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घर पर आने के लिए आखिर बोल ही दिया

मैं और आकाश मेरे घर पर ही थे आकाश मुझे कहने लगा कि सार्थक कल हम लोग कहीं मूवी देखने के लिए चलें तो मैंने आकाश को कहा ठीक है। हम दोनों अपना कॉलेज का प्रोजेक्ट कर रहे थे और हमारा कॉलेज का प्रोजेक्ट लगभग खत्म हो चुका था हम दोनों ने अगले दिन मूवी देखने का फैसला कर लिया। आकाश ने मुझे सुबह ही फोन कर दिया था और कहा कि तुम आ रहे हो ना, मैंने उसे कहा हां मैं आ रहा हूँ। मैं और आकाश उस दिन मूवी देखने के लिए गए और हम लोगों ने साथ में मूवी देखी मूवी खत्म हो जाने के बाद हम दोनों वापस लौट आए थे। हम लोग जब वापस लौटे तो उस वक्त शाम हो चुकी थी मैंने आकाश को कहा आकाश हम लोग अब घर चलते हैं तो वह कहने लगा ठीक है और हम दोनों ही घर लौट आए। जब हम लोग घर लौटे तो मैंने देखा उस दिन पापा घर जल्दी लौट आए थे और काफी परेशान नजर आ रहे थे तो मैंने पापा से कहा कि पापा आप कब आए तो उन्होंने मुझे बताया कि वह थोड़ी देर पहले ही आए। मैंने पापा से पूछा कि पापा आप काफी परेशान लग रहे हैं उन्होंने मुझे कहा कि सार्थक बेटा तुम जाने दो।

हम हॉल में ही बैठे हुए थे और फिर मैं अपने रूम में चला आया पापा और मम्मी आपस में बात कर रहे थे तो मुझे उन लोगों की बाते सुनाई दे रही थी। पापा और मम्मी एक दूसरे से बात कर रहे थे कि उन्होंने जो पैसे मेरे ताऊजी से लिए थे उसे अभी तक वह लौटा नहीं पाए हैं। पापा का बिजनेस कुछ समय से ठीक नहीं चल रहा था और वह अपने बिजनेस को लेकर बहुत ज्यादा परेशान थे लेकिन उसके बावजूद भी उन्होंने इस बारे में कभी किसी से बात नहीं की परन्तु उस दिन वह बहुत ज्यादा परेशान थे। रात के वक्त हम लोगों ने डिनर किया लेकिन पापा की यह परेशानी मुझसे देखी नहीं जा रही थी तो मैंने पापा से कहा कि पापा परेशान मत होइए जरूर कोई ना कोई रास्ता निकल आएगा। उन्होंने मुझे कहा सार्थक बेटा तुम तो जानते ही हो कि कुछ समय से मेरा बिजनेस में लगातार नुकसान होता जा रहा है और काम भी बिल्कुल ठीक नहीं चल रहा जिस वजह से मैं बहुत ज्यादा परेशान हो चुका हूं।

मैंने उन्हें कहा पापा आप बस अपने आप पर भरोसा रखिये सब कुछ ठीक हो जाएगा वह मुझे कहने लगे कि सार्थक बेटा तुम बहुत ही समझदार हो और मुझे तुमसे बहुत ही उम्मीदें हैं। पापा को मुझसे बहुत उम्मीद थी इसलिए वह मुझसे अक्सर कहते कि बेटा मैं चाहता हूं कि तुम अपने जीवन में कुछ अच्छा करो। मैंने पापा से कहा पापा मैं आपकी उम्मीदों पर खरा उतरूंगा। थोड़े समय बाद तो पापा ने ताऊजी के पैसे लौटा दिए थे लेकिन फिर भी वह परेशानी में रहते थे और इसी के चलते उन्हें अब कई प्रकार की समस्याएं भी होने लगी थी। एक दिन मैं घर लौटा तो उस दिन पापा की तबीयत बहुत ज्यादा खराब थी तो मां ने कहा कि सार्थक बेटा तुम अपने पापा को डॉक्टर के पास लेकर चले जाओ मैंने मम्मी से कहा ठीक है। मैं उस दिन पापा को डॉक्टर के पास ले गया, पापा को मैं डॉक्टर के पास ले गया और उसके बाद मैं उन्हें वापस ले आया था। पापा काफी परेशान होने लगे थे लेकिन मैंने उन्हें कहा कि आप परेशान मत होये सब कुछ ठीक हो जाएगा। धीरे धीरे पापा की तबीयत में भी सुधार होने लगा था और वह ठीक होने लगे थे। एक दिन मैं अपने कॉलेज से वापस लौट रहा था तो उस दिन हमारे घर पर मेरे मामा जी आए हुए थे मामा जी का भी बड़ा कारोबार है और वह काफी समय बाद हमारे घर आए थे। उस दिन हम सब लोग साथ में बैठे हुए थे और डिनर कर रहे थे तो मामा जी ने मम्मी से कहा कि यदि कुछ मदद की आवश्यकता हो तो तुम मुझे बता देना लेकिन पापा ने साफ तौर पर मना कर दिया। पापा बहुत ही स्वाभिमानी किस्म के हैं और वह चाहते हैं कि वह खुद ही अपनी मेहनत से सब कुछ ठीक कर दें लेकिन यह इतना आसान होने वाला नहीं था। उस वक्त रात को जब पापा अपने कमरे में आराम कर रहे थे तो मम्मी और मामा आपस में बात कर रहे थे मैं भी वहीं बैठा हुआ था मामा ने मम्मी को एक चेक पकड़ाते हुए कहा कि मेरी तरफ से यह कुछ पैसे हैं पहले तो मम्मी ने मना किया लेकिन मामा जी ने उन्हें कहा कि हमारा भी तुम्हें लेकर कुछ फर्ज बनता है और मामा ने मम्मी को वह चेक दे दिया। थोड़े समय बाद मेरे कॉलेज की पढ़ाई भी पूरी हो चुकी थी और फिर मैं नौकरी की तलाश में था शायद मेरी किस्मत अच्छी थी कि मुझे एक अच्छी कंपनी में नौकरी मिल गई और मैं वहां पर जॉब करने लगा। मेरी जॉब अच्छे से चल रही थी और घर में भी अब सब कुछ ठीक होने लगा था पापा का बिजनेस भी दोबारा से ठीक चलने लगा था।


मैं जिस कंपनी में नौकरी करता था वहां पर भी मेरी सैलरी काफी अच्छी थी घर में सब कुछ ठीक होने लगा था और पापा भी अब काफी खुश रहने लगे थे। एक दिन पापा और मैं साथ में बैठे हुए थे और उस दिन हम लोग आपस में बात कर रहे थे तो पापा ने मुझे कहा कि सार्थक बेटा सब कुछ ठीक हो चुका है तो अब हम लोगों को फैमिली टूर पर कहीं जाना चाहिए मैंने पापा से कहा हां क्यों नहीं। हम लोग कहीं फैमिली टूर पर जाना चाहते थे मैंने ही शिमला की टिकट बुक करवा ली थी और शिमला हम सब लोग साथ में गए तो मुझे भी काफी अच्छा लगा काफी समय बाद मैं पापा मम्मी के साथ कहीं गया था। शिमला में करीब हम लोग एक हफ्ते तक रुके एक हफ्ते तक हम लोगों ने काफी इंजॉय किया उसके बाद हम लोग वापस दिल्ली लौट आए थे। उसके बाद मैं अपने ऑफिस जाने लगा था पापा भी अपने बिजनेस पर पूरी तरीके से ध्यान दे रहे थे और सब कुछ ठीक चल रहा था।
दिल्ली लौटने के बाद एक दिन मेरे दोस्त की बहन कावेरी मुझे मिलती है और कावेरी के साथ मैं बातें करने लगा। कावेरी ने अपने डिवोर्स के बारे मे मुझे बताया। उसका डिवोर्स हो चुका था अब हम दोनों फोन पर एक दूसरे से बातें करने लगे थे हम दोनों की फोन पर काफी बातें होने लगी थी कावेरी का अपने परिवार से कोई मतलब नहीं था इसलिए वह मुझसे बात किया करती वह अकेली ही रहती थी। एक दिन हम दोनों के बीच फोन सेक्स हुआ उस दिन जब हम दोनों के बीच फोन सेक्स हुआ तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था उससे मैं अच्छे से बात करने लगा था। उस दिन के बाद हम दोनों अक्सर फोन सेक्स करने लगे थे लेकिन अब मैं उसे सच में चोदना चाहता था मैंने उससे कहा मैं तुम्हारे पास आना चाहता हूं। उस दिन में घर पर ही था और मैं उस दिन कावेरी के पास चला गया था मै जब कावेरी के पास गया तो उससे मिलकर मुझे बहुत ही अच्छा लगा। वह मेरे लिए चाय बनाकर ले आई। हम दोनो साथ मे बैठे थे मैंने उसकी जांघ को सहलाना शुरू किया वह पूरी तरीके से गर्म होने लगी अब मैं भी पूरी तरीके से गर्म हो चुका था मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं उसके होठों को चूम रहा था। मै कावेरी के बदन को भी मैं महसूस करने लगा मैं उसके स्तनों को बड़े अच्छे से दबाने लगा मुझे बहुत ज्यादा मज़ा आने लगा था। जब मैं उसके स्तनों को अपने हाथों से दबाता तो वह उत्तेजित हो जाती अब वह उत्तेजीत हो गई थी। मैंने उसके कपड़े उतारने शुरू किए मैं उसके गोरे बदन को सहलाने लगा। मैंने जब कावेरी के स्तनों को अपने मुंह में लेकर उनक रसपान शुरू किया तो उसके निप्पलो को मैं जिस प्रकार से चूस रहा था उससे मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। मैने उसकी चूत पर उंगली लगाई मैंने कावेरी की चूत को चाटना शुरू किया तो मुझे मजा आने लगा उसकी चूत को चाटकर मेरे अंदर की गर्मी बढ़ने लगी थी। कावेरी ने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर उसे अच्छे से चूसा।

वह मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसती तो मुझे बड़ा ही मजा आता। उसने 2 मिनट तक मेरे लंड को चूसा मैने उसके अंदर की आग पूरे तरीके से बढ़ा दी थी। मैंने उसे कहा मैं अब तुम्हारी चूत के अंदर अपने लंड को डाल रहा हूं। मैने उसके पैरो को खोला और मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर सटाया अब मैने अपने लंड को अंदर की तरफ डालना शुरू किया जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत के अंदर की तरफ जाने लगा तो मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा। मेरे अंदर की गर्मी अब बढ़ने लगी थी मुझे मजा आने लगा था। मैने उसको और तेजी से चोदना शुरु किया मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया था। जब मैंने ऐसा किया तो मुझे मजा आने लगा। मैं उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को बड़ी आसानी से कर रहा था मैंने बहुत देर तक उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को किया जिस से मुझे मजा आने लगा। वह मुझे कहने लगी मेरे अंदर कि गर्मी बढती जा रही है।

मैंने उसको कहा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है तुम ऐसे ही मेरा साथ देती रहो वह मेरा साथ बड़े अच्छे से दे रही थी। वह सिसकारिया ले रही थी और उसने मेरे बदन को पूरी तरीके से गर्म कर दिया था मेरा माल जल्दी ही बाहर आने को था। मैने कावेरी की चूत के अंदर माल को गिरा दिया था। मैंने उसकी चूतडो को मेरी तरफ किया तो अब मैने उसकी चूत पर अपने लंड को सटाया तो वह बोली डालो ना अंदर मै तडप रही हूं मैने लंड को घुसाते ही उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करने लगा तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। मैने कावेरी की चूत का मजा लेकर उसको पूरी तरीके से गर्म कर दिया था मैंने उसको अच्छे से चोदा वह भी मुझसे अपनी चूतड़ों को मिलाती तो उसे भी मजा आता। 10 मिनट की चुदाई के बाद मैंने अपने माल को उसकी चूत के अंदर गिराया।

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