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चूतडो पर वीर्य की बारिश

मैं अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद मुंबई लौट आया और मुंबई लौटने के बाद मैंने पापा के बिजनेस में उनका हाथ बढ़ाना शुरू किया। पापा के ऑफिस में काफी स्टाफ था और जब पहले दिन मैं ऑफिस गया तो पापा ने मेरा परिचय सबसे करवाया उस दिन मैं पहली बार ममता से मिला था वह मुझे काफी अच्छी लगी काम के प्रति वह काफी ईमानदार थी और वह अपना काम मन लगाकर किया करती। एक दिन मैंने ममता से कहा कि ममता क्या आज तुम मेरे साथ कुछ देर बैठ सकती हो तो ममता कहने लगी हां सर क्यों नहीं और वह मेरे साथ बैठ गई हम दोनों मेरे कैबिन में साथ में बैठे हुए थे और एक दूसरे से बात कर रहे थे। मैंने ममता से पूछा कि तुम्हारे परिवार में कौन-कौन है तो ममता कहने लगी की मेरे पापा का देहांत तो काफी वर्ष पहले हो गया था और मेरे परिवार में मेरी मां और मेरी छोटी बहन है इसलिए मेरे ऊपर ही घर की सारी जिम्मेदारी है।

ममता से मैंने कुछ देर बात की तो मुझे अच्छा लगा लेकिन मुझे यह एहसास भी हुआ कि मेरे पापा ने मुझे कभी भी किसी चीज की कोई कमी नहीं होने दी और मैंने जब भी उनसे कुछ डिमांड की तो उन्होंने तुरंत ही मुझे वह चीज ला कर दे दी लेकिन ममता ने अपने जीवन में बहुत मेहनत की थी और उसके पापा के बारे में भी उसने मुझे बताया। हम दोनों अब एक दूसरे को अच्छे से समझने लगे थे और कहीं ना कहीं मैं भी ममता को पसंद करने लगा था। एक दिन हमारे ऑफिस में ही एक पार्टी थी तो उस दिन ममता भी उस पार्टी में थी मैंने ममता से बात की और ममता से बात करते-करते हम दोनों हमारे ऑफिस के टेरेस पर चले गए। हम दोनों वहां पर बात कर रहे थे तो ममता ने उस दिन मुझे अपनी परेशानियों के बारे में बताया और कहने लगी संजीव सर आप बहुत ही अच्छे हैं। मैंने ममता से कहा कि ममता मुझे सर कहने की जरूरत नहीं है हम दोनों की उम्र लगभग बराबर ही है इसलिए तुम मुझे संजीव कह सकती हो। उस दिन के बाद ममता मुझे संजीव कहने लगी ममता ने जिस प्रकार से अपने जीवन में मेहनत की थी उससे मुझे काफी कुछ सीखने को मिलता है।

एक दिन मैं ममता के घर भी गया था मैं ममता के घर गया तो उसकी मां से मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा और ममता की छोटी बहन भी बहुत ही अच्छी है वह कॉलेज की पढ़ाई कर रही है और ममता चाहती है कि वह पढ़ लिखकर एक बड़े अधिकारी के पद पर हो। उस दिन मैंने ममता के घर पर ही खाना खाया और मुझे काफी अच्छा लगा मेरे पास सब कुछ होते हुए भी शायद वह चीज नहीं थी जो मैं हमेशा से तलाशने की कोशिश करता। पापा हमेशा से ही अपने काम में बिजी रहे उन्होंने मुझे कभी किसी चीज की कोई कमी तो नहीं होने दी लेकिन उनसे मुझे कभी वह प्यार भी नहीं मिल पाया और मम्मी तो हमेशा पार्टियों में बिजी रहती हैं मम्मी के पास तो कभी मेरे लिए समय होता ही नहीं है। ममता के पास शायद उतने पैसे तो नहीं थे लेकिन उन लोगों के परिवार में काफी ज्यादा प्यार था और उनका छोटा सा परिवार बहुत खुश था इसलिए मुझे ममता के घर जाना अब अच्छा लगने लगा। मैं अक्सर ममता के घर जाया करता और उसकी मम्मी से मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगता मुझे कुछ समय के लिए अमेरिका जाना था इसलिए मैं अमेरिका चला गया। मैं काफी दिनों तक वहां पर रहा मुझे करीब वहां पर 25 दिन हो चुके थे और फिर मुझे वापस मुंबई लौटना था मैंने अपनी फ्लाइट की टिकट बुक करवा दी थी और मैं वापस मुंबई लौट आया। मैं जब मुंबई वापस लौटा तो मैंने देखा कि ममता ऑफिस नहीं आ रही है मैंने जब इस बारे में अपने ऑफिस के मैनेजर से पूछा तो उन्होंने मुझे बताया कि कुछ दिनों से ममता ऑफिस नहीं आ रही है उसने ऑफिस से छुट्टी ली हुई है। मैंने ममता को फोन किया तो उसने मेरा फोन भी नहीं उठाया मैंने उस दिन ममता के घर जाना ही ठीक समझा और मैं ममता के घर चला गया। मैं ममता के घर गया तो मैंने देखा उनके घर पर ताला लगा हुआ था घर में कोई भी नहीं था मैं कुछ समझ नहीं पाया, करीब दो दिन बाद मैंने जब ममता को फोन किया तो उसने मेरा फोन उठा लिया और कहने लगी कि संजीव क्या तुम मुझे फोन कर रहे थे।


मैंने ममता से कहा हां ममता मैं तुम्हें फोन कर रहा था क्योंकि तुम कुछ दिनों से ऑफिस नहीं आ रही हो और मैं तुम्हारे घर पर भी गया था तो तुम्हारे घर पर भी ताला लगा हुआ था। ममता ने मुझे बताया कि वह अपने गांव गए है उनके चाचा जी ने उनके गांव के घर को बेच दिया है जिस वजह से वह लोग वहां गए हुए थे। ममता काफी ज्यादा परेशान लग रही थी मैंने ममता से कहा कि तुम्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है सब कुछ ठीक हो जाएगा। ममता और उसका परिवार कुछ ज्यादा ही परेशान थे लेकिन जब वह मुंबई आये तो शायद सब कुछ ठीक हो चुका था और ममता अब ऑफिस आने लगी थी। मैंने ममता से कहा कि ममता क्या अब सब कुछ ठीक हो चुका है तो वह कहने लगी कि हां संजीव दरअसल चाचा जी ने हमारे गांव के घर को बेचने की बात कर ली थी लेकिन हम लोग नहीं चाहते कि हमारे गांव का घर वह बेचे इसी वजह से मुझे और मां को कुछ दिनों के लिए घर जाना पड़ा था। मैंने ममता से कहा लेकिन अब तो सब कुछ ठीक है तो वह कहने लगी हां संजीव अब सब कुछ ठीक है।

एक दिन में ऑफिस से निकला तो उस दिन मैंने देखा ममता बस का इंतजार कर रही थी मैंने कार रोकी और ममता को कार में बैठने के लिए कहा। ममता कार में बैठ गई मैंने ममता से कहा मैं तुम्हारे घर तक तुम्हें छोड़ देता हूं ममता ने अपनी गर्दन को हिलाया और मैंने उसे उसके घर तक छोड़ दिया। अब कई बार मै ममता को उसके घर तक छोड़ दिया करता एक दिन मैं और ममता कार मे साथ में थे उस दिन मेरा हाथ गलती से ममता की जांघ पर लग गया तो ममता ने मेरी तरफ देखा लेकिन वह जिस तरीके से मेरी तरफ देख रही थी उससे मैं भी उसकी आंखों में देखने लगा और मैंने कार को एक किनारे रोकते हुए उसके होठों को चूम लिया। उस दिन वह शरमा गई लेकिन शायद उसे भी अब अच्छा लगने लगा था और एक दिन मैंने उसे अपने केबिन में बुलाया और जब मैंने उसे अपने केबिन में बुलाया तो मैंने उसके होठों को चूम लिया और हम दोनों ही अपने आपको रोक ना सके। मैंने अपने कैबिन को अंदर से लॉक कर लिया अब मैं ममता के बदन को महसूस करने लगा था और वह भी मेरी छाती को अपनी जीभ से चाटने लगी उसने मेरी शर्ट के बटन को खोला और अब उसने मेरी शर्ट को उतार दिया था। वह मेरी पैंट की तरह बढी और उसने मेरे लंड को अपने हाथ से हिलाना शुरू कर दिया जब वह ऐसा कर रही थी तो मुझे अच्छा लगने लगा और ममता ने जब मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लिया तो मुझे और भी ज्यादा मजा आने लगा था उसने मेरे लंड को तब तक चूसा जब तक मेरे लंड से पानी बाहर नहीं निकल गया। अब ममता की उत्तेजना भी बढ़ चुकी थी और उसके चेहरे पर साफ नजर आ रहा था कि उसे मेरे लंड को अपनी चूत में लेना है वह मेरे लंड को लेने के लिए तड़प रही थी। मैंने भी उसके स्तनों को चूसना शुरू कर दिया और उसके सारे कपड़े उतार फेंके वह मेरे सामने नंगी थी। अब मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया मैंने उसे टेबल पर लेटा कर रखा था जब मैंने उसे टेबल पर लेटाया हुआ था तो उसकी कोमल चूत को मैं चाट रहा था उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था और उसकी कोमल चूत को चाटने में मुझे मजा आ रहा था।

जब मैंने उसकी चूत को बहुत देर तक चाटा तो मुझे एहसास होने लगा कि अब मुझे उसकी चूत में अपने लंड को डाल देना चाहिए वह बहुत ही ज्यादा बेताब थी और मैंने जैसे ही उसकी योनि के अंदर अपने लंड को घुसाया तो वह बहुत जोर से चिल्लाई और मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही मजा आ गया और यह कहते ही मैंने अब उसे पूरी तरीके से गरम करन शुरू कर दिया था मैं उसे जिस तेज गति से धक्के मार रहा था उससे वह बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी और मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही मजा आ रहा है। अब मैं उसे लगातार तेजी से चोदता जा रहा था और जिस तेज गति से मैंने उससे चोदा से भी मजा आने लगा था लेकिन जब मैंने देखा कि उसकी चूत से कुछ ज्यादा ही पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा है तो मुझे मजा आने लगा और वह भी पूरी तरीके से खुश हो चुकी थी मैंने उसे कहा मुझे तुम्हे धक्के देने में मजा आ रहा है।

अब मैने उसे टेबल के साहरे खड़ा कर दिया था वह मुझे कहने लगी संजीव मेरी चूत से बहुत ज्यादा खून निकल रहा है और मुझे यह भी डर है कि कहीं मैं प्रेग्नेंट हो गई। मैंने उसे कहा अगर तुम प्रेग्नेंट हो जाओगी तो मैं तुमसे शादी कर लूंगा और तुम उसकी बिल्कुल भी चिंता मत करो। अब वह पूरी तरीके से जोश मे आ गई वह मेरे साथ सेक्स का भरपूर मजा लेने लगी थी। वह जब अपनी चूतड़ों को मुझसे टकराती तो मैं भी अपने लंड को उसकी योनि के अंदर बाहर कर के अपनी गर्मी को शांत करने की कोशिश करता। मेरा लंड भी पूरी तरीके से छिल चुका था और मुझे भी दर्द महसूस होने लगा था लेकिन ममता की योनि से अभी भी खून बाहर निकल रहा था और उसकी चूत से खून इतना अधिक निकल रहा था कि मैंने उसे कहा मुझे लग रहा है ज्यादा देर तक मैं तुम्हारा साथ नहीं दे पाऊंगा। वह कुछ नहीं बोली अब वह मेरे साथ सेक्स के मज़े लेना चाहती थी और उसने मेरा साथ बड़े अच्छे से दिया। जब मैंने उसकी चूत के अंदर बाहर लंड को किया तो वह खुश हो गई और मुझे कहने लगी मुझे और भी ज्यादा मजा आने लगा है थोड़ी ही समय बाद मुझे एहसास हुआ कि मेरा वीर्य पतन होने वाला है और मैंने अपने लंड को बाहर निकालकर उसकी चूतड़ों पर अपने वीर्य का छिड़काव कर दिया जिस से कि वह बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी। उसके बाद हम दोनों ने अपने कपड़े पहन लिए और वह अपना काम करने लगी।

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