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चूत मे कड़क लंड का दबदबा

लंबे समय बाद मेरी गौतम के साथ मुलाकात हुई हम दोनों एक दूसरे को करीब दो वर्षों बाद मिल रहे थे। हम दोनों की मुलाकात उस वक्त हुई जब मैं अपने मामा जी के घर पर गया हुआ था और वहां पर गौतम भी आया हुआ था। गौतम मेरे मामाजी के पड़ोस में ही रहता है और वह मामा जी के घर पर आया हुआ था इतने लंबे अरसे बाद हम दोनों एक दूसरे को मिल रहे थे। मैंने गौतम से कहा गौतम तुमसे तो मेरी फोन पर काफी समय से बात भी नहीं हो पाई थी और तुम्हारा नंबर भी मेरे पास नहीं था। गौतम मुझे कहने लगा कि राहुल तुम तो जानते ही हो कि जब से पापा का बिजनेस संभाला है तब से तो बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता है।

हम दोनों बात कर रहे थे तभी मामा जी मुझे कहने लगे कि राहुल बेटा तुम्हारी मम्मी कैसी हैं तो मैंने उन्हें कहा मम्मी तो ठीक है लेकिन आप भी काफी दिनों से घर नहीं आए तो सोचा कि आपको मिल लेता हूं और यह भी अच्छा ही हुआ कि आपसे मिलने के बहाने गौतम से भी मुलाकात हो गई। मैं मामा जी के घर पर काफी समय तक रुका रहा उसके बाद मैंने गौतम का नंबर भी ले लिया क्योंकि गौतम ने नया नंबर लिया था और फिर मैं घर आ गया। जब मैं घर पहुंचा तो उस वक्त पापा घर नहीं पहुंचे थे मैंने मम्मी से कहा कि क्या पापा अभी तक घर नहीं पहुंचे हैं तो वह मुझे कहने लगी कि नहीं बेटा अभी तुम्हारे पापा घर नहीं आए हैं। मैंने मम्मी से कहा लेकिन पापा अभी तक घर क्यो नहीं आये तो मम्मी कहने लगी कि आज वह अपने किसी दोस्त की पार्टी में जाने वाले हैं इसलिए शायद उन्हें आज आने में देर हो जाएगी। रात को मैंने और मां ने साथ में डिनर किया और फिर मैं अपने रूम में चला गया पापा काफी देर से आए थे मैं भी उसके बाद सोने की तैयारी कर रहा था क्योंकि अगले दिन मुझे ऑफिस जल्दी जाना था और इसलिए मैं उस दिन जल्दी सो गया।

मैं सो चुका था अगले दिन सुबह मैं जल्दी उठा और मैंने मां से कहा कि मां आज मुझे ऑफिस जल्दी जाना है मां कहने लगी राहुल बेटा मैं तुम्हारे लिए नाश्ता बना देती हूं। मां ने मेरे लिए नाश्ता बना दिया और मैं नाश्ता करने के तुरंत बाद ही अपने ऑफिस चला गया। मैं अपने ऑफिस गया उस दिन ऑफिस में कुछ ज्यादा ही काम था इसलिए समय का कुछ पता ही नहीं चला कि कब शाम के 6:30 बज गए और घर जाने का समय भी हो चुका था। मैं पार्किंग में चला गया पार्किंग से मैंने अपनी बाइक निकाली और फिर मैं अपने घर के लिए लौट रहा था मैं जब अपने घर के लिए लौट रहा था तो उस वक्त मुझे गौतम का फोन आया और गौतम मुझे कहने लगा कि राहुल क्या तुम अभी मेरे घर पर आ सकते हो। मैंने गौतम से कहा कि क्या कुछ जरूरी काम है तो गौतम कहने लगा कि हां तुम घर पर आ जाओ तब मैं तुम्हें बताता हूं कि मुझे तुमसे क्या काम था। मैंने गौतम को कहा कि ठीक है मैं तुम्हारे घर पर आ जाता हूं उसके बाद मैं गौतम के घर पर चला गया मैं जब गौतम के घर पहुंचा तो गौतम घर पर ही था मैंने उससे कहा कि गौतम सब कुछ ठीक तो है ना। वह मुझे कहने लगा कि हां राहुल सब कुछ ठीक है लेकिन मुझे कुछ पैसों की जरूरत थी मैंने गौतम से कहा कि यह बात तो तुम मुझे फोन पर भी बता सकते थे। गौतम कहने लगा कि मुझे तुमसे यह सब कहना ठीक नहीं लग रहा था तो सोचा कि तुमसे मिलकर ही बात कर लूँ। मैंने गौतम को कहा कि आखिर तुम्हें पैसे की क्यों जरूरत पड़ी तो उसने मुझे बताया कि उसकी बहन की शादी है मैंने गौतम से कहा कि लेकिन तुमने तो मुझे इस बारे में कुछ बताया ही नहीं था। गौतम कहने लगा कि राहुल तुम्हें क्या बताऊं मेरी बहन ने अपने ऑफिस में ही जॉब करने वाले लड़के को पसंद कर लिया है और तुम तो जानते ही हो कि घर की सारी जिम्मेदारी मेरे ऊपर ही है। मैंने गौतम को कहा ठीक है गौतम तुम्हें जितने पैसों की जरूरत होगी तुम मुझे बता देना, मैंने गौतम से कहा कि अभी मैं चलता हूं तो गौतम कहने लगा कि राहुल तुम थोड़ी देर घर पर रुक जाओ। मैंने गौतम से कहा नहीं मैं जा रहा हूं और उसके बाद मैं अपने घर लौट आया था मैंने गौतम को कुछ दिनों बाद पैसे भी दे दिए थे और गौतम ने अपनी बहन की शादी की सारी तैयारियां शुरू कर दी थी।
गौतम इस बात से बड़ा ही खुश था और उसकी बहन की शादी में मैं भी गया था उसकी बहन की शादी बड़े ही धूमधाम से हुई और गौतम भी इस शादी से बहुत ज्यादा खुश था कि कम से कम वह अपने पापा की कमी को पूरा कर पाया। गौतम के पापा की मृत्यु हो जाने के बाद गौतम के ऊपर ही घर की सारी जिम्मेदारी आन पड़ी थी इसलिए गौतम काफी ज्यादा परेशान भी रहता था लेकिन अब गौतम बहुत खुश था कि उसकी बहन की शादी हो चुकी है। गौतम की बहन की शादी हो जाने के बाद गौतम ने मुझे पैसे लौटा दिए थे। उसके बाद मेरी गौतम से काफी समय तक बात नहीं हो पाई थी मैं गौतम को मिल नहीं पाया था इसलिए मैंने एक दिन गौतम को फोन किया और सोचा कि गौतम का हालचाल पूछूं। मैंने गौतम को फोन किया और गौतम से कहा कि तुम कैसे हो गौतम कहने लगा मैं तो ठीक हूं लेकिन तुम आज काफी दिनों बाद मुझे फोन कर रहे हो। मैंने गौतम को कहा कि तुम तो जानते ही हो कि मेरे पास बिल्कुल भी समय नहीं रहता है इसलिए मैं तुम्हें फोन नहीं कर पाया था।

गौतम से मेरी काफी देर तक बात हुई है और गौतम भी काफी खुश था कि मेरी और गौतम की बात हो पाई। हम दोनों ने करीब 20 मिनट तक बात की, मैंने थोड़ी देर बाद फोन रख दिया था। मैने फोन रखने के बाद अपने फेसबुक अकाउंट को खोला तो मैंने देखा उसमें मनीषा की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई हुई थी। मै मनीषा से दो दिनों पहले ही मिला था मैने उसकी फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर ली उस दिन हम लोगों की चैटिंग पर बात शुरू हो गई और हम दोनों एक दूसरे से फेसबुक चैट के माध्यम से बात करने लगे। उसी रात मैंने मनीषा का नंबर ले लिया हम दोनों की फोन पर बातें होने लगी थी। मनीषा से मेरी मुलाकात मेरे ऑफिस में काम करने वाले सुरेश ने करवाई थी। अब हम दोनों कि बातचीत इतनी अधिक होने लगी थी कि हम दोनों एक दूसरे को मिलने के लिए बेताब थे मै मनीषा से अश्लील बातें भी करने लगा था। एक दिन मैं मनीषा से मिलने के लिए चला गया जब मैं मनीषा को मिलने के लिए गया तो हम दोनों कॉफी शॉप में बैठे हुए थे वहां पर हम लोगों ने आधे घंटे तक टाइम स्पेंड किया। उसके बाद हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए तैयार थे हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए तैयार थे। मैं मनीषा को एक होटल में लेकर चला गया जब हम दोनों होटल मे गए तो मनीषा और मैं एक दूसरे के साथ कुछ देर तक बात करते रहे। मैंने मनीषा की जांघ को सहलाना शुरू किया तो वह मचलने लगी थी। उसकी उत्तेजना इस कदर बढ़ चुकी थी कि वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी मैंने उसके होंठों को चूमना शुरू कर दिया। मैं मनीषा के होठों को किस कर रहा था तो मुझे मजा आने लगा उसको बहुत ही आनंद आ रहा था। जिस तरह मनीषा के होंठो को मै किस कर रहा था उस से मनीषा ह नहीं पा रही थी। मैंने मनीषा के होंठों को चूम रहा था। उसके बाद मैंने उसके कपडो को उतारकर मनीषा को अपने सामने नग्न अवस्था में किया तो वह मेरे लिए पूरी तरीके से पागल होने लगी थी।

मैं भी मनीषा के लिए तडप उठा था मनीषा के गोरे बदन को देखकर मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पाया। मैंने जब अपने लंड को अपने अंडरवियर से बाहर निकाल कर हिलाना शुरू किया तो मनीषा उसे देखकर कहने लगी तुम्हारा लंड तो बहुत ही ज्यादा मोटा है। मैंने मनीषा को कहा तुम्हारा बदन भी बड़ा लाजवाब है मैंने मनीषा को अपनी बाहों में समा लिया मैं चाहता था वह मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर सकिंग करे। मनीषा ने जब मेरे मोटे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया तो मुझे मजा आने लगा। मुझे बड़ा मजा आ रहा था जिस तरह वह मेरे मोटे लंड को अपने मुंह में लेकर सकिंग कर रही थी मेरे अंदर की आग पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी। अब ना तो मैं अपने आप को रोक पाया और ना ही मनीषा अपने आपको रोक पाई इसी वजह से हम दोनों एक दूसरे के लिए और भी ज्यादा तड़प उठे थे। मैंने मनीषा को कहा मैं बहुत ज्यादा तड़पने लगी हूं मनीषा मुझे कहने लगी मेरी तडप अब बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है।

मैंने मनीषा के दोनों पैरों को खोलकर अपनी जीभ से मनीषा की चूत को चाटना शुरू किया। जब मैं उसकी योनि को चाट रहा था तो मेरे अंदर की गर्मी बढ़ती जा रही थी और मनीषा की गर्मी भी पूरी तरीके से बढ़ती चली गई। मैंने मनीषा की योनि के अंदर जब लंड घुसाया तो वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। मुझे भी बड़ा मजा आने लगा था। हम दोनों एक दूसरे के साथ जमकर सेक्स का मजा लेना चाहते थे। मैं मनीषा की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को किए जा रहा था ऐसा करने से मुझे जो आनंद की अनुभूति पैदा हो रही थी वह बडी मजेदार थी। मैंने मनीषा की योनि के अंदर अपने माल को गिराकर उसकी इच्छा को पूरा कर दिया। अब हम दोनों एक दूसरे के साथ काफी देर तक ऐसे ही बैठे रहे और हम लोगों ने बहुत देर तक एक दूसरे से बातें की फिर उसके बाद हमने उस रात चुदाई का मजा लूटा। उस दिन सेक्स कर के मजा आ गया।

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