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दोनो के बदन की गर्मी

मैं एमबीए की पढ़ाई कर रहा था उसी दौरान मेरे नैन सुनीता से मिलने लगे सुनीता और मैं दोनों ही अच्छे परिवार से थे सुनीता और मेरे बीच अच्छी दोस्ती भी हो गई और हम दोनों एक दूसरे के साथ कॉलेज में अच्छा समय बिताया करते। थोड़े ही समय बाद हमारा कॉलेज पूरा हो चुका था और मैं अपने पापा के बिजनेस को संभालने लगा पापा के बिजनेस को संभालने के दौरान मैं इतना बिजी हो गया कि मुझे अपने लिए भी समय नहीं मिल पाता था सुनीता का ख्याल भी मेरे दिमाग से निकल चुका था। सुनीता से मेरी मुलाकात काफी वर्षों बाद हुई जब मैं सुनीता से मिला तो सुनीता की शादी हो चुकी थी सुनीता मुझसे कहने लगी कि मेरी शादी को एक वर्ष हो चुका है। मुझे पता ही नहीं चला कि कब मेरा कॉलेज खत्म होने के बाद 5 वर्ष इतनी जल्दी निकल गए सब कुछ इतनी तेजी से निकला की मैं अपने कई दोस्तों से मिल भी नहीं पाया था। मैंने और सुनीता ने एक गेट टूगेदर पार्टी रखने का फैसला किया क्योंकि सुनीता और मैं चाहते थे कि सब लोग दोबारा मिले।

इतने वर्षों बाद जब हम सब लोग मिले तो मुझे बहुत ही खुशी हुई क्योंकि मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि सब लोग एक साथ इतने वर्षों बाद मिलेंगे मैं बहुत ही खुश था। मेरे जितने भी दोस्त मुझे मिले सब के चेहरे पर मुस्कुराहट और खुशी थी, मैं सुनीता की तरफ़ बार-बार देखे जा रहा था मैं सोच रहा था कि क्या मैं सुनीता से अभी भी प्यार करता हूं। मैं इसी कशमकश में था लेकिन मुझे कुछ समझ नहीं आया परंतु अब सुनीता की शादी हो चुकी थी और सुनीता ने मुझे अपने पति से भी मिलवाया तो मुझे सुनीता के पति से मिलकर अच्छा लगा। सुनीता के पति से मिलना मेरे लिए बहुत ही अच्छा था मैंने जब सुनीता को कहा कि कभी तुम मेरे घर पर डिनर के लिए अपने पति को लेकर आओ तो वह कहने लगी कि अमित मैं देखती हूं मैं तुम्हें इस बारे में कह तो नहीं सकती लेकिन मैं कोशिश करूंगी। सुनीता के पति भी एक अच्छे विचार धारा के हैं और सुनीता अपनी शादीशुदा जिंदगी से बहुत खुश है। मेरे जीवन के इतने वर्ष पता नहीं कैसे निकले कुछ मालूम ही नहीं चल पाया लेकिन अब सब कुछ ठीक चल रहा था हमारे ही ऑफिस में काम करने वाली मेघा को मैं पसंद करने लगा था।

मेघा को जब मैंने पहली बार अपने साथ डिनर के लिए इनवाइट किया तो मेघा अनकंफरटेबल हो रही थी परंतु जब मेघा मुझसे मिली और मुझसे उसकी बात हुई तो वह मुझसे खुलकर बात करने लगी थी। मेघा को मेरे साथ अच्छा लगता था इसीलिए तो मेघा मुझसे खुलकर बात कर रही थी मेघा का साथ मुझे अच्छा लगता था और हम दोनों अक्सर एक-दूसरे से मिला करते थे। मैंने मेघा को कहा कि क्या हम लोग कहीं घूमने का प्लान बनाएं तो मेघा कहने लगी कि हां अमित मैं काफी समय से सोच रही थी कि हम लोगों को कहीं घूमने के लिए जाना चाहिए। मेघा और मेरे बीच में अब रिलेशन हो चुका था मैंने जब यह बात सुनीता को बताई तो सुनीता मुझे कहने लगी कि अच्छा तो तुमने अपने दिल की बात मेघा से कह दी। मैंने सुनीता को कहा मैंने अपने दिल की बात मेघा को बता दी और मेघा भी मुझे पसंद करती है सुनीता मुझसे कहने लगी कि आगे तुम दोनों ने क्या सोचा है। मैंने सुनीता को कहा आगे तो मैंने ऐसा कुछ नहीं सोचा है लेकिन फिलहाल तो हम लोग घूमने का प्लान बना रहे हैं सुनीता मुझे कहने लगी कि तुम लोग घूमने के लिए कहां जा रहे हो। मैंने सुनीता को कहा कि हम लोग घूमने के लिए शिलांग जा रहे हैं जब मैंने सुनीता को कहा कि हम लोग शिलांग जा रहे हैं तो सुनीता मुझे कहने लगी कि मैं आज ही अपने पति से बात करती हूं मैं भी तुम लोगों के साथ आना चाहती हूं। मैंने सुनीता से कहा यदि तुम भी हमारे साथ चलोगी तो हमें भी अच्छा लगेगा हम लोग अब शिलांग जाने की तैयारी करने लगे लेकिन मुझे मालूम नहीं था कि सुनीता और उसके पति भी हमारे साथ आने के लिए राजी हो जाएंगे वह दोनों ही हम लोगों के साथ आने के लिए तैयार हो गए। हम लोग जब शिलांग पहुंचे तो वहां का दिलकश नजारा देखकर सब लोग खुश हो गए सुनीता मुझे कहने लगी कि अमित यदि तुम मुझे नहीं बताते की तुम शिलांग जा रहे हो तो मैं तुम्हें कभी माफ नहीं करती।

मैंने सुनीता को कहा तुम ऐसा क्यों कह रही हो सुनीता मुझे कहने लगी कि तुम्हें मालूम है शिलांग मुझे कितना पसंद है मैं बचपन से ही सोचा करती थी कि मैं शिलांग घूमने के लिए जाऊं लेकिन कभी भी मैं शिलांग घूमने जा नहीं पाई लेकिन तुम्हारी बदौलत कम से कम मुझे शिलांग आने का मौका तो मिला। मैंने सुनीता को कहा तो फिर तुम पर मेरा अब यह एहसान रहा है इस एहसान को तुम्हें उतारना पड़ेगा सुनीता मुझे कहने लगी कि हां जरूर जब भी तुम कहोगे तो मैं तुम्हारे एहसान को जरूर उतार दूंगी। हम चारों ही होटल के लॉन में बैठे हुए थे और हम इस बात पर हंसने लगे सुनीता के पति भी बहुत अच्छे हैं और उनके साथ मेरी अच्छी बनने लगी थी वह मुझे कहने लगे कि सुनीता तुम्हारी बहुत तारीफ करती है। मैंने उनसे कहा सुनीता भी तो बहुत अच्छी है आप बहुत खुशनसीब हैं जो आपको सुनीता जैसी अच्छी पत्नी मिली वह कहने लगे कि हां यह बात तो तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो सुनीता जैसी पत्नी मिलने से मेरा जीवन और भी ज्यादा संवर चुका है।

मेघा के साथ मैं शिलांग जा कर खुश था और उसके साथ मुझे समय बिताना अच्छा लग रहा था काफी समय बाद मैं अपने काम से समय निकालकर कहीं घूमने के लिए जा पाया था इस बात से मैं बहुत खुश था। जब मैं सुनीता के साथ मजाक करता तो यह बात मेघा को अच्छी नहीं लगती। मेघा मुझे कहने लगी तुम कुछ ज्यादा ही सुनीता के करीब जा रहे हो। मैंने मेघा को समझाया और कहा ऐसा कुछ भी नहीं है तुम गलत मतलब निकाल रही हो। मेघा कहने लगी मैं कुछ गलत मतलब नहीं निकाल रही हूं तुम दोनों के बीच कुछ गलत चल रहा है इसीलिए तो मैंने तुम्हें कहा तुम उससे कुछ ज्यादा ही मुस्करा कर बात कर रहे हो। मुझे नहीं मालूम था कि सुनीता के नंगे बदन को जब मैं देख लूंगा तो मैं अपने आप को रोक नहीं पाऊंगा। उसका गदराया हुआ बदन देखकर मैं अपने आप को रोक ना सका मैंने सुनीता को किस कर लिया। मैंने जब सुनीता को किस किया तो वह उत्तेजित हो गई वह मेरे लंड को दबाने लगी मैं भी उसके स्तनों को दबा रहा था मुझे उसके स्तनों को दबाने में मजा आ रहा था। वह जिस प्रकार से मेरे लंड को अपने हाथों से दबा रही थी उस से मै बहुत ही ज्यादा उत्तेजित होने लगा था और काफी देर तक मैंने उसके स्तनों को दबाया। उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया वह मेरे लंड को मुंह के अंदर ले रही थी मुझे बहुत मजा आ रहा था। उसने काफी मिनटो तक मेरे मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर समा कर रखा। जब वह ऐसा कर रही थी तो मेघा ने हम दोनों को देख लिया मैंने मेघा के होंठों को चूमना शुरू किया तो उसे भी अच्छा लगने लगा। मैंने मेघा के बदन से कपड़े उतारकर उसे भी नंगा कर दिया मेरे दोनों हाथों में लडडू थे। मैंने मेघा की चूत को कुछ देर तक चाटा तो सुनीता ने भी मेरे लंड को अपने मुंह मे लेकर चूसा। सुनीता के अंदर की गर्मी को मैंने पूरा बढ़ा दिया था उसका टेंपरेचर अब हाई हो चुका था। मेघा भी अपने आपको रोक नहीं पा रही थी और ना ही सुनीता अपने आप को रोक पा रही थी। मैंने जैसे ही मेघा की चूत के अंदर लंड को घुसाया तो मेघा चिल्लाने लगी। मेघा के मुंह से चीख निकाल पडी मुझे मालूम नहीं था कि वह एकदम सील पैक माल है।

मेघा को मुझे चोदने में मजा आ रहा था मैने मेघा के दोनों पैरों को खोल लिया था मैं उसे जिस प्रकार से धक्के मारता उसने अपने दोनों पैरों के बीच में मुझे जकड कर रख लिया था। मैं उसे लगातार तेज धक्के मार रहा था उसकी चूत से पानी कुछ ज्यादा ही बाहर निकलने लगा था और खून भी निकल रहा था वह बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई थी। मेघा अपने आप को रोक नही पा रही थी और ना ही मैं अपने आप को रोक पा रहा था मुझे बड़ा मजा आ रहा था। ऐसे ही में धक्के मारता रहा जैसे ही मेरा वीर्य गिरा तो मुझे बहुत अच्छा लगा। सुनीता ने मेरे आगे अपनी चूतड़ों को कर दिया सुनीता की चूतडो को मैने कस कर पकड़ लिया मेघा एक तरफ लेटी हुई थी उसकी चूत से वीर्य निकल रहा था। जैसे ही मैंने सुनीता की चूत के अंदर अपने लंड को घुसाया तो वह चिल्लाने लगी उसकी चूत से पानी निकल रहा था मैंने कस कर उसकी चूतड़ों को पकड़ा हुआ था और मैं लगातार तेजी से उसे धक्के मार रहा था।

मुझे उसे धक्के मारने में मजा आता सुनीता को भी मुझसे अपनी चूतडो को मिलाने मे मजा आता वह अपने मुंह से सिसकियां ले रही थी। उसकी सिसकियो से मुझे बहुत आनंद आ रहा था सुनीता की चूत से कुछ ज्यादा ही पानी निकलने लगा। मैंने सुनीता को कहा मेरा वीर्य निकलने वाला है तो वह कहने लगी कोई बात नहीं तुम अंदर ही गिरा देना। मैं लगातार तेजी से उसे धक्के मार रहा था मुझे उसे धक्के मारने में मजा आता मेरे अंदर की गर्मी को उसने बढा कर रख दिया था। मैंने अपने वीर्य को उसकी योनि मे गिराया तो मेरा वीर्य उसकी योनि के अंदर गिर चुका था। मैं मेघा के साथ लेटा हुआ था सुनीता के पति का भी कुछ पता नहीं था ना जाने वह कहां थे। मैंने सुनीता को कहा तुम्हारे पति कहां है? वह कहने लगी पता नहीं वह कहां चले गए कुछ देर बाद आते ही होंगे। हम तीनों साथ में लेटे हुए हैं मुझे मेघा और सुनीता दोनों के साथ ही शारीरिक संबंध बनाने का मौका मिल पाया मैं बहुत खुश था। मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि उन दोनों को मै अपना बना लूंगा लेकिन उन दोनों ने मुझे अपने बदन की गर्मी से नहला दिया था।

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