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भाभी का गजब अंदाज

मेरे दोस्त ने मुझे घर तक छोड़ा और उसके बाद मैं जब घर के अंदर आया तो मैंने देखा मां काफी ज्यादा परेशान थी। मैंने मां से परेशानी का कारण पूछा तो मां ने मुझे कुछ भी नहीं बताया लेकिन मुझे भी एहसास होने लगा था कि मां शायद मेरी वजह से ही परेशान रहती हैं क्योंकि पिताजी के बिजनेस के नुकसान के चलते घर की आर्थिक स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही थी और घर में कोई कमाने वाला भी नहीं था इसलिए मुझे यह कदम उठाना पड़ा और मैं नौकरी की तलाश में भटकने लगा। जब मुझे नौकरी मिली तो मैं काफी खुश हुआ और मैं अब अपनी पूरी मेहनत के साथ काम करने लगा मुझे जो भी पैसे मिलते उसमें से मैं आधे पैसे घर में मां को दे दिया करता मां ही घर का सारा खर्चा देखा करती। अब सब कुछ ठीक होने लगा था घर में मां और पापा के बीच में भी इस बात को लेकर बहुत झगड़े होते थे कि पापा कुछ करते नहीं है क्योंकि पापा अपने बिजनेस के नुकसान के बाद से काफी टूट चुके थे और वह घर पर ही रहते थे मां को इस बात की चिंता बहुत ज्यादा रहती थी परंतु मां कभी किसी से कुछ नहीं कहती।

एक दिन मां ने मुझे कहा बेटा क्या तुम कुछ दिनों के लिए अपनी भाभी के घर चले जाओगे मैंने मां से कहा लेकिन मां भाभी के घर मुझे क्यों जाना है। मां कहने लगी कि बेटा तुम्हारी भाभी के पड़ोस में कुछ दिनों से बहुत चोरियां हो रही हैं और तुम्हारे भाभी के पति भी घर पर नहीं है जिस वजह से भाभी चाहती थी कि तुम उनके घर कुछ दिनों के लिए चले जाओ। मैं अपनी भाभी के घर चला गया मैं जब उनके घर पर गया तो भाभी ने मुझसे मेरी मां के बारे में पूछा मैंने उन्हें बताया मां तो ठीक है। मैंने जब भाभी को पूछा कि क्या यहां पर आजकल चोरियां हो रही है तो वह मुझे कहने लगे कि हां यहां पर कुछ दिनों से बहुत चोरियां हो रही हैं जिस वजह से मैंने कहा था कि तुम्हें कुछ दिनों के लिए मेरे घर पर भेज दे। मैंने भाभी को कहा भाभी भैया जी वापस कब लौटेंगे तो वह मुझे कहने लगी उन्हें लौटने में तो थोड़ा समय लगेगा।

मैं कुछ दिन भाभी के घर पर ही था वहां जब मेरी मुलाकात सोहन से हुई तो सोहन से मेरी बहुत अच्छी दोस्ती होने लगी कुछ समय बाद मैं अपने घर वापस चला आया लेकिन सोहन से अभी भी मेरी बात होती रहती थी। एक दिन सोहन ने मुझे अपने घर पर बुलाया और कहा कि आज घर पर कोई भी नहीं है हम दोनों को बहुत अच्छा मौका मिल गया था और हम लोगों ने उस दिन घर में जमकर पार्टी की और उसके बाद मैं अगले दिन अपने घर चला आया। सोहन और मेरी बात अक्सर फोन पर होती रहती थी लेकिन काफी समय से सोहन से मेरी मुलाकात नहीं हुई थी क्योंकि मैं कुछ दिनों के लिए अपने ऑफिस के काम के सिलसिले में बेंगलुरु गया हुआ था। मुझे करीब एक महीने तक बेंगलुरु में ही रहना था इस एक महीने में मैं काफी अकेला महसूस कर रहा था मैं बेंगलुरु में किसी को भी तो नहीं जानता था। जिस होटल में मैं रुका था वहां पर मेरी बातचीत होटल के कर्मचारियों से अच्छी होने लगी थी होटल के कर्मचारियों से मेरी अच्छी बातचीत होने लगी थी और मैनेजर के साथ भी मेरी बहुत अच्छी दोस्ती हो गई थी। एक दिन मैनेजर ने मुझे कहा कि क्या आप ड्रिंक करते हैं तो मैंने उन्हें कहा कि हां क्यों नहीं और उस दिन हम दोनों ने साथ में ड्रिंक की मैनेजर के साथ मेरी काफी अच्छी दोस्ती हो चुकी थी। एक महीने का मुझे पता ही नहीं चला कब एक महीना बीत गया और मैं अब घर वापस लौट चुका था मैं जब घर आया तो मैं काफी ज्यादा थका हुआ था मैंने अपनी मां से कहा कि मैं काफी थका हुआ हूं इसलिए आज मुझे आराम करने दो। मैं आराम करने लगा जब शाम के वक्त मैं उठा तो मां ने मुझे कहा कि सोहन बेटा घर में सामान खत्म हो चुका है तो क्या तुम मेरे साथ राशन ले आओगे। मैंने मां को कहा हां क्यों नहीं मैं अब मां के साथ राशन लेने के लिए चला गया शाम के वक्त मैं जब राशन लेने के लिए गया तो मैं और मां राशन ले आए थे।

पापा घर पर ही थे पापा की कुछ दिनों से तबीयत ठीक नहीं थी तो पापा को भी मुझे अस्पताल लेकर जाना था मैंने पापा से कहा कि क्या आप की तबीयत ठीक नहीं है तो वह कहने लगे कि बेटा कुछ दिनों से मुझे काफी बुखार आ रहा है मैंने डॉक्टर को दिखाया था लेकिन फिर भी मुझे आराम नहीं मिला। मैंने पापा से कहा कि कोई बात नहीं कल मैं आपको डॉक्टर के पास ले चलूंगा अगले दिन भी मेरी ऑफिस की छुट्टी थी इसलिए मैं उन्हें डॉक्टर के पास ले गया। जब मैं उन्हें वापस लेकर आया तो वह मुझे कहने लगे कि बेटा जब से तुमने काम संभाला है तबसे घर में काफी खुशियां आ चुकी हैं मैंने पापा से कहा देखिए पापा आपने भी काफी वर्षों तक बहुत मेहनत की लेकिन अब आपके बिज़नेस में नुकसान हो गया तो उसमें आपकी भी कोई गलती नहीं है। पापा कहने लगे कि बेटा लेकिन कई बार मुझे लगता है कि मुझे भी तुम्हारे लिए कुछ करना चाहिए था मैंने पापा से कहा पापा आपने दीदी की भी तो शादी करवाई थी दीदी की शादी में भी आपने काफी खर्चा किया था और दीदी की शादी बहुत धूमधाम से हुई थी। पापा इस बात के लिए बहुत दुखी थे कि वह मेरे लिए कुछ कर नहीं पाए परंतु मैंने कहा कि पापा अब आप इस बात को भूल जाइए और आप अपनी तबीयत पर ध्यान दीजिए।

मैं अब हर रोज की तरह सुबह ऑफिस जाता और शाम को घर वापस लौट आता एक दिन सोहन का मुझे फोन आया सोहन मुझे कहने लगा कि प्रदीप तुम काफी दिनों से मुझे मिले नहीं हो। मैंने सोहन को कहा मैं तुमसे मिलने के लिए अगले हफ्ते आऊंगा सोहन कहने लगा ठीक है अगले हफ्ते वैसे भी पापा और मम्मी घर पर नहीं है तो तुम अगले हफ्ते घर पर आ जाना। सोहन के पापा मम्मी किसी शादी में जाने वाले थे इसलिए मैं जब अगले हफ्ते सोहन के घर पर गया तो वह लोग घर पर नहीं थे सोहन और मैं उस दिन बैठ कर बात कर रहे थे। मैंने सोहन को कहा तुमसे मैं काफी दिनों बाद मिल रहा हूं तो सोहन मुझे कहने लगा हां प्रदीप तुम से मेरी काफी दिनों बाद मुलाकात हो रही है। हम दोनों एक दूसरे से हाल-चाल पूछ रहे थे तो सोहन ने मुझे बताया कि उसके परिवार वालों ने उसके लिए लड़की देखी है और जल्द ही वह सगाई करने वाला है। मैंने सोहन को कहा यह तो बहुत ही खुशी की बात है कि तुम्हारी सगाई होने वाली है सोहन मुझे कहने लगा लेकिन मैं अभी सगाई करना नहीं चाहता हूं। सोहन और मैं साथ में बैठ कर बात कर रहे थे उस वक्त रात के 9:00 बज रहे थे। मैंने देखा कि भाभी किसी के साथ आ रही है जब हम लोगों ने देखा कि उन्हें छोड़ने के लिए कोई लडका आया हैं। सोहन मुझे कहने लगा आजकल मैं तुम्हारी भाभी को उस लडक के साथ बहुत बार देख चुका हूं। मुझे तो भाभी पर पहले से ही शक था क्योंकि मुझे उनका चाल चलन कुछ ठीक नहीं लगता था। मैंने सोहन से कहा मैं अभी आता हूं। सोहन कहने लगा तुम कहां जा रहे हो? मैंने उसे कहा मैं भाभी से मिलकर आता हूं। वह कहने लगा ठीक है तुम आ जाओ मैं घर मे ही हूं और तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं। मैं भाभी से मिलने के लिए चला गया मैं जब उनसे मिलने के लिए गया तो वह घर के अंदर ही थी। उन्होंने दरवाजा खोला उन्होने नाइटी पहनी हुई थी। उन्होंने मुझे देखा तो एकदम से वह घबरा गई और मुझे कहने लगी प्रदीप तुम इस वक्त कहां से आ रहे हो?

मैंने उन्हें कहा भाभी बस ऐसे ही यहां से गुजर रहा था तो सोचा आप से मिलता हुआ चलू। उन्होने मुझे अंदर आने के लिए कहा जब उन्होंने मुझे अंदर आने के लिए कहा तो मैं उनके साथ बैठ गया उसके बाद मैंने उनसे बात की मैं जानना चाहता था कि वह लडक कौन था। उन्होंने मुझे उस दिन सब कुछ सच बता दिया मैं यह सुनकर उनकी चूत मारने के लिए बेताब हो चुका था। मैंने उन्हें अपनी बाहों में ले लिया उनके ना जाने कितने लोगों के साथ नाजायज संबंध थे मेरे लिए तो बड़ा ही अच्छा मौका था। मैंने उनके स्तनों को दबाना शुरू किया जब मैंने उनके स्तनों को अपने मुंह के अंदर ले लिया तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा। उन्होंने भी मेरे मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर लेकर बहुत देर तक सकिंग किया जिससे कि उनके अंदर कि गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी कि वह मुझे कहने लगी मै अब रह नहीं पाऊंगी। मैंने भी उनके बदन से उनके कपड़े उतार दिए उनकी चूत के अंदर लंड घुसा दिया। मेरा लंड उनकी चूत के अंदर बाहर हो रहा था मेरा लंड जब उनकी चूत के अंदर बाहर होता तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। उन्होंने भी मेरा पूरा साथ दिया उन्होने अपने पैरों को खोल लिया। जब वह सिसकियां ले रही थी उससे मुझे और भी ज्यादा मजा आ रहा था मैं बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो गया था।

मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में चोदना शुरु किया जिससे कि वह मुझसे अपनी चूतडो को मिलाए जा रही थी मुझे भी उन्हें धक्के मारने में बहुत मजा आ रहा था। जिस प्रकार से वह मेरा साथ दे रही थी और अपनी चूतड़ों को मुझसे मिला रही थी उससे मेरे अंदर की गर्मी और भी अधिक हो रही थी। मैं उन्हें काफी देर तक ऐसे ही धक्के मारता रहा। भाभी कहने लगी प्रदीप तुम तो बड़े अच्छे से मेरी चूत मार रहे हो मुझे पता होता तो मैं तुमसे कब की अपनी चूत मरवा लेती। मैंने उन्हें कहा भाभी आपके साथ मुझे आज सेक्स करने मे मजा आ रहा है। वह मेरा साथ बड़े अच्छे से दे रही हैं मैंने उनकी चूत बड़े अच्छे से मारी फिर उनकी गांड देखकर मैं उनकी गांड मारने के लिए उत्सुक हो गया। मैंने अपने लंड पर थूक लगाते हुए उनकी गांड मे लंड डाला तो वह बड़ी जोर से चिल्लाई मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। मैंने उनका साथ बड़े अच्छे से दिया मैंने उनका साथ इतने अच्छे से दिया कि उन्होंने मेरी इच्छा को पूरा कर दिया और उनकी गांड पूरी तरीके से छिल चुकी थी लेकिन मुझे उनकी गांड मारने में बहुत मजा आया। उसके बाद मै सोहन के घर लौट आया लेकिन अभी भी भाभी के साथ मेरे संबंध है और मैं उनके साथ सेक्स के मज़े लिया करता हूं।

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