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पढ़ाने वाली टीचर की रसीली चूत और दूध पिया

मैं अरुण कुमार शुक्ल दोस्तों मैं झांसी का रहने वाला हूँ. मैंने एक नये स्कूल में पढ़ाना शुरू किया था. वहां पर मुझे सिर्फ 4 हजार की मामूली सैलरी देने को उस कॉलेज के प्रिंसिपल ने कहा था. मैं बेरोजगार था. उपर से मैंने बीएड का कोर्स किया था. मुझे बच्चो को पढ़ाना काफी पसंद था. इसके सिवा मुझे कोई काम पसंद नही था. इसलिए मैंने इस स्कूल में पढ़ाना शुरू कर दिया. यहाँ पर सैलरी काफी कम थी. मन तो मेरा बिलकुल नही था पर मैंने किसी तरह पढ़ाना शुरू कर दिया. धीरे धीरे मुझे वहां अच्छा लगने लगा. उस स्कूल में 10 जेंट्स टीचर थे और करीब 8 लेडीस टीचर थी. बाद में मुझे मालूम पड़ा की सारे जेंट्स टीचर ने एक एक लेडीज टीचर को पटा रखा था और उनकी खूब चुदाई करते थे. मेरे लिए कोई लेडीज टीचर खाली नही थी.  
कुछ दिनों बाद स्कूल में मोनिका नाम की एक मस्त लड़की पढ़ाने आई. मैंने उससे तुरंत दोस्ती कर ली और उसे लाइन देने लगा. स्कूल में सारे जेट्स टीचर के पास अपनी अपनी माल थी इसलिए मोनिका को कोई भी लाइन नही देता था. एक दिन मैंने उसे स्कूल की छत पर आने को कहा. जैसे ही मोनिका आई मैंने उसे पकड़ लिया और उसके होठो पर किस कर लिया. वो बहुत सेक्सी माल थी. उसका जिस्म भी काफी भरा हुआ था. मेरा उसे चोदने का मन कर रहा था. अब वो भी मुझसे पट गयी थी. मैंने उसे 10 मिनट तक अपनी बाहों में भरके रखा और उसके होठ चूसने लगा.
“अरुण—-छोड़ो यार कोई आ जाएगा” मोनिका बोली
“नही जान. पहले बताओ की चूत कब दोगी???” मैंने पूछा
“अच्छा ठीक आज मेरे रूम पर आ जाना और कोई पूछे तो बता देना की तुम मेरे भाई हो” मोनिका बोली
वो स्कूल के पास ही एक घर में किराये का कमरा लेकर रहती थी. शाम को मैं पंहुच गया. सीधा उसके कमरे में घुस गया. अंदर से मैंने दरवाजा बंद कर लिया. मोनिका अच्छी तरह से तैयार थी. लग रहा था की उसने अभी अभी नहाया है. वो कुवारी थी और अभी शादी नही हुई थी. मैंने उसे बाहों में कस लिया और हम दोनों सीधा बिस्तर पर चले गये.
“अरे रुको बाबा. तुम्हारे लिए चाय बनाती हूँ” मोनिका बोली     
“नही जान. आज मुझे चाय नही पीनी है. आज मैं तुम्हारी चूची और रसेदार चूत पियूँगा” मैंने कहा तो मोनिका शर्मा गयी. उसने एक हल्की लाल रंग की मैक्सी पहन रखी थी. रात में वो मैक्सी पहन कर ही सोती थी. हम दोनों बिस्तर पर लेट गये. मैंने उसके उपर लेट गया. फिर हम किस करने लगे. दोस्तों वो बहुत सुंदर, सेक्सी और हॉट लड़की थी. उसका जिस्म बिलकुल भरा हुआ था. आज वो भी चुदने के फुल मूड में थी. मैं उसके होठ चूसने लगा. हम दोनों होठ से होठ जोड़कर चुम्बन करने लगे. ओह्ह्ह…सायद वो पहली बार किसी मर्द को अपने होठ चूसा रही थी. मैंने उसके कंधे पकड़ लिया और कुछ देर में हम दोनों बहुत आक्रामक और गर्म हो गये. हम दोनों के अंदर चुदाई की आग जल उठी थी. मैंने उसका गहरा चुम्बन लेने लगा. लग रहा था की मैं उसके लबो को खा ही जाऊँगा. वो भी आक्रामक होकर मेरे होठ चूस रही थी. फिर हम दोनों एक दूसरे की जीभ और लार चूसने लगे. मेरा हाथ उसकी चिकनी, पतली, सेक्सी और छरहरी कमर पर चला गया था. मैंने हाथ से उसकी मैक्सी को उपर कर दिया तो उसकी पतली सेक्सी कमर मिल गयी. जैसा टीवी में मॉडल्स की बड़ी पतली पतली कमर होती है, ठीक उसी तरह मेरी गर्लफ्रेंड मोनिका की कमर थी.
मैंने दोनों हाथ उसकी पतली कमर पर रख किये और सहलाने लगा. आज इस माल को मुझे कसके चोदना है, मैंने मन ही मन में खुद से कहा. मेरे हाथ उसकी मक्खन जैसी पतली कमर पर जहाँ वहां रेंग रहे थे. हम दोनों एक दूसरे के ओंठ और जीभ चूस रहे थे. हम दोनों की आँखें बंद थी. खुले बालों में मेरी गर्लफ्रेंड मोनिका बहुत ही सेक्सी लग रही थी. मैं अपने हाथो से उसकी लाल मैक्सी को उपर और उपर करता जा रहा था. अब मुझे मोनिका का पेट दिखने लगा था. मैंने दोनों हाथो से मोनिका की कमर को पकड़ लिया और सहलाने लगा. धीरे धीरे मैंने उपर की तरफ बढ़ रहा था.
हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था. मैंने उसके लबो को जी भरकर चूसा और उसके गुलाबी होठो की सारी लाली और कुवारापन चुरा लिया. फिर मैं उसके मैक्सी के सिरे को पकड़कर निकालने लगा. थोड़ी शर्म के बाद उसने अपने हाथ उपर कर दिए और मैंने उसकी मैक्सी निकाल दी और किनारे रख दिया. बाप रे!!…कितनी गोरी मॉल थी वो अंदर से. मेरी गर्लफ्रेंड मोनिका ने मैक्सी से मैचिंग वाली लाल रंग की जालीदार ब्रा पहन रखी थी. उसके कबूतरों को देख देख के तो मेरे तोते उड़े जा रहे थे. आज मैं पहली बार मोनिका को नंगी देखा था. एक बार फिर से मैंने उसे पकड़ लिया और सीने से लगा लिया. मुझ पर वासना पूरी तरह से छा गयी. आज तो इस लौंडिया की चूत मुझे हर हालत में चाहिए थी. मैंने पागलों की तरह फिर से मोनिका को गाल, गले, कंधों पर किस करने लगा. वो भी चुदाई के फुल मूड में थी और मुझे हर जगह किस कर रही थी. उसके बड़े बड़े कबूतर देख के तो मेरा दिल बल्लियों उछल रहा था. 
मैंने उसकी ब्रा खोल दी. वो नंगी हो गयी. उसकी छातियों पर मैंने अपने हाथ रख दिए. उफ्फ्फ्फ़!! कितने मस्त, कितने बड़े बड़े दूध थे उसके. इतने सुंदर मम्मे मैंने आज तक नही देखे थे. मैं हाथ से उसके पके पके आमों को दबाने लगा. मोनिका को भी मजा आ रहा था.
वो “ “आआआआअह्हह्हह—-ईईईईईईई—ओह्ह्ह्हह्ह—-” करके सिसकी लेने लगी. मैं खुद को रोक न सका. मोनिका सिसकने लगी. मैं और जोर जोर से उनकी नर्म नर्म छातियाँ दबाने लगा. वो और जोर जोर से सिसकने लगी. फिर मैं उसके पके पके आमों को मुँह में भर के पीने लगा. मैं अपने नुकीले दांतों से उसकी मुलायम मुलायम छातियों को काट काटकर पी रहा था. दांतों से चबा चबा कर मैं उसकी मस्त मस्त उजली उजली छातियाँ पी रहा था. कसम से दोस्तों, ये दृश्य बहुत मजेदार था. मैं अपनी गर्लफ्रेंड की छातियों को भर भरके पी रहा था. मैं पूरे मजे मार रहा था. वो छातियाँ शायद दुनिया की सबसे रसीली, गोल और शानदार छातियाँ थी. मैं तेज तेज मुंह में भरकर अपनी माल की चूची पीने लगा था. मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया था और मोनिका की चूत मारने को बेक़रार था. मैं हपर हपर करके लपर लपर करके उसकी नुकीली नारियल जैसी दिखने वाली बेहद कमसिन चूचियों को मुँह में भरके पी रहा था. मोनिका के दूध इतने मुलायम मक्खन की तरह थे की मेरा दांत उसमे अपने आप गड़ जाते थे और निशान बन जाते थे.
“अरुण… मुझे चोद लो, मेरे मम्मे पी लो मगर अपने दांत मेरे बूब्स पर मत गडाओ, वरना मैं अपने होने वाले पति को क्या जवाब दूंगी” मोनिका अपनी आँखें बंद किये ही बोली. मैं इस बात से सहमत था, इसलिए मैंने दांत गड़ाना बंद कर दिया. धीमे धीमे आराम आराम से मैं उसके दूध पीने और चूसने लगा. उसे हल्का हल्का दर्द हो रहा था, उतेज्जना भी हो रही थी और मजा भी आ रहा था. ‘अरुण …. आराम से चूसो!! आराम से मेरे जानम’ मोनिका बोली.
मेरा बस चलता तो मैं उसकी छातियाँ खा ही लेता. फिर मैं उसकी रसीली छातियों को अपने हाथों से जोर जोर से दबाने लगा और निपल्स पर अपनी जीभ फेरने लगा और पीने लगा. दोस्तों, बड़ी देर तक यही खेल चलता रहा. मेरी गर्लफ्रेंड सच में कमाल की जिस्म की मलिका थी. वो किसी अफसरा जितनी सुंदर थी. मैंने बड़ी देर तक उसकी नर्म नर्म छातियों का मदिरापान किया और सेक्स के नशे में आ गया.
मैंने उनकी पैंटी उतार दी. दोनों पैर खोल दिए. मैंने उसकी चूत में लंड डाल दिया और चोदने लगा. मेरी नजरों में मोनिका ने अपनी नजरें डाल दी. छिनाल को मैं घूरते घूरते ताड़ते ताड़ते पेलने लगा. मैं जोर जोर से अपनी कमर चला चलाकर उसे चोद रहा था. मोनिका को इस तरह आँखों में आँखें डालकर खाने में विशेष मजा और सुख मिल रहा था. मेरा लौड़ा किसी ट्रेन की तरह उसकी चूत की दरार में फिसल रहा था. बहुत अच्छे से चूत मार रहा था. वो “ओह्ह माँ—-ओह्ह माँ—उ उ उ उ उ——अअअअअ आआआआ—-” बोलकर चिल्ला रही थी. फिर मुझे बड़ी जोर की चुदास चढ़ी. बिजली की तरह मैं मोनिका को खाने लगा. इतनी जोर जोर से उसे चोदने लगा की एक समय लगा की कहीं उसकी बुर ही ना फट जाए. मेरे खटर खटर के धक्कों से मेरी प्रेमिका का पूरा जिस्म काँप गया. उसके चूचे हिलकर थरथराने लगे. मैं बिजली की तरह मोनिका को पेलने लगा. वो “ओहह्ह्ह—ओह्ह्ह्ह—अह्हह्हह—अई–अई- -अई— उ उ उ उ उ—” की कामुक सिस्कारियां लेने लगी. मुझे लगा रहा था की झड़ने वाला हूँ. पर ऐसा नही हुआ. मेरा मोटा सा लौड़ा मेरी उसके भोसडे में झड़ने का नाम नही ले रहा था.    
मैं बहुत देर तक मोनिका को चोदता रहा पर फिर भी नहीं झडा. मैंने लौड़ा झटके से निकाल लिया और उसकी गर्म गर्म जलती चूत को पीने लगा. वो “आआआअह्हह्हह—–ईईईईईईई—-ओह्ह्ह्—-अई- -अई–अई—–अई–मम्मी—-” की आवाजे निकालने लगी. मुझे उसकी मधुर आवाजे और चुदासा कर रही थी. वाकई ये एक शानदार अनुभव था. कुछ देर बाद मोनिका की चूत ठंडी पड़ गयी थी. मेरे लौड़े की खाल पीछे को सरक आई थी. गोल गोल मुड़कर मेरे लौड़े की खाल पीछे आ गयी. मेरा सुपाडा अब गहरे गुलाबी रंग का हो गया था. मेरे लौड़े का रूप ही बदल गया था मोनिका की बुर चोदकर. अब मेरा लौड़ा किसी बड़े उम्र के आदमी वाला लौड़ा दिख रहा था. मैं कुछ देर तक अपना लौड़ा देखता रहा फिर मैंने मोनिका की छोटी सी चूत में डाल दिया. फिर से मैं उसे चोदने लगा. इस बार मैंने बिना रुके उसे कई मिनट तक चोदा क्यूंकि एक बार भी मैं रुकता या आराम करता तो माल उसके भोसड़े में नही गिरता. अनेक अनगिनत धक्को के बीच चट चट की मीठी आवाज के साथ मैं अपनी प्रेमिका की चूत में हो गया. 

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