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भाभी को तो लंड लेना ही था

मैं कुछ दिनों के अपने परिवार के साथ घूमने के लिए शिमला चला गया था हम लोग वहां पर करीब चार दिनों तो रुके और फिर हम लोग दिल्ली वापस लौट आये। अपने परिवार के साथ काफी साल बाद मेरा कहीं घूमना हुआ और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था कि अपने परिवार के साथ मैं समय बिता पा रहा हूं। अपने परिवार के साथ समय बिताना मेरे लिए बहुत ही सुखद एहसास था। मैं वापस दिल्ली आ गया था तो दिल्ली में अब मैं नौकरी की तलाश में था मुझे अभी तक नौकरी नहीं मिली थी मैं नौकरी ढूंढ रहा था। एक दिन मेरा दोस्त घर पर आया मेरा दोस्त जब मुझे मिला तो उसने मुझे कहा कि आजकल तुम क्या कर रहे हो। मैंने उसे बताया कि मैं आजकल अपनी नौकरी की तलाश में हूं लेकिन अभी तक मुझे नौकरी मिल नहीं पाई है। उसने मुझे कहा कि तुम चिंता मत करो मैं तुम्हारी बात अपने पापा के ऑफिस में कर लेता हूं और उसने मेरी बात अपने पापा के ऑफिस में कर ली उसके पापा वहां मैनेजर है और मेरी जॉब भी वहां लग चुकी थी।

जॉब लग जाने के बाद मुझे बहुत अच्छा लगने लगा और फिर मैं अपनी जॉब मे ही बिजी हो गया था। एक दिन मैं और पापा साथ में बैठे हुए थे तो पापा मुझे कहने लगे कि सार्थक बेटा तुम अपनी बहन से मिल आओ। मैंने पापा को कहा कि पापा क्या दीदी को मिलने के लिए जाना जरूरी है तो पापा कहने लगे हां बेटा उसकी तबीयत ठीक नहीं है। मुझे इस बारे में कुछ भी पता नहीं था मैंने पापा से कहा ठीक है पापा कल वैसे भी रविवार है कल मैं दीदी को मिलने चला जाऊंगा। अगले दिन मैं दीदी को मिलने के लिए चला गया मैं जब दीदी को मिलने के लिए उनके घर पर गया तो उनकी तबीयत ठीक नहीं थी डॉक्टर ने उन्हें बेड रेस्ट करने के लिए कहा था। मैंने दीदी से पूछा आखिर आपको हुआ क्या है तो दीदी ने मुझे बताया कि उन्हें दो-तीन दिन से कुछ ज्यादा ही बुखार आ रहा था इसलिए डॉक्टर ने उन्हें रेस्ट करने के लिए कहा है। मैंने दीदी को कहा चलिए कोई बात नहीं आप आराम कीजिए सब कुछ ठीक हो जाएगा। जीजाजी उस वक्त घर पर नहीं थे दीदी की सासू मां ही घर पर थी मैंने दीदी से पूछा कि जीजाजी कहां है तो वह मुझे कहने लगे कि वह तो अपने काम से गए हैं और शाम तक ही लौटेंगे।

मैं दीदी के साथ काफी देर तक बैठा रहा फिर मैंने दीदी को कहा कि आप आराम कर लीजिए वह मुझे कहने लगी कि हां सार्थक मैं आराम कर लेती हूं। उसके बाद मैं घर लौटने की तैयारी में था तो दीदी मुझे कहने लगी कि सार्थक तुम आज यहीं रुक जाओ मैंने दीदी को कहा नहीं दीदी आज मुझे घर जाना पड़ेगा। दीदी मुझे कहने लगी कि सार्थक तुम यहीं रुक जाते तो मुझे भी अच्छा लगता और तुम्हारे जीजा जी अभी तक आये नहीं है। मैंने दीदी से कहा कोई बात नहीं मैं उनसे बाद में मुलाकात कर लूंगा और फिर मैं घर लौट आया था। मैं जब लौटा तो पापा और मम्मी मुझसे पूछने लगे कि बेटा तुम्हारी बहन की तबीयत कैसी है तो मैंने उन्हें बताया कि अब तो दीदी की तबीयत ठीक है लेकिन उन्हें डॉक्टर ने बेड रेस्ट के लिए कहा है। पापा मुझसे कहने लगे कि बेटा हम लोग भी अनीता से मिलने के बारे में सोच रहे थे लेकिन मेरी तबीयत ठीक नहीं है और तुम्हारी मां की तबीयत भी ठीक नहीं थी इसलिए हम लोग अनीता से मिलने के लिए नहीं जा पाए मैंने पापा और मम्मी से कहा कोई बात नहीं। पापा मम्मी कहने लगे कि हम चाहते थे कि हम लोग अनीता से मिल आये मैंने उनसे कहा कि अब वह ठीक है आप उनसे फोन पर बात कर लीजिएगा। पापा और मां कहने लगे कि ठीक है बेटा हम लोग अनीता से फोन पर बात कर लेंगे। उसके बाद मैं अपने रूम में चला गया रूम में मैं लेटा हुआ था थोड़ी देर बाद मां कमरे में आई और कहने लगी कि सार्थक बेटा तुम डिनर कर लो मैंने मां से कहा मां बस अभी आया। मैं बाथरूम में हाथ मुंह धोने के बाद पापा मम्मी के साथ डिनर करने लगा डिनर करने के समय पापा ने मुझे पूछा कि बेटा तुम्हारी जॉब तो ठीक चल रही है। मैंने पापा से कहा हां पापा मेरी जॉब ठीक चल रही है और सब कुछ ठीक है तो पापा मुझे कहने लगे कि चलो बेटा यह तो अच्छी बात है।


मै और पापा साथ में ही बैठे हुए थे और मम्मी रसोई में चली गई थी हम लोगों ने डिनर कर लिया था कुछ देर तक मैं पापा के साथ बैठा रहा फिर मैं भी अपने रूम में चला गया। मैं अपने रूम में चला गया और मुझे पता नहीं कब नींद आ गई कुछ मालूम ही नहीं पड़ा, मुझे नींद आ चुकी थी उसके बाद मैं अगले दिन सुबह जल्दी उठ गया था। मैं जब सुबह जल्दी उठा तो मुझे अपने ऑफिस के लिए जल्दी जाना था मैंने मां से कहा कि मां मेरे लिए जल्दी नाश्ता तैयार कर देना तो मां मुझे कहने लगी कि हां बेटा मैं तुम्हारे लिए जल्द ही नाश्ता तैयार कर देती हूं। मां ने मेरे लिए नाश्ता तैयार कर दिया था जब मां ने मेरे लिए नाश्ता तैयार किया तो उसके बाद मैंने जल्दी से नाश्ता किया और अपने ऑफिस के लिए निकल गया। मैं जब ऑफिस पहुंचा तो उस दिन ज्यादा ही काम था इसलिए मुझे ऑफिस में काफी देर हो गई थी। ऑफिस में मुझे बहुत देर हो गई थी और मैं देर रात से घर पहुंचा तो मां मेरा इंतजार कर रही थी और वह कहने लगी कि बेटा आज तुम काफी देरी से घर आ रहे हो। मैंने मां से कहा कि हां मां मुझे आने में देर हो गई क्योंकि आज ऑफिस में बहुत काम था। अब हर रोज की तरह मैं सुबह ऑफिस जाता और शाम के वक्त घर लौट आता मेरी जिंदगी में कुछ भी नया नहीं हो रहा था सब कुछ एक जैसा ही चल रहा था। हमारे पड़ोस में रहने वाले सोहन अंकल हमारे घर पर आए हुए थे और वह उस दिन पापा के साथ काफी देर तक बैठे हुए थे।

पापा और सोहन अंकल के बीच काफी अच्छी दोस्ती है और वह लोग एक दूसरे को काफी मानते भी हैं इसलिए वह दोनों एक दूसरे के साथ काफी देर तक बैठे हुए थे। मैंने मां से कहा कि मां मैं अभी अपने दोस्त राजीव से मिल आता हूं मां कहने लगी ठीक है बेटा तुम उससे मिल आओ। मैं उस दिन राजीव के घर पर चला गया राजीव हमारी सोसाइटी में ही रहता है लेकिन उससे काफी दिनों से मेरी मुलाकात हो नहीं पाई थी। जब मैं राजीव को मिलने के लिए गया तो वह मुझे कहने लगा कि आज तुम कितने दिनों बाद मुझसे मिल रहे हो। हम दोनों उसके रूम पर ही बैठे हुए थे। जब हम दोनों साथ में बैठे हुए थे तो राजीव की भाभी आई वह मुझे ऐसे देख रही थी जैसे कि उनकी आंखों में कुछ चल रहा था। राजीव के भाई की शादी को अभी 6 महीने ही हुए थे राजीव के भैया विदेश में नौकरी करते हैं लेकिन मुझे नहीं पता था कि राजीव की भाभी सरिता का चरित्र बिल्कुल भी ठीक नहीं है। उस दिन मुझे उन्हें देखकर बिल्कुल भी ठीक नहीं लग रहा था औ वह उस दिन के बाद मुझे जब भी देखती तो उनकी आंखों में मुझे वही शरारत नजर आती मैंने भी मन बना लिया था सरिता भाभी के साथ मुझे संभोग करना है। एक दिन मुझे वह मौका मिल गया उन्होंने मुझे कहा आज मैं तुमसे मिलने के लिए तुम्हारे घर आऊंगी। उन्हे यह बात मालूम थी कि पापा और मम्मी घर पर नहीं है। वह उस दिन मुझसे मिलने के लिए घर पर आई सरिता भाभी जब मुझसे मिलने के लिए घर पर आई तो मै उनके गदराए बदन को महसूस करना चाहता था। मै उनकी चूत के मजे लेना चाहता था वह मेरे साथ बिस्तर पर लेटी हुई थी उनकी चूत की खुजली को मैं पूरी तरीके से मिटाना चाहता था। मैंने उनके होंठों को चूमना शुरू किया तो सरिता भाभी उत्तेजित होती चली गई।

मुझसे भी बिल्कुल रहा नहीं जा रहा था मैंने सरिता भाभी के बदन को महसूस करना शुरू कर दिया था। मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो उन्होंने अपने मुंह से मेरे लंड को चूसना शुरू किया और वह उसे बड़े अच्छे से चूसने लगी। सरिता भाभी मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूस रही थी तो मुझे मजा आ रहा था उनके मुंह के अंदर मेरा वीर्य गिरने लगा था उसे उन्होंने अपने अंदर ही निगल लिया। मैंने उनकी चूत को चाटना शुरु किया तो उनकी चूत से पानी बाहर निकल आया था। मैंने सरिता भाभी से कहा मैं आपकी चूत मारना चाहता हूं। उन्होंने मुझे कहा मैंने अपने पैरों को खोल लिया है अब आपको जो करना है आप कर लीजिए। मैंने भी उनकी गरम चूत पर अपने गरम लंड को लगाकर अंदर की तरफ धकेला जैसे ही मेरा मोटा लंड उनकी योनि के अंदर घुस गया तो मुझे मजा आने लगा। मैं सरिता भाभी को बड़ी तेजी से चोदने लगा मैंने उनके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया था जिस तरह से मैं उनकी चूत के मजे ले रहा था उससे मुझे बहुत ही ज्यादा मजाक आने लगा। उनका पूरा बदन गर्म होने लगा था वह मुझे कहने लगी मेरे बदन की गर्मी बढ़ती जा रही है।

मैंने उनको बोला मेरे अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ चुकी है मै बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा हूं और उनके बदन से निकलता हुआ पसीना मुझे साफ महसूस होने लगा था। उनकी चूत से कुछ ज्यादा ही अधिक पानी बाहर निकल आया था उनकी योनि से पानी निकाल रहा था। वह मुझे कहने लगी तुम मुझे बस ऐसे ही धक्के मारते रहो मुझे बहुत मजा आ रहा है। मैंने उन्हें कहा मजा तो मुझे भी बड़ा आ रहा है अब मुझे लगने लगा है कहीं मेरा वीर्य बाहर की तरफ ना गिर जाए। वह कहने लगी कोई बात नहीं तुम अपने माल को मेरी चूत मे गिरा दो वैसे भी मैंने अपनी चूत को तुम्हें सौंपी दिया है तुम जैसा चाहो वैसा कर सकते हो। मैंने अब 90 की स्पीड से उनको चोदना शुरू किया जैसे ही उनकी चूत के अंदर मैंने अपने वीर्य को गिराया तो वह खुश हो गई और मुझसे लिपटकर कहने लगी आज तो मजा ही आ गया। उसके बाद मैंने उनके साथ तीन बार और संभोग किया और उनकी गर्मी को मिटाया

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