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चूतों के सागर में गोते लगाए

मै लखनऊ का रहने वाला हूं दिल्ली से ही मैंने अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी की थी और उसके बाद मैं दिल्ली में ही जॉब करने लगा। मैं जिस कॉलोनी में रहता था उसी कॉलोनी में मेरी मुलाकात संजना के साथ हुई संजना से धीरे-धीरे मेरी दोस्ती होने लगी थी और एक दिन संजना ने मुझे अपनी सहेली प्रतिभा से मिलवाया। प्रतिभा बहुत ही अच्छी लड़की थी प्रतिभा को नौकरी की जरूरत थी वह नौकरी की तलाश कर रही थी उसमें मैंने ही उसकी मदद की और वह अब मेरे ऑफिस में ही जॉब करने लगी। मुझे मेरे ऑफिस में जॉब करते हुए दो वर्ष हो चुके थे इसलिए मैं सबको अपने ऑफिस में जानता था जिस वजह से प्रतिभा को भी ऑफिस में किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं हुई। प्रतिभा एक दिन मेरे साथ ही घर लौट रही थी उस दिन मैंने ही उसे कहा था कि मैं तुम्हें तुम्हारे घर तक छोड़ देता हूं।

हम दोनों कार में बैठे हुए थे प्रतिभा ने उस दिन मुझे अपने पापा के बारे में बताया और कहने लगी कि पापा मुझे कभी जॉब करने नहीं देना चाहते थे लेकिन मम्मी ने जब इस बारे में पापा से बात की तब जाकर उन्होंने मुझे जॉब करने दी। मैंने प्रतिभा से कहा कि क्या तुम्हारे पापा इतने ज्यादा सख्त मिजाज है तो वह कहने लगी हां रजत पर मेरे पापा बहुत ही ज्यादा सख्त मिजाज हैं और वह मेरी बात कभी भी नहीं मानते वह चाहते हैं कि बस मेरी शादी हो जाए। मैंने प्रतिभा से कहा अभी तो तुम्हारे कॉलेज की पढ़ाई कुछ समय पहले ही तो पूरी हुई है वह मुझे कहने लगी कि हां रजत लेकिन मेरे पापा चाहते हैं कि मैं शादी कर लूं। प्रतिभा का घर आने वाला था मैंने उसे उसके घर के बाहर छोड़ा और वहां से मैं अपने घर चला आया, काफी दिन हो गए थे मैंने अपने पापा मम्मी से बात नहीं की थी तो सोचा कि अपने पापा मम्मी से मैं बात कर लूं और उस दिन मैंने उनसे फोन पर बात की। फोन पर उनसे मेरी उस दिन काफी देर तक बात हुई और फिर मैंने फोन रख दिया उसके बाद मुझे काफी भूख लग रही थी इसलिए मैंने बाहर से ही खाना मंगवा लिया। जिस कॉलोनी में मैं रहता हूं उसी कॉलोनी में एक छोटा सा होटल है वहीं से मैं खाना मंगा लिया करता हूं।

मेरा खाना आ चुका था और मैं खाना खाकर अपने बिस्तर पर लेटा ही था कि उस दिन मुझे संजना का फोन आ गया और संजना मुझसे कहने लगी कि रजत आजकल तुम कुछ ज्यादा ही बिजी हो गए हो तुम्हारे पास बिल्कुल समय ही नहीं है। मैंने उसे कहा कि नहीं संजना ऐसा तो नहीं है मैंने उससे कहा कि मैं तुम्हें परसों मिलता हूं परसों मेरे ऑफिस की छुट्टी है तो वह कहने लगी ठीक है तुम मुझे परसों मिलना। उसके बाद मैं संजना को मिला जब मैं संजना को मिला तो मैंने उससे पूछा कि तुम कैसी हो वह कहने लगी मैं तो ठीक हूं लेकिन तुम काफी दिनों से मिले नहीं थे तो सोचा तुमसे फोन पर बात कर लेती हूं। संजना और मैं उस दिन साथ में ही थे तो मैंने उसे कहा कि चलो आज कहीं घूम आते हैं तो संजना कहने लगी कि लेकिन हम लोग आज कहां जाएंगे। मैंने उसे कहा चलो हम लोग मूवी देख आते हैं और उस दिन हम लोग मूवी देखने के लिए चले गए। जब हम लोग मूवी देखने के लिए गए तो वहां से हम लोग शाम के वक्त घर लौटे संजना ने मुझसे प्रतिभा के बारे में पूछा और वह मुझे कहने लगी कि प्रतिभा तुम्हारी बहुत ही तारीफ करती है वह कहती है कि तुम बहुत ही अच्छे हो। मैंने उसे कहा कि हां प्रतिभा बहुत ही अच्छी लड़की है और उसने मुझे अपने पापा के बारे में बताया। संजना ने कहा कि उसके पापा बड़े ही सख्त मिजाज हैं जिस वजह से उन्होंने प्रतिभा के ऊपर ना जाने कितनी ही बंदिशें लगाई हुई है लेकिन उसके बावजूद भी प्रतिभा जॉब कर रही है यह उसके लिए काफी बड़ी बात है। हम लोग अपने घर लौट आए थे और मैंने संजना से कहा कि मैं तुमसे अगले रविवार को मिलता हूं तो वह कहने लगी ठीक है और फिर वह अपने घर चली गई। वह अपने घर जा चुकी थी और मैं घर वापस लौट चुका था संजना से मैं काफी दिनों बाद मिला उस दिन संजना मेरे घर पर आई हुई थी और हम दोनों साथ में बैठकर एक दूसरे से बात कर रहे थे। उस दिन ना जाने संजना को क्या हुआ कि वह मेरी तरफ अपनी प्यास भरी नजरों से देख रही थी और मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि वह मेरे साथ सेक्स संबंध बनाना चाहती है मैंने उस दिन संजना के होठों को अपने हाथों से छुआ तो वह मचलने होने लगी और उसकी उत्तेजना इतनी बढ़ने लगी मैंने उसे कहा मेरे अंदर की गर्मी बढ़ चुकी है तो वह मुझसे कुछ नहीं बोली वह चुपचाप मेरे सामने बिस्तर पर लेट चुकी थी।


अब तो जैसे मेरे लंड के लिए बेताब थी। मैंने संजना के बारे में ऐसा कभी भी नहीं सोचा था लेकिन उस दिन जब मैं उसके होठों को चूम रहा था तो मेरे मन में सिर्फ उसको चोदने का ख्याल आ रहा था और मैं अपने लंड को बाहर निकाल कर उसकी चूत में घुसाना चाहता था मैं बहुत ही ज्यादा गरम हो गया था। मैंने जैसे ही उसकी योनि पर अपने लंड को लगाया तो वह उत्तेजित होने लगी और मुझे कहने लगी तुम जल्दी से अपने लंड को चूत के अंदर डाल दो लेकिन उससे पहले मैं चाहता था कि वह मेरे मोटे लंड को अपने मुंह में ले और उसने अपने हाथों से मेरे लंड को हिलाना शुरू किया। अब मैंने भी उसे कहा कि तुम ऐसे ही हिलाती रहो काफी देर तक उसने अपनी मुट्ठी के बीच में मेरे लंड को बड़े ही अच्छे से हिलाया जब मेरी गर्मी पूरी तरीके से बढ़ने लगी तो मैंने उसे कहा मै तुम्हारी चूत के अंदर लंड डालना चाहता हूं वह बहुत ही ज्यादा बेताब थी। उसकी गर्मी बहुत अधिक बढ़ चुकी थी मै उसकी चूत के अंदर लंड को डालना चाहता था और मैंने ऐसा ही किया मैंने जैसे ही उसकी योनि पर अपने लंड को लगाया तो वह मचलने लगी उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी थी।

मैंने अपने लंड को उसकी चूत घुसा दिया मैंने जब अपने लंड को उसकी चूत में घुसाया तो वह जोर से चिल्लाई और कहने लगी मेरी चूत से खून निकलने लगा है परंतु मुझे तो मज़ा आने लगा था। मैं उसे अब बड़े ही तीव्र गति से धक्के देने लगा था मैं जिस तीव्र गति के उसे चोद रहा था उससे तो उसके अंदर की आग बढ़ती ही जा रही थी और मेरे अंदर की आग उसने और भी अधिक बढ़ा दी थी। मैंने उसके दोनों पैरों को आपस में मिला लिया था और उसे मैं बड़ी तेजी से चोद रहा था वह मेरा साथ अच्छे से दे रही थी और जिस प्रकार से वह मेरा साथ दे रही थी उससे तो मुझे यही लग रहा था कि मैं बस उसे चोदता ही जाऊं और उसकी इच्छा को मैं पूरा करता जाऊं आखिरकार मैंने उसकी चूत के अंदर अपने वीर्य को गिरा कर अपनी इच्छा तो पूरी कर ली थी लेकिन मुझे उसे दोबारा चोदना था और थोड़ी देर तक हम दोनों साथ में बैठे रहे कुछ देर बाद उसने मेरे लंड को अपने हाथों में लिया और मेरे लंड से मेरा वीर्य बाहर निकल रहा था। मैंने उसे कहा तुम मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर समा लो और उसने उसे मुंह के अंदर ले लिया और काफी देर तक वह मेरे लंड को चूसती रही। अब मेरा लंड कठोर हो चुका था वह बोली तुम जल्दी से मेरी चूत मार कर मेरी इच्छा को पूरा कर दो। मैंने उसकी इच्छा को पूरा करने का फैसला कर लिया था और जैसे ही मैंने उसकी चूत के अंदर लंड डाला तो वह कहने लगी मुझे दर्द हो रहा है लेकिन मैंने भी धीरे-धीरे उसकी योनि के अंदर लंड घुसाया और मेरा मोटा लंड उसकी योनि के अंदर तक चला ही गया। जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो वह जोर से चिल्ला कर मुझे कहने लगी कि मेरी चूत से खून आने लगा है।

मैंने उसे कहा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है और अब मैंने उसकी कमर को कस कर पकड़ा हुआ था जिससे कि मेरा लंड उसकी योनि के अंदर बाहर बड़ी आसानी से हो रहा था उसकी चूतडे मुझसे टकराए जा रही थी। जब मैं उसे धक्के देता तो उसकी चूतडो से अलग की आवाज पैदा होती और वह मुझे कहती तुम और तेजी से मुझे धक्के मारो। मैंने संजना को कहा मैं तो तुम्हें और भी तेजी से धक्के मारना चाहता हूं संजना के मुंह से सिसकारियां निकल रही थी और वह सिसकिया लेते हुए मुझे कहने लगी मैंने कभी सोचा नहीं था कि तुम्हारे साथ सेक्स करूंगा लेकिन ना जाने आज तुम्हें देखकर मेरे मन में क्या हुआ और तुम्हारे साथ मेरा सेक्स करने का मन होने लगा। मैं तो संजना की बड़ी गांड की तरफ देख रहा था और उसे मैं चोदता जा रहा था मैं उसे जिस प्रकार से धक्के देता तो उसकी चूत से खून बहार निकल रहा था उसकी सिसकारियां भी बढ़ती जा रही थी। एक समय बाद मेरा वीर्य उसकी योनि के अंदर ही गिर गया उसके बाद हम दोनों ने अपने कपड़े पहन लिए।

वह मुझे कहने लगी मुझे आज बहुत ही अच्छा लगा और उसने मेरे गाल पर एक पप्पी दी और वह कहने लगी मैं दोबारा तुमसे मिलने के लिए आऊंगी और वह चली गई। अब प्रतीभा के साथ सेक्स करने का मुझे मौका मिल ही गया जब मैंने उसे अपने घर पर बुलाया तो उस दिन कहीं ना कहीं मेरे साथ सेक्स करना चाहती थी। मैंने उस दिन अपने लंड को प्रतिभा के सामने किया मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। उसने उसे हाथ में ले लिया वह शरमाते हुए कहने लगी और मैं तुम्हारे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लूं? मैंने उसे कहा क्यों नहीं और यह कहते ही उसने अपने मुंह के अंदर मेरे लंड को ले लो मुझे बड़ा ही अच्छा लगने लगा। कुछ देर तक उसने मेरे लंड को मुंह में लेकर उसे अच्छे से चूसा। उसके बाद मैंने उसकी चूत में लंड को सटाया उसकी चूत को मैंने अपने हाथ से थोड़ा सा खोला उसकी योनि मे मेरा लंड घुस गया 10 मिनट की चुदाई के बाद मेरा वीर्य उसकी चूत में गिर गया उसके बाद तो जैसे हम दोनों एक दूसरे के हो चुके थे।

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