड़ी देर उसके साथ वीडियो गेम खेला और फिर मैंने आंटी से कहा कि आप मेरे लिए खाना लगा दीजिए। आंटी ने मेरे लिए खाना लगा दिया था लेकिन अभी तक अंकल घर लौटे नहीं थे और आंटी उनका इंतजार कर रही थी। मैंने खाना खाया और मैं अपने घर चला आया जब मैं अपने घर आया तो उस वक्त मुझे घर आते ही बहुत गहरी नींद आने लगी मैं आते ही सो गया और अगले दिन सुबह मैं जब उठा तो उस वक्त सुबह के 7:00 बज रहे थे। सुबह उठने के बाद मैंने अपने कॉलेज जाने की तैयारी कि और मैं अपने कॉलेज चला गया। मैं अपने कॉलेज गया तो मैंने देखा उस दिन आदित्य कॉलेज नहीं आया था मेरा क्लास में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा था और मैं जल्दी ही घर लौट आया था। मैं जब घर लौटा तो उस वक्त यही कोई 2:30 बज रहे थे मैंने उस दिन आदित्य को फोन किया तो उसने मुझे बताया कि आज मेरी तबीयत ठीक नहीं थी इसलिए मैं आ नहीं पाया। मैंने उसे कहा कोई बात नहीं और वैसे भी आज क्लास में ज्यादा पढ़ाई हुई नहीं थी तो वह कहने लगा ठीक है सार्थक मैं तुम्हें कल मिलता हूं। आदित्य को काफी तेज बुखार था इसलिए वह आराम कर रहा था और उसने मुझे कहा कि मैं तुमसे बाद में बात करता हूं। मैंने फोन रख दिया था और मैं अपने घर पर ही था। मैं घर पर ही था कि तभी घर के डोर बेल बजी। मैंने जैसे ही दरवाजा खोला तो मैंने देखा घर के बाहर संगीता आंटी खड़ी थी। वह कहने लगी सार्थक तुम कब आए मैंने उन्हें कहा आंटी में तो आधे घंटे पहले ही आ गया था उन्होंने मुझे कहा क्या तुमने खाना खा लिया था? मैंने कहा नहीं मेरा खाना खाने का मन नहीं है वह मुझे कहने लगी मैं तुम्हारे लिए कुछ बना देती हूं वह मेरे लिए खाना बनाने लगी थी मैं अपने कमरे में बैठा हुआ था।

संगीता आंटी मेरे कमरे में आई वह कहने लगी मैंने तुम्हारे लिए खाना बना दिया है वह मेरे साथ बैठी हुई थी ना जाने उस दिन उनके मन में क्या चल रहा था वह मेरे साथ बैठकर मुझे कहने लगी सार्थक क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड भी है मैंने उन्हें कहा नहीं मैने कोई गर्लफ्रेंड नहीं बनाई। वह बार-बार उस दिन आपने साड़ी के पल्लू को नीचे किए जा रही थी मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था क्या करूं। वह जिस प्रकार की बातें कर रही थी उससे उनकी इरादे मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहे थे अब मुझे भी महसूस होने लगा था कि उनके मन में कुछ तो चल रहा है वह चाहती हैं कि मैं उनके साथ सेक्स करूं लेकिन मैंने कभी उनके बारे में ऐसा सोचा नहीं था परंतु उस दिन मेरा भी मूड उनको चोदने का होने लगा। वह मुझसे अपनी चूत मरवाने के लिए ही घर पर आई हुई थी मैं जैसे ही उनके स्तनों को छुआ तो वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है अब तो जैसे वह मेरी बाहों में आ चुकी थी संगीता आंटी के बड़े स्तनों को मैं अपने हाथों से दबा रहा था।

मैं जब उनके स्तनों को दबाता तो मुझे बहुत ही मजा आता मुझे उनके स्तनों को दबाने में इतना मजा आ रहा था कि मैं उनके होठों को भी है चूमने लगा था मेरे अंदर की गर्मी बढ़ने लगी। मैंने अब उनके ब्लाउज को खोलते हुए उनकी ब्रा को उतारा मैंने देखा उनके बड़े स्तन बाहर की तरफ को लटकने लगे हैं। मै उनके स्तनों को चूसने लगा मैं उनके स्तनों का रसपान कर रहा था मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था और उनको भी मज़ा आने लगा था। वह पूरी तरीके से उत्तेजित होने लगी थी मैंने उनकी साड़ी को ऊपर करते हुए उनकी पैंटी को नीचे उतारकर उनकी चूत के अंदर अपनी उंगली को घुसा दिया वह मुझे कहने लगी सार्थक तुम तो बड़े ही हरामी किस्म के हो मैंने कहा आंटी अब आप ही मुझे हरामी बनने पर मजबूर कर रही हैं मैंने अपने लंड को उनकी चूत के अंदर डाल दिया। जब मैंने अपने लंड को उनकी चूत के अंदर डाला तो वह जोर से चिल्लाई और कहने लगी तुम्हारा लंड तो बड़ा मोटा है। मैंने उन्हें कहा क्या आजकल आपको अंकल चोद नहीं रहे तो वह मुझे कहने लगे हां यही समझ लो आजकल उनका मूड मुझे देखने का नहीं होता है इसलिए मैं कुछ ज्यादा ही तड़प रही थी। मैं उनकी दोनों जांघो को अपने हाथों से उठाकर उनकी चूतड़ों पर तेजी से प्रहार करने लगा था मैं जिस प्रकार से उन्हें चोद रहा था। उन्होंने मुझे कहा तुम मुझे ऐसे ही धक्के मारते रहो। मैंने उन्हें कहा मेरा माल गिरने वाला है वह मुझे कहने लगी तुम अपने माल को जल्दी से मेरी चूत में गिरा दो। मैंने उन्हें कहा बस आपकी चूत में अभी अपने माल को मैं गिरा देता हूं। जिस प्रकार से उनकी सिसकारियां में बढ़ोतरी हो रही थी उससे मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था मैंने अपने माल को जब उनकी चूत में गिराया तो वह खुश हो गई।

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