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मुझे देखकर सलवार ऊपर कर ली

हर रोज की तरह मैं अपनी दुकान से घर लौटा था उस दिन रात के करीब 10:00 बज रहे थे मुझे दुकान से आने में लेट हो गई थी मेरी पत्नी मेरा इंतजार कर रही थी वह मुझे कहने लगी कि आज आप दुकान से काफी देर में आ रहे है। मैंने उसे कहा कि हां मुझे आने में देर हो गई थी वह मुझे कहने लगे कि चलिये आप हाथ मुंह धो लीजिए मैं आपके लिए खाना लगा देती हूँ। मैंने अपनी पत्नी मेघना से पूछा कि क्या तुमने खाना खा लिया है तो मेघना ने कहा कि नहीं मैंने भी अभी खाना नहीं खाया है। मैंने मेघना को कहा क्या तुमने बच्चों को खाना खिला दिया था तो मेघना कहने लगी कि हां बच्चों को तो मैंने खाना खिला दिया था लेकिन मैंने अभी तक खाना नहीं खाया है। मैंने मेघना को कहा कि जाओ तुम मां को भी बुला लो मेघना कहने लगी हां मैं मां को बुला लेती हूं आप हाथ मुंह

धो लीजिए। मैं बाथरूम में चला गया और हाथ मुंह धो कर वापस डाइनिंग टेबल पर आया मैं डाइनिंग टेबल पर बैठा हुआ था और मां भी मेरे पास आकर बैठी। मां मुझे कहने लगी मनोज बेटा आज तुम काफी देर से आ रहे हो तो मैंने मां को कहा हां मां दुकान में कुछ ज्यादा काम था इसलिए आने में देर हो गई। हम दोनों बात कर रहे थे तभी मेघना खाना ले आई उसके बाद हम लोगों ने खाना खाया। खाना खाते खाते मां ने मुझे कहा कि बेटा मैं तुम्हारी मौसी के घर जयपुर जा रही हूं तुम मेरी ट्रेन की टिकट बुक करवा देना मैंने मां से कहा ठीक है मां मैं आपकी ट्रेन की टिकट बुक करवा दूंगा लेकिन आप कब जाने वाली हैं। वह मुझे कहने लगे कि बस दो-चार दिन में तुम मेरी टिकट करवा देना उसके बाद मैं तुम्हारी मौसी से मिल आती हूं मैंने मां से कहा ठीक है मां मैं कल ही आपकी टिकट करवा देता हूं। मैं और मेघनाथ खाना खाने के बाद साथ में बैठे हुए थे तो मेघना ने मुझे बताया कि बच्चों की स्कूल की फीस भरनी है मैंने उसे कहा कि ठीक है कल सुबह मैं तुम्हें पैसे दे दूंगा। मेघना मुझसे कहने लगी कि वह बच्चों की ट्यूशन क्लासेस भी चेंज करना चाहती है तो मैंने उसे कहा मेघना यह तुम देख लो क्योंकि इसके लिए मेरे पास समय नहीं है और तुम तो जानती हो कि मुझे इस बारे में ज्यादा जानकारी भी नहीं है। मेघना मुझे कहने लगी ठीक है मैं इस बारे में खुद ही सोच लूंगी।

अगले दिन मैंने अपनी दुकान के पास ही एक ट्रैवल एजेंट हैं उनसे टिकट बुक करवा ली वह मेरे काफी अच्छे दोस्त हैं उनके साथ कुछ देर तक मैं बैठा भी रहा। मैं शाम को घर लौटा तो मैंने मां को टिकट दी और कहा कि मां मैंने आपकी टिकट दो दिन बाद की टिकट करवा दी है मां कहने लगी कि ठीक है बेटा मैं भी अपना सामान पैक कर लेती हूं। मैंने मेघना से कहा कि मेघना तुम मां की मदद कर देना मेघना कहने लगी हां मनोज मैं मां की मदद कर दूंगी। जिस दिन मां को जयपुर के लिए निकलना था उस दिन मुझे ही मां को रेलवे स्टेशन तक छोड़ने के लिए जाना पड़ा। मैं उस दिन मां को रेलवे स्टेशन छोड़ने के लिए गया और उसके बाद मैं घर लौट आया उस दिन बच्चे घर पर ही थे बच्चों की स्कूल की छुट्टी थी तो मेघना कहने लगी कि मनोज आज आप भी अपने काम से आराम ले लीजिए। मैंने मेघना को को कहा मेघना आज मेरा दुकान में जाना जरूरी है लेकिन फिर भी मैं कोशिश करूंगा कि मैं जल्दी आ जाऊं तो मेघना कहने लगी ठीक है। उसके बाद मैं अपनी दुकान में चला गया और मेघना घर पर ही थी मेघना का दोपहर के वक्त मुझे फोन आया और वह मुझसे कहने लगी कि मनोज क्या आप घर आ रहे हैं तो मैंने मेघना को कहा कि नहीं मेरा घर आना मुश्किल हो पाएगा। मेघना कहने लगी कि मैं अपनी सहेली के घर जा रही हूं मैंने मेघना को कहा ठीक है तुम अपनी सहेली के घर चली जाओ और मेघना उस दिन अपनी सहेली के घर चली गई। मुझे दुकान से आने में काफी देर हो गई थी मेघना मेरा इंतजार कर रही थी, हम लोगों ने साथ में खाना खाया तो खाना खाते खाते मेघना मुझसे कहने लगी कि क्या आपकी मां से बात हो गई थी। मैंने मेघना को बताया कि हां मैंने मां को फोन कर लिया था वह जयपुर पहुंच चुकी थी। मैंने मेघना को कहा तुम अपनी सहेली के घर गई थी तो मेघना कहने लगी कि हां आज मैं अपनी सहेली के घर गई थी और उस दिन मेघना और मैं खाना खाने के बाद अपने घर की छत में चले गए और वहां पर कुछ देर हम लोग बैठे रहे। मौसम काफी अच्छा था और तेज हवाएं चल रही थी मेघना कहने लगी कि मौसम कितना अच्छा है तो मैंने मेघना को कहा हां मौसम तो आज बहुत ही अच्छा है। मेघना मुझसे कहने लगी कि उसकी छोटी बहन आकांक्षा कुछ दिनों के लिए हमारे पास रहने के लिए आने वाली है तो मैंने मेघना से कहा कि आकांक्षा तो अपनी पढ़ाई पूरी कर चुकी है।


मेघना मुझे कहने लगी कि हां आकांक्षा की पढ़ाई हो चुकी है उसकी जॉब यही दिल्ली में लग गई है और वह ऑफिस ज्वाइन करने वाली है इसीलिए वह कुछ दिन हमारे साथ रहना चाहती है। मैंने मेघना को कहा हां मेघना इसमें मुझे क्या आपत्ति है लेकिन आकांक्षा कब आ रही है तो मेघना ने बताया कि आकांक्षा कुछ दिनों में आ जाएगी। हम दोनों काफी देर तक एक दूसरे से बात करते रहे फिर हम दोनों छत से नीचे आ गए और हम लोग उसके बाद सोने की तैयारी करने लगे। अगले दिन सुबह मुझे जल्दी अपनी दुकान के लिए निकलना था तो मैं सुबह जल्दी उठ गया था मेघना भी बच्चों को तैयार कर रही थी तो मेघना ने मुझे कहा कि मैं आपके लिए नाश्ता तैयार कर देती हूं। मैंने मेघना को कहा ठीक है तुम मेरे लिए नाश्ता बना दो। मेघना ने मेरे लिए नाश्ता बनाया और फिर मैं अपनी दुकान के लिए निकल पड़ा हर रोज की तरह दुकान से मैं देर को घर लौटा। रोज के तरह में घर लौटा उस दिन भी मुझे लौटने में काफी ज्यादा देर हो गई थी थोड़े ही दिनों बाद आकांक्षा भी घर पर आ गई।

जब आकांक्षा घर पर आई तो वह अपना ऑफिस ज्वाइन कर चुकी थी उसकी कुछ दिनों की ऑफिस में ट्रेनिंग की थी। एक रात मेघना और मैं अपने कमरे में थे उस दिन मेरा मन मेघना को चोदने का होने लगा था मै उसे चोद रहा था मेघना की सिसकियां सुनकर शायद आकांक्षा भी बाहर गई थी वह दरवाजे पर ही खड़ी थी मैंने उसे देख लिया था। वह हम दोनों को देखकर काफी ज्यादा उत्तेजित हो गई थी उसके बाद वह अपने कमरे में चली गई जब मैंने मेघना को पूरी तरीके से संतुष्ट कर दिया था तो मैं मेघना के सो जाने के बाद आकांक्षा के कमरे में चला गया मैंने देखा वह सलवार को नीचे किए हुए अपनी पैंटी को उतार कर अपनी चूत में उंगली कर रही थी। यह सब देखकर मेरा मन उसे चोदने का होने लगा लेकिन वह मुझे देखते ही घबरा गई थी वह चुपचाप बैठ गई मैं आकांक्षा के पास गया और उससे कहा यह सब जवानी में होता है। वह अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पाई और मेरे लंड को अपनी चूत में लेने के लिए बेताब थी मैंने जैसे ही उसकी जांघ पर हाथ रखा तो उसके बाद वह मेरी बाहों में आ गई। अब वह मेरे साथ सेक्स करने के लिए उत्तेजित हो चुकी थी हम दोनों एक ही बिस्तर में लेटे हुए थे। मै आंकाक्षा के होंठो को चूमने लगा अब हम दोनों की गर्मी बढ़ने लगी थी हम दोनो अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रहा थे वह तो बहुत ज्यादा तडप रही थी। उसकी सलवार को उतारकर मैने उसकी पैंटी को उतारा उसक चूत से पानी बाहर निकल रहा था वह बहुत ज्यादा तड़पने लगी थी। मैंने भी अपने लंड को बाहर निकाल लिया जब मैंने अपने लंड को बाहर निकालकर हिलाना शुरू किया तो वह मेरे लंड को देखकर बोली जीजा जी आपका लंड बहुत ही ज्यादा मोटा है। उसने अब मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया। उसकी चूत से बहुत पानी बाहर निकालने लगा था वह उत्तेजित हो गई थी।

मैंने उसके सूट को उतारकर उसकी ब्रा को खोला और उसके बूब्स को अपने हाथों से दबाना शुरू किया। जब मैं ऐसा करता तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होता और उसे भी बड़ा मजा आ रहा था। मै उसके स्तनो का रसपान करने लगा कुछ देर बाद मैने उसकी चूत को देखा तो उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था। मैंने उसकी चूत पर अपनी उंगली का स्पर्श किया वह मचलने लगी। जब मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया तो मैं उसकी योनि को चाट रहा था तो मुझे बड़ा मजा आ रहा था और उसे भी बहुत ज्यादा मजा आने लगा था वह उत्तेजित होने लगी थी।

मुझे बहुत ही मजा आ रहा है मैंने उसे कहा मेरे अंदर की आग अब बढ़ने लगी है जब मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को धकेलते हुए डाला तो वह जोर से चिल्लाई वह मुझे कहने लगी मेरी चूत से खून निकल गया। मैंने देखा उसकी चूत से खून बह रहा था उसको बड़ा ही मजा आ रहा था अब मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करना शुरू कर दिया था जिससे कि मुझे बहुत ज्यादा मजा आने लगा था वह पूरी तरीके से उत्तेजित होने लगी थी। उसने मुझे अपने पैरो के बीच मे जकड लिया मै उसे चोद रहा था उससे वह और भी ज्यादा उत्तेजित होती जा रही थी। उसकी चूत पर जब मैं प्रहार करता तो मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा था काफी देर तक मैंने उसके साथ संभोग का मजा लिया। जब उसकी चूत ने मेरे अंडकोषो से माल को चूसना शुरु किया तो मैंने अपने माल को उसकी चूत मे गिरा दिया। मेरा माल उसकी चूत मे गिर चुका था अब हम दोनों एक दूसरे की बाहों में लेट चुके थे कुछ देर बाद मै मेघना के पास चला गया।

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