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मेरा माल बाहर खीच लिया

हम लोग संयुक्त परिवार में रहते हैं हम लोग लखनऊ में रहते हैं। मैं उस दिन अपने चचेरे भाई रोहन के साथ बैठा हुआ था वह मुझसे उम्र में दो वर्ष छोटा है लेकिन हम दोनों की काफी अच्छी बनती है। रोहन और मैं एक दूसरे से बात कर रहे थे कि तभी भैया कमरे में आये और वह हम दोनों से कहने लगे कि तुम दोनों यहां क्या कर रहे हो। मैंने भैया से कहा कि भैया कुछ नहीं बस ऐसे ही बैठ कर बात कर रहे थे तो भैया कहने लगे कि तुम्हें पापा कब से ढूंढ रहे थे उन्हें तुमसे कुछ जरूरी काम है। मैंने भैया से कहा भैया अभी जाता हूं मैंने रोहन को कहा चलो रोहन हम लोग चलते हैं रोहन और मैं पापा के पास चले गए। जब हम लोग पापा के पास गए तो वह कहने लगे कि बेटा मैं तुम लोगों को कब से ढूंढ रहा हूं ना तो तुम्हारा फोन लग रहा है और ना ही रोहन का फोन लग रहा था। मैंने पापा से कहा पापा कहिए आपको क्या काम था तो पापा मुझे कहने लगे कि बेटा क्या तुम मुझे गुप्ता जी के घर छोड़ दोगे। मैंने पापा से कहा ठीक है हम अभी आपको गुप्ता जी के घर छोड़ देते हैं।

पापा ज्यादातर हम लोगों के साथ ही घुलमिल कर रहे थे भैया के साथ वह कम ही बातें करते थे और उस दिन मैंने और रोहन ने अपने पापा को गुप्ता जी के घर छोड़ दिया उसके बाद हम लोग वहां से घूमने के लिए निकल गए। जब हम लोग उस दिन साथ में थे तो रोहन ने मुझे अपने क्लास में पढ़ने वाली एकता के बारे में बताया। मैंने रोहन को कहा कि क्या तुम एकता से प्यार करने लगे हो तो वह मुझे कहने लगा कि हां मुझे ऐसा ही लग रहा है एकता और मेरे बीच काफी नजदीकियां बढ़ने लगी है। मैंने रोहन को कहा कि लेकिन रोहन तुम सोच समझकर उससे बात करना रोहन मुझे कहने लगा कि भला इसमें डरने की क्या बात है। मैंने रोहन को कहा कि देखो इसमें डरने की बात नहीं है लेकिन फिर भी तुम्हें मालूम है ना कि एकता के पापा एक बड़े अधिकारी हैं और अगर उन्हें इस बारे में पता चला कि तुम उनकी बेटी से बात करते हो तो कहीं तुम्हे कुछ परेशानी ना हो जाए रोहन मुझे कहने लगा कि यह सब बाद में देख लेंगे। हम लोग घर लौट आए जब हम लोग घर लौटे तो उस वक्त काफी अंधेरा हो चुका था रात के करीब 9:00 बज रहे थे मां मुझसे और रोहन से पूछने लगी कि तुम दोनों कहां चले गए थे।

मैंने मां को कहा कि हम लोग अपने दोस्त से मिलने के लिए चले गए थे। उसके बाद हम लोगों ने खाना खाया और फिर हम दोनों छत पर चले गए छत पर हम दोनों साथ में बैठे हुए थे रोहन और मैं ज्यादातर साथ में ही रहा करते थे। भैया हम दोनों को बहुत डांटते भी थे भैया बड़े ही सज्जन व्यक्ति है और उन्हें बिल्कुल भी पसंद नहीं है कि कोई घर में सिगरेट पिये। भैया ने मुझे सिगरेट पीते हुए कई बार पकड़ लिया था इसलिए उस रात हम दोनों चुपके से सिगरेट पी रहे थे लेकिन तभी भैया ने हम दोनों को पकड़ लिया और भैया ने मुझे बहुत डांटा। उन्होंने कहा कि तुमने रोहन को भी अपनी तरह बना दिया है मैंने भैया से कहा कि नहीं भैया ऐसा बिल्कुल भी नहीं है हम लोग अपनी पढ़ाई में भी ध्यान दे रहे है और जवानी में कभी कबार ऐसा हो जाता है लेकिन भैया तो कुछ सुनने को तैयार ही नहीं थे और उन्होंने उस दिन यह बात पापा को बता दी। पापा ने मुझे और रोहन को कहा कि देखो बेटा यह सब बिल्कुल भी ठीक नहीं है पापा हम दोनों को समझाने लगे लेकिन हम दोनों भला किस की बात मानने वाले थे। चाचा जी स्कूल में अध्यापक हैं और उनका ट्रांसफर अभी कुछ समय पहले ही बरेली में हुआ है इसलिए वह बरेली से घर कम ही आया करते हैं। चाची जी और मां दोनों हमे कभी कुछ कहते नहीं है सिर्फ भैया ही हम दोनों को डांटा करते हैं पापा भी हमें कभी कुछ कहते नहीं हैं। रोहन और एकता के बीच भी नजदीकियां बढ़ने लगी थी तो रोहन ने एक दिन मुझे कहा कि भैया मैंने एकता को प्रपोज कर दिया और उसने मेरे परपोज का जवाब दे दिया। मैंने रोहन को कहा चलो यह तो बड़ी अच्छी बात है कि एकता और तुम अब एक दूसरे से बातें करने लगे हो। वह मुझे कहने लगा कि हां भैया हम दोनों एक दूसरे से बातें करने लगे हैं और मुझे एकता से बात करना बहुत ही अच्छा लगता है मुझे ऐसा लगता है जैसे एकता के बिना मेरी जिंदगी अधूरी है। उस दिन मुझे रोहन ने बताया कि वह एकता से बहुत प्यार करने लगा है एकता और रोहन के बीच प्यार की नींव पड़ चुकी थी जो कि उन दोनों को पागल कर रही थी उन दोनों का मिलना कुछ ज्यादा ही होने लगा था। मैंने रोहन को कहा कि रोहन तुम एकता से छुप कर मिला करो लेकिन वह एकता से हर रोज मिला करता था।


एक दिन यह बात एकता के पिताजी को पता चल गई और जब उन्हें इस बारे में पता चला तो उन्होंने रोहन से कहा कि आज के बाद तुम कभी एकता से नहीं मिलोगे। रोहन एकता से दूर हो चुका था क्योंकि एकता और उसका मिलना नहीं हो पाता था लेकिन फिर भी उन दोनों की चोरी छुपे फोन पर बातें हो जाया करती थी। एकता और रोहन का रिलेशन तो चोरी छुपे चल रहा था लेकिन मैं अभी भी सिंगल ही था मेरा कॉलेज पूरा हो चुका था इसलिए मुझे अपनी नौकरी के लिए दिल्ली जाना पड़ा और मैं दिल्ली में नौकरी करने लगा। कॉलेज प्लेसमेंट के माध्यम से ही मेरा सिलेक्शन दिल्ली की कंपनी में हुआ और मैं दिल्ली में रहने लगा हालांकि मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था लेकिन उसके बावजूद भी मुझे दिल्ली में जॉब करनी पड़ रही थी। मेरी जिंदगी में कुछ भी नया नहीं हो रहा था एक दिन रोहन ने मुझे फोन किया और कहा कि भैया मैं कुछ दिनों के लिए दिल्ली आ रहा हूं।

रोहन मुझसे मिलने के लिए दिल्ली आया और जब वह मुझसे मिलने के लिए दिल्ली आया तो मैंने उससे कहा कि घर में सब लोग कैसे हैं? वह कहने लगा घर में तो सब लोग ठीक हैं सब लोग आपको बस याद ही करते रहते हैं। मैंने रोहन से कहा कि तुम्हारे और एकता के बीच भी सब कुछ ठीक चल रहा है तो वह कहने लगा कि हां हम दोनों के बीच सब कुछ ठीक चल रहा है और हम दोनों एक दूसरे से मिला भी करते हैं। रोहन मेरे पास ज्यादा दिन नहीं रुका वह मेरे पास सिर्फ दो दिन ही रुका और उसके बाद वह लखनऊ लौट गया। मुझे अब काफी अकेला महसूस होने लगा था मेरी जिंदगी में कुछ भी नया नहीं हो रहा था सब कुछ सामान्य तरीके से चल रहा था। सुबह के वक्त मैं ऑफिस जाता और शाम के वक्त मैं घर लौट आता था। दिल्ली में मेरी काफी अच्छी दोस्ती हो गई थी इसलिए मैं अब अपने दोस्तों के साथ एक शाम पार्टी में गया हुआ था। उस दिन पार्टी से लौटते वक्त मुझे मेरी सोसाइटी में रहने वाली लड़की देखी। मैंने उससे पहले भी दो तीन बार देखा था वह किसी लड़के के साथ थी उस से वह काफी झगड़ा कर रही थी लेकिन तभी वह लड़का वहां से चला गया। वह बहुत ही ज्यादा उदास होकर वापस अपने फ्लैट की तरफ जा रही थी मैंने उसे रोकते हुए अपना हाथ आगे बढ़ाया और कहा मेरा नाम राजेश है। वह मुझे कहने लगी मेरा नाम अनुष्का है मैंने अनुष्का से कहा अनुष्का तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा मैं तुम्हारी जिंदगी से जुड़ी कुछ बातों को पूछूं। वह मुझे कहने लगी नहीं मुझे बिल्कुल भी बुरा नहीं लगेगा वह मुझे कहने लगी मुझे बिल्कुल भी बुरा नहीं लगेगा। अनुष्का ने मुझे बताया उसके बॉयफ्रेंड के साथ उसका झगड़ा हो गया है उन लोगों का पिछले 6 सालों से रिलेशन चल रहा था अब अचानक से उन दोनों के बीच झगड़ा हो गया इस बात से अनुष्का और वह एक दूसरे से अलग होना चाहते हैं।

मैंने अनुष्का से बात करनी शुरू कर दी अब हम हर रोज एक दूसरे को मिलने लगे हम दोनों को एक दूसरे का साथ अच्छा लगने लगा करीब एक महीने बाद मैंने अनुष्का को अपने दिल की बात कह दी। उसने भी मेरे रिश्ते को तुरंत ही स्वीकार कर लिया क्योंकि वह भी काफी अकेली थी मुझे काफी अच्छा लगने लगा था अनुष्का का साथ मुझे मिल चुका था। एक दिन जब मैं अकेला घर पर था तो उसको फोन कर के मैने अपने फ्लैट में बुला लिया वह भी आ गई। हम दोनों एक दूसरे के साथ बैठकर बातें कर रहे थे लेकिन उससे बात कर मेरे मन मे ना जाने क्या कुछ अलग होने लगा मैंने अनुष्का के हाथ को पकड़ा और मैंने उसके होठों को चूम लिया। वह बिल्कुल अपने आपको रोक ना सकी वह मुझे किस करने लगी। हम दोनों एक दूसरे को किस कर रहे थे जिस वजह से मेरे अंदर की आग बढ़ाने लगी थी मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पाया और ना ही अनुष्का अपने आपको रोक पाई। उसने मेरे लंड को देखा तो उसने अपने मुंह में लंड लेना शुरू कर दिया वह उसे अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। उसे बड़ा ही मजा आने लगा था मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था। जब मैं और वह एक दूसरे के साथ मजे कर रहे थे तो हम दोनों अब एक दूसरे को पूरी तरीके से संतुष्ट कर रहे थे।

मैंने उसकी योनि पर अपने लंड को लगाया और जैसे ही मैंने अंदर की तरफ धकेलना शुरू किया तो वह तड़पने लगी। वह मुझे कहने लगी राजेश जब से तुम मेरी जिंदगी में आए हो तब से मेरी जिंदगी पूरी तरीके से बदल चुकी है और मुझे आज बहुत अच्छा लग रहा है। उसके चेहरे पर खुशी थी उसकी आंखों में वह खुशी साफ नजर आ रही थी अब मैंने उसे लगातार तेजी गति से चोदना शुरू कर दिया था और अनुष्का भी बहुत ज्यादा खुश हो गई थी। अब हम दोनों इतने गर्म हो चुके थे कि मेरा माल जल्द ही बाहर आ गया जैसे ही मेरा माल अनुष्का की चूत मे गिरा तो उसके बाद मैंने उसे घोडी बना दिया। घोडी बनाने के बाद जब मैंने उसे चोदना शुरू किया तो वह मचलने लगी और कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। अब हम दोनों एक दूसरे का साथ बड़े अच्छे से दे रहे थे मैंने उसे बहुत देर तक चोदा जब मैंने उसे पूरी तरीके से संतुष्ट कर दिया तो वह खुश हो गई थी। मैंने उसे कहा मजा तो आज मुझे भी बहुत ज्यादा आ गया वह बड़ी खुश थी जब हम दोनों ने एक दूसरे के साथ सेक्स के मज़े लिए।

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