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पति की तडप मुझे बुलाकर शांत की

जब मैं पहली बार पुणे में गया तो पुणे में मेरी दोस्ती मनीष के साथ हुई मनीष जो कि मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करते हैं और वह मेरे पड़ोस में रहते हैं। मनीष के पापा एक सरकारी विभाग में नौकरी करते हैं मनीष और मेरी काफी अच्छी दोस्ती हो गई थी क्योंकि वह हमारे पड़ोस में ही रहते थे इसलिए हम लोगों के बीच काफी अच्छी बनने लगी थी। मेरी शादी को भी अभी सिर्फ 6 महीने ही हुए हैं और मेरी शादी के तुरंत बाद ही मेरा ट्रांसफर पुणे हो गया पुणे में मेरा ट्रांसफर हो जाने के बाद मैंने सोचा कि अपनी पत्नी को भी अपने साथ पुणे ले आऊं। मैं जब अपने घर मुंबई कुछ दिनों के लिए गया तो मुंबई में कुछ दिन रुकने के दौरान मैंने पापा और मम्मी से बात की और कहा कि मैं मेघा को अपने साथ लेकर जाना चाहता हूं। पापा और मम्मी कहने लगे कि बेटा जैसा तुम्हें लगता है तुम वैसा ही करो और फिर मैं मेघा को अपने साथ ले आया। मेघा मेरे साथ आ चुकी थी और हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत खुश थे हम लोग पुणे में अपनी जिंदगी अच्छे से गुजार रहे थे। मनीष जी की पत्नी भी मेघा के साथ कई बार बैठने के लिए घर पर आ जाया करती थी उनकी पत्नी का नाम सुचित्रा है।

सुचित्रा भाभी बहुत ही अच्छी हैं और उनका स्वभाव बड़ा अच्छा है इसलिए मैं और मेघा हमेशा ही उनकी बड़ी तारीफ करते हैं। एक दिन मैं और मेघा आपस में बात कर रहे थे कि तभी सुचित्रा भाभी भी घर पर आ गई जब वह घर पर आई तो उस दिन वह मुझे कहने लगे कि राघव भैया आज आप अपने ऑफिस नहीं गए। मैंने उन्हें कहा कि नहीं भाभी आज मैं अपने ऑफिस नहीं जा रहा हूं क्योंकि आज मेरी तबीयत भी कुछ ठीक नहीं थी और मेरे सर में काफी दर्द था इसलिए मैंने आज सोचा कि आज घर पर ही आराम कर लूँ। मैं और मेघा साथ में बैठे हुए थे तो मैंने मेघा से कहा कि तुम भाभी के लिए चाय बना कर ले आओ सुचित्रा भाभी कहने लगी नहीं मेघा रहने दो।

मेरा मन चाय पीने का नहीं है मैं अभी घर से चाय पी कर आ रही हूं लेकिन फिर भी मैंने मेघा को कहा कि तुम मेरे लिए और भाभी के लिए थोड़ी चाय बना दो। मेघा चाय बनाने के लिए रसोई में चली गई और थोड़ी देर बाद मेंघा चाय लेकर आई तो हम सब लोग साथ में बैठकर चाय पी रहे थे। मैंने सुचित्रा भाभी से पूछा कि मनीष तो ऑफिस चले गए होंगे वह कहने लगे कि हां वह ऑफिस चले गए हैं और मैं सोच रही थी कि मेघा को मैं अपने साथ शॉपिंग के लिए लेकर जाऊं। मैंने सुचित्रा भाभी से कहा कि हां भाभी आप मेघा को अपने साथ शॉपिंग लेकर जाओ और फिर वह मेघा को अपने साथ शॉपिंग के लिए ले गई। वह अपने साथ मेंघा को शॉपिंग के लिए ले गई थी और मैं घर पर अकेला ही था तो मैंने भी सोचा कि आराम कर लेता हूं इसलिए मैं अपने रूम में चला गया और मुझे पता नहीं कब नींद आई कुछ मालूम ही नहीं पड़ा। जब मैं उठा तो उस वक्त 4:00 बज रहे थे मैंने मेघा को फोन किया तो वह मुझे कहने लगी कि हम लोग अभी रास्ते में ही हैं बस आधे घंटे में घर पहुंच जाएंगे। मैंने मेघा से कहा कि ठीक है और करीब आधे घंटे बाद मेघा घर पहुंच चुकी थी जब मेघा घर आई तो मैंने मेघा से पूछा कि आज तुमने क्या शॉपिंग की है। मेघा ने मुझे अपने शॉपिंग के बारे में बताया, मैं और मेघा काफी दिनों बाद एक दूसरे के साथ इतना अच्छा समय बिता पाए थे। रात का डिनर करने के बाद हम लोगों ने काफी देर तक बैठे रहे उसके बाद मैं और मेघा सो गए। अगले दिन मुझे ऑफिस जल्दी जाना था तो अगले दिन मैं जल्दी तैयार हुआ और फटाफट से नाशता करके अपने ऑफिस चला गया। मैं ऑफिस पहुंच चुका था और ऑफिस में मुझे काफी काम था इसलिए मुझे घर पहुंचने में उस दिन देरी हो गई। मेघा ने मुझे फोन किया था लेकिन मैं उसका फोन उठा नहीं पाया था फिर मैंने मेघा को कॉल बैक किया और उसे कहा कि मेघा तुम मुझे फोन कर रही थी। वह मुझे कहने लगी कि हां बस आपको पूछ रही थी कि आप कब तक आएंगे मैंने मेघा को कहा कि मैं बस थोड़ी देर बाद ही आ जाऊंगा। उस दिन मैं काफी देरी से घर पहुंचा तो मेघा ने मुझे कहा कि आप काफी देर से आ रहे हैं मैंने मेघा को कहा कि हां मुझे मुझे आने में देर हो गई क्योंकि आज ऑफिस में कुछ ज्यादा ही काम था। मेरी और मेघा की जिंदगी बड़े अच्छे से चल रही थी हम दोनों अपनी शादीशुदा जिंदगी का पूरी तरीके से इंजॉय कर रहे थे और सब कुछ ठीक चल रहा था।


एक दिन जब मेघा ने मुझे कहा कि चलो आज हम लोग कहीं घूम आते हैं तो मैंने मेघा से कहा कि चलो आज हम लोग मूवी देख आते हैं और हम लोग मूवी देखने के लिए चले गए। हम लोग उस दिन मूवी देखने के लिए चले गए काफी समय बाद हम लोगों ने मूवी देखी थी। मैं और मेघा एक दूसरे के साथ अच्छे से समय बिता पा रहे थे उस दिन हम लोग देर रात से घर लौटे और मेघा भी बड़ी खुश थी कि हम दोनों साथ में समय बिता पाए। एक दिन मेघा ने मुझसे कहा कि राघव मैं सोच रही थी कि कुछ दिनों के लिए मुंबई हो आऊं मैंने मेघा से कहा कि घर से मां का भी फोन आया था और वह लोग कह रहे थे कि कुछ दिनों के लिए मेघा अगर हमारे पास आ जाती तो ठीक रहता। मैंने मेघा से कहा कि मैं ऑफिस से छुट्टी ले लेता हूं और मैं भी तुम्हारे साथ कुछ दिनों के लिए मुंबई चलता हूं उसके बाद मैं वापस पुणे लौट आऊंगा और तुम जब पुणे आओगी तो मुझे फोन कर देना मैं तुम्हारी ट्रेन की टिकट करवा दूंगा। मेघा ने कहा ठीक है राघव यह ठीक रहेगा और उसके बाद मैं और मेघा मुंबई चले गए मम्मी पापा भी काफी खुश थे। मैं कुछ दिनों तक मेघा के साथ घर पर ही रुका लेकिन उसके बाद मेघा अपने मायके चली गई और वह अपने मायके गई तो मैं भी वापस पुणे लौट आया।

मैं वापस पुणे लौट आया था और जब मैं पुणे लौटा तो मुझे मनीष जी काफी दिनों बाद मिले उनसे मेरी मुलाकात हो नहीं पा रही थी क्योंकि मैं भी ऑफिस से देर में ही आया करता था और वह भी देर में आया करते थे और बीच में वह लोग अपने किसी रिश्तेदार की शादी में भी नागपुर गए हुए थे इस वजह से हमारी मुलाकात हो नहीं पाई थी। काफी समय बाद मैं मनीष जी को मिला तो उनके साथ काफी देर तक मैंने बातें की। मैं वापस घर लौट आया था मैं उस दिन खाना बनाने के बाद जल्दी सो गया था हर रोज की तरह मैं सुबह ऑफिस जाता और शाम के वक्त घर लौटता। एक दिन जब मैं ऑफिस से घर लौट रहा था तो उस दिन हमारे ही कॉलेज में पढ़ने वाली सुनीता मुझे मिली वह काफी समय बाद मुझे मिल रही थी। सुनीता से मैंने कहा तुम्हारी शादी तो मुंबई में हुई थी तुम यहां क्या कर रही हो? उसने मुझे पूरी बात बताई सुनीता ने मुझे बताया उसकी जॉब पुणे में लग चुकी है उसके पति के साथ उसकी बिल्कुल भी नहीं बनती है इसलिए वह दोनों अलग ही रहते हैं। मैंने सुनीता से उसका नंबर ले लिया और उसके बाद मैं सुनीता से बातें करने लगा। हम दोनो रोज मिलने लगे थे एक दिन सुनीता ने मुझे फोन कर अपने घर पर बुला लिया। जब उसने मुझे अपने घर पर बुलाया तो मैं उसे मिलने के लिए घर पर चला गया लेकिन मुझे नहीं पता था कि उस दिन सुनीता के दिल में क्या चल रहा था। मैं सुनीता के बदन को देख कर अपने आपको रोक ना सका। मैंने उसके बदन की गर्मी को महसूस करना शुरू कर दिया मैंने अब सुनीता के होंठों को चूमना शुरू कर दिया था। वह जैसे सेक्स के लिए तड़प रही थी मैं भी अपने आपको बिल्कुल रोक ना सका और मैंने उसकी चूत को चाटना शुरु कर दिया था। मैंने उसके बदन से पूरे कपड़े उतारने के बाद उसकी चूत का रसपा करना शुरू किया तो वह गर्म होने लगी।

उसके सुडौल स्तन चूसकर मेरे अंदर की गर्मी बहुत ही ज्यादा बढ़ रही थी। वह बहुत ज्यादा उत्तेजित होते जा रही थी वह मुझे कहने लगी मेरे अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ रही है मैं अब बिल्कुल भी रह नहीं पा रही हूं। मैंने सुनीता को कहा मैं अपने लंड को तुम्हारी चूत मे घुसा देता हूं। मैंने अपने मोटे लंड को सुनीता की चूत मे लंड को रगडना शुरू किया जब उसकी चूत के बीच में मेरा लंड था तो वह बहुत ही उत्तेजित हो रही थी और मुझे कहने लगी मेरी तडप बढ़ती ही जा रही है मैंने एक जोरदार झटके के साथ उसकी चूत को अपने हाथों से खोलते हुए अपने लंड को उसकी योनि में प्रवेश करवा दिया। वह जोर से चिल्लाते हुए मुझे कहने लगी आज तो मुझे मजा ही आ गया और हम दोनों एक दूसरे की बाहों में थे। मेरे जोरदार झटके से उसका पूरा शरीर हिल रहा था वह उत्तेजित होती जा रही थी हम दोनों के अंदर की गर्मी बहुत बढ चुकी थी। हम दोनों बिल्कुल भी रह नहीं पा रहे थे ना तो मैं अपने आपको रोक पा रहा था और ना ही सुनीता अपनी गर्मी को झेल पा रही थी।

मैंने सुनीता की चूत के अंदर अपने माल को गिरा दिया। उसके बाद जब मैंने उसकी चूतडो को अपनी तरफ करते हुए अपने लंड पर तेल की मालिश की और उसकी चूत मे अपने लंड को अंदर की तरफ घुसाया तो वह बहुत जोर से चिल्लाई। उसके बाद हम दोनों एक दूसरे के साथ मजे लेने लगे हम दोनों को बहुत अच्छा लग रहा था। अब हम दोनों के अंदर की गर्मी बढ़ती ही जा रही थी मैं उसकी चूत के मजे अच्छे से ले रहा था। मुझे उसको चोदने मे बड़ा मजा आ रहा था वह मुझसे अपनी चूत को मिलाए जा रही थी। जब वह ऐसा करती तो मेरे अंदर की आग बढ़ती जाती जब मैंने उसकी चूत के अंदर अपनी पिचकारी मारी तो वह मुझे कहने लगी आज तो मजा ही आ गया। अब हम दोनों को बड़ा मजा आ गया था उसे भी बहुत अच्छा लग रहा था। हम दोनों के बीच ना जाने कितनी बार संबंध बने।

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