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मेरा लंड था चूत का प्यासा

कुछ दिनों के लिए मुझे अपने काम के सिलसिले में मुंबई जाना था तो मैं मुंबई चला गया। जब मैं मुंबई गया तो उसी बीच मेरे पापा की तबियत अचानक से खराब हो गई और मेरी मां ने मुझे घबराते हुए फोन किया। मैंने मां से जब पूरी बात पूछी तो उन्होंने मुझे बताया कि तुम्हारे पापा की तबीयत खराब है मैंने उन्हें कहा कि मैं बस कल तक लौट आऊंगा मां कहने लगी कि बेटा मैं तुम्हारे पापा का ख्याल रख लूंगी। जब अगले दिन मैं घर पहुंचा तो पापा की तबीयत बहुत खराब थी हालांकि मां उन्हें अस्पताल से घर ले आई थी लेकिन मां ने मुझे कहा कि बेटा तुम कुछ दिनों की अपने ऑफिस से छुट्टी ले लो। मैंने मां से कहा ठीक है मां मैं कुछ दिनों के लिए अपने ऑफिस से छुट्टी ले लेता हूं और फिर मैंने कुछ दिनों के लिए अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली।

मैं ऑफिस से छुट्टी ले चुका था और घर मे मां और मैं पापा का ख्याल रख रहा था। मां मुझे कहने लगी कि सुरेश बेटा मुझे लगने लगा है कि तुम्हें शादी कर लेनी चाहिए क्योंकि घर पर कई बार मैं अकेली होती हूं वह तो शुक्र है कि हमारे पड़ोस में अच्छे लोग रहते हैं जो कि उस दिन तुम्हारे पापा को हॉस्पिटल ले गए थे। मुझे भी अब यह लगने लगा था कि मुझे शादी कर लेनी चाहिए इसलिए मैं भी अब लड़की देखने लगा लेकिन मुझे अभी तक कोई लड़की पसंद आई नहीं थी। पापा की तबीयत ठीक हो चुकी थी तो मैं चाहता था कि मैं शादी कर लूं। पापा के एक पुराने दोस्त हैं जब पापा ने मुझे उनकी लड़की से मिलवाया तो मुझे पारुल बहुत अच्छी लगी। मैं चाहता था कि पारुल से मैं अकेले में मिलकर बात करूं इसलिए मैंने पारुल से अकेले में मिल कर बात करने के बारे में सोचा। मैंने पारुल को फोन किया तो पारुल ने मेरा फोन नहीं उठाया मैंने उसके बाद दोबारा से पारुल को फोन किया तो पारुल ने मेरा फोन उठा लिया, मैंने पारूल को बताया कि मैं सुरेश बोल रहा हूं तो वह मुझे कहने लगी कि हां सुरेश कहो। मैंने पारुल को कहा कि मैं तुमसे मिलना चाहता हूं वह मुझे कहने लगी कि ठीक है सुरेश मैं तुमसे मिलने को तैयार हूँ लेकिन आज हम लोगों का मिलना संभव नहीं हो पाएगा।

मैंने पारुल को कहा कोई बात नहीं हम लोग कल मिल लेंगे वह मुझे कहने लगी कि ठीक है हम लोग कल मुलाकात कर लेते हैं। हमने फोन रख दिया था हम दोनों की यह फोन पर पहली ही बार बात हुई थी पारुल और जब अगले दिन मैं और पारुल एक दूसरे को मिले तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। मुझे पारुल से खुलकर बात करनी थी मैं नहीं चाहता था कि हमारे रिश्ते की बुनियाद किसी भी झूठ पर टिकी हो इसलिए मैं पारुल को सब कुछ बताना चाहता था। पारुल उस दिन बहुत ही सुंदर लग रही थी जब वह मेरे पास आकर बैठी और मुझे कहने लगी कि हां सुरेश कहो तुम्हें क्या कहना था तो मैंने पारुल को कहा कि पारुल आज तुम बहुत सुंदर लग रही हो। पारुल मुझे कहने लगी कि थैंक्यू सुरेश और उसके बाद हम दोनों एक दूसरे से बातें करने लगे मैं चाहता था कि पारुल को मैं अपनी जिंदगी के बारे में सब कुछ बता दूँ। मैंने पारुल को अपने बारे में सब कुछ बता दिया था वैसे मेरे जीवन में कुछ भी ऐसा नहीं था जो मैं पारुल से छुपाता इसलिए मैंने पारुल को सब कुछ बता दिया था। पारुल ने मुझे जब अपने रिलेशन के बारे में बताया तो मैंने पारुल से कहा कि क्या तुम अभी भी रिलेशन में हो और अगर हम दोनों शादी करेंगे तो क्या हम दोनों उसके बाद खुश रहेंगे तो पारुल मुझे कहने लगी कि नहीं सुरेश अब मैं रिलेशन में नहीं हूं। मैंने पारुल को कहा पारुल मुझे उससे कोई भी फर्क नहीं पड़ता पारुल मुझे कहने लगी कि लेकिन सुरेश अगर तुम्हें कभी ऐसा लगा कि मैं और तुम एक दूसरे के साथ नहीं रह सकते या फिर आगे चलकर हमारे रिलेशन में किसी भी प्रकार की कोई परेशानी आई तो तब क्या होगा। मैंने पारुल को कहा तुम उसकी बिल्कुल भी चिंता मत करो हम दोनों के बीच कभी भी कुछ ऐसा नहीं होगा। पारुल और मैं एक दूसरे के साथ काफी देर तक बातें करते रहे पारुल से बात कर के मुझे अच्छा लगा और वह भी बहुत ज्यादा खुश थी कि हम दोनों ने एक दूसरे से खुलकर बातें की। हम दोनों एक दूसरे को अपने बारे में सब कुछ बता चुके थे ऐसा कुछ भी नहीं था जो मैंने पारुल से छुपाया था और ना ही पारुल ने मुझसे कुछ छुपाया था इसलिए हम दोनों एक दूसरे के साथ शादी करने के लिए तैयार थे।


मैं पारुल को अपने माता-पिता के बारे में बता चुका था कि मेरे पापा की तबीयत ठीक नहीं रहती है तो पारुल ने मुझे कहा कि सुरेश तुम बिल्कुल चिंता मत करो मैं तुम्हारे पापा का पूरा ध्यान रखूंगी। मैं बहुत ही खुश और हम दोनों एक दूसरे से फोन पर भी बातें करने लगे थे। हम दोनों का मिलना अक्सर होने लगा था हम दोनों एक दूसरे को अक्सर मिलते रहते जब भी मेरी और पारुल की एक दूसरे से बातचीत होती तो हमें काफी अच्छा लगता। हमारे परिवार वालों को भी लग चुका था कि हम दोनों की सगाई कर देनी चाहिए इसलिए उन लोगों ने मेरी और पायल की सगाई करने का फैसला कर लिया। पापा चाहते थे कि मेरी सगाई में किसी भी प्रकार की कोई कमी ना रह जाए इसलिए उन्होंने हमारे सारे रिश्तेदारों को सगाई में इनवाइट कर दिया था और वह काफी खुश थे। हम दोनों की सगाई हो चुकी थी और मैं अपनी सगाई से बहुत खुश था और पारुल भी इस बात से बहुत खुश थी कि हम दोनों की सगाई हो चुकी है। मैं और पारुल एक दूसरे से सगाई कर के बहुत खुश थे हम दोनों एक दूसरे से खुलकर बात चीत करते और हम दोनों की जिंदगी में सब कुछ अच्छे से चल रहा था।

हम दोनों की सगाई हो जाने के बाद हम लोग एक दूसरे से खुल कर बातें करने लगे थे। हम दोनों एक दूसरे के बिना बिल्कुल रह नहीं पाते थे मैं और पारूल चाहते थे कि हम दोनों एक दूसरे के साथ कहीं घूमने के लिए जाए। पारूल को भी इस से कोई एतराज नहीं था। हम दोनों ने शादी से पहले ही एक साथ घूमने का फैसला किया। हम दोनों घूमने के लिए मुंबई चले गए मैं और पारूल कुछ दिनों के लिए मुंबई मेरे दोस्त के घर पर ही रुकने वाले थे। पारुल को कोई एतराज नहीं था हम दोनों एक ही रूम में लेटे थे। पारुल और मै एक ही रूम थे और हम दोनो अपने आपको रोक ना सके। हम दोनों ने एक दूसरे को किस कर लिया जिसके बाद हम दोनों के अंदर की गर्मी इस तरीके से बढ़ चुकी थी कि हम दोनों बिल्कुल भी रह ना सके। मैंने पारूल से कहा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। हम दोनों को मजा आने लगा था अब हम दोनों बिल्कुल भी एक दूसरे की गर्मी को झेल नहीं पा रहे थे। मुझे यह साफ तौर पर लगने लगा था कि मुझे पारूल की चूत में लंड को डालना है। मैंने अपने कपड़े उतारे जब पारुल और मैं एक दूसरे के साथ नग्न अवस्था में लेटे थे तो हम दोनों का बदन एक दूसरे से टकरा रहा था जिससे कि मुझे बड़ा मजा आ रहा था। हम दोनों को ही मजा आने लगा था और हम दोनों के अंदर की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ने लगी थी। हम दोनों के अंदर की आग इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थी कि उसे रोक पाना बहुत ही मुश्किल हो रहा था। मैंने जब पारुल के सामने अपने लंड को किया तो पारुल ने मेरे लंड को अपने हाथों में लेते हुए हिलाना शुरू किया। जब वह मेरी लंड को हिला रही थी तो मुझे मजा आने लगा था और पारूल को भी बड़ा मजा आ रहा था। हम दोनों के अंदर आग लगी थी पारुल ने मेरे मोटे लंड को अपने मुंह में समाते हुए उसे बड़े अच्छे तरीके से चूसना शुरू किया पारुल मेरे लंड को अपने मुंह में ले रही थी मुझे लग रहा था वह मेरे लंड से पानी निकाल कर ही मानेगी उसने 5 मिनट तक मेरे मोटे लंड को बहुत अच्छे से चूसा और मेरे लंड से पानी बाहर निकाल दिया।

पारूल बहुत ही ज्यादा तड़प उठी थी वह मुझे कहने लगी मुझे तुम्हारे लंड को अपनी चूत मे लेना है। मैंने पारुल की चूत की तरफ देखा तो उसकी गुलाबी चूत को चाटने का मेरा मन होने लगा। मैंने उसकी योनि को बहुत देर तक चाटा। मैं उसकी योनि को तब तक चाटता रहा जब तक उसकी योनि से पानी बाहर नहीं निकल आया। पारुल और मैं एक दूसरे के साथ बड़े ही अच्छे से मजे ले रहे थे। जब पारूल की चूत को चाटकर मैने पानी बाहर निकाल दिया था तब वह मेरे मोटे लंड को चूत में लेने के लिए तरसना लगी थी। मुझे मजा आने लगा था मैंने भी अपने लंड को पारूल की चूत पर सटाया तो पारुल की योनि से पानी बाहर निकल रहा था। जैसे ही मैंने अपने मोटे लंड को पारूल की चूत के अंदर प्रवेश करवाया तो वह बहुत जोर से चिल्लाते हुए मुझे कहने लगी मजा आने लगा है।

मैं पारूल को बड़ी तेज गति से धक्के देने लगा था। मै उसको जिस तेज गति से धक्के मार रहा था उसको बड़ा ही मजा आ रहा था वह मुझे कहने लगी बस तुम ऐसे ही मुझे चोदते जाओ। मैंने पारूल को कहा मुझे तुम्हें चोदने मे बहुत ही मजा आने लगा है पारूल अपने पैरों को खोलने लगी थी। वह जब अपने पैरों को खोल रही थी तो मैंने उसे कहा आज तुम्हारे अंदर की गर्मी बढी हुई है। वह मुझे कहने लगी हां कुछ ऐसा ही समझ लो। मैंने उसके पैरों को अपने कंधों पर रख लिया मै अब उसे बड़ी तीव्र गति से धक्के देने लगा। मुझे इतना मजा आने लगा था कि पारुल अपने मुंह से सिसकारियां लेती जा रही थी वह जिस प्रकार से सिसकारियां ले रही थी उससे मेरे अंदर की गर्मी बढ़ रही थी। पारूल के अंदर की आग भी बढ़ती जा रही थी हम दोनों बिल्कुल भी अपने आपको रोक नहीं पा रहे थे ना तो मैं अपने आप को रोक सका और ना ही पारूल अपने आपको रोक सकी। मेरा वीर्य पारूल की चूत मे गिर गया उसके बाद हम लोग मुंबई लौट आए। अब पारूल और मेरी शादी तय हो चुकी है।

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